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इतनी सर्दी कि सूरज को भी आ गई कंपकंपी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 12 Jan 2017 12:24 AM IST
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कोहरे के बीच गुजरते वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
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सर्द हवाओं और अधिक ठंड के कारण जिला शीतलहर की चपेट में आ गया है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो इस मौसम का अब तक का सबसे कम है। ठंड अधिक होने के कारण धूप का भी कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। ठंड से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से तराई के जिले शीतलहर की चपेट में है। मुजफ्फरनगर जिले में बुधवार को इस मौसम का अब तक का सबसे कम तापमान रिकार्ड किया गया। न्यूनतम तापमान यहां 1.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ठंड के चलते आम जनजीवन यहां पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सुबह के समय ठंड और कोहरे के चलते सड़कें भी सुनसान दिखाई दी।
दुपहिया वाहन तो सड़क से मानों गायब से हो गए। दोपहर बाद ही बाजारों में कुछ रौनक दिखाई दी। ठंड इतनी ज्यादा है कि दिन की धूप का भी लोगों पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। आम आदमी दिन में भी ठंड से कांपता रहा।
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बाजारों और यातायात व्यवस्था पर ठंड का असर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर तक बाजारों में जहां सुनसान की स्थिति रही, वहीं शाम होते ही बाजार फिर से सूने हो गए। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाने में लगे रहे। बुधवार को ठंड इतनी ज्यादा थी कि हाथ पैर कांपते दिखाई दे रहे थे। स्कूलों में कक्षा आठ तक की छुट्टी होने पर बच्चों को राहत की सांस जरूर मिली है।
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से तराई के जिले शीतलहर की चपेट में है। मुजफ्फरनगर जिले में बुधवार को इस मौसम का अब तक का सबसे कम तापमान रिकार्ड किया गया। न्यूनतम तापमान यहां 1.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ठंड के चलते आम जनजीवन यहां पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सुबह के समय ठंड और कोहरे के चलते सड़कें भी सुनसान दिखाई दी।
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दुपहिया वाहन तो सड़क से मानों गायब से हो गए। दोपहर बाद ही बाजारों में कुछ रौनक दिखाई दी। ठंड इतनी ज्यादा है कि दिन की धूप का भी लोगों पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। आम आदमी दिन में भी ठंड से कांपता रहा।
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बाजारों और यातायात व्यवस्था पर ठंड का असर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर तक बाजारों में जहां सुनसान की स्थिति रही, वहीं शाम होते ही बाजार फिर से सूने हो गए। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाने में लगे रहे। बुधवार को ठंड इतनी ज्यादा थी कि हाथ पैर कांपते दिखाई दे रहे थे। स्कूलों में कक्षा आठ तक की छुट्टी होने पर बच्चों को राहत की सांस जरूर मिली है।