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कर्बला में ताजिये दफनाए गए, मातम किया,

Fri, 21 Sep 2018 11:59 PM IST
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो Updated Fri, 21 Sep 2018 11:59 PM IST
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Tajah was buried in Karbala, wept,
cultural - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर। हजरत इमाम हुसैन और उनके जानशीनों की याद में शिया सोगवारों ने खूनी मातम कर खिराजे अकीदत पेश की। जंजीर, छुरियों, तलवारों से शिया सोगवारों ने मातम किया। देर रात काली नदी पर करबला में ताजिये दफनाए गए।   शहर में एक मोहर्रम से चली आ रही मजलिसों और जुलूसों का सिलसिला खत्म हो गया। सुबह नौ बजे काली नदी स्थित मेला घाट नमाजगाह पर रोजे आशूरा आमाल और नमाज मौलाना अफसर अली ने अदा कराई। इस मौके पर इंतजार जैदी ने कहा कि हजरत इनाम हुसैन जिनको इराक के करबला नामक शहर पर सीरिया के शासक यजीद ने अत्यंत बर्बरता के साथ इमामे हुसैन और उनके जानशीनों और रिश्तेदारों को शहीद कर दिया था।
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इमामे हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर, 18 वर्षीय हजरत अली अकबर, भाई हजरत अब्बास, भतीजे हजरत कासिम और अजीत रिश्तदारों सहित 72 साथियों को हजारों यजीदी सैनिकों ने तीन दिन तक भूखा प्यासा रखने के बाद बड़ी बेदर्दी के साथ नमाज पढ़ते वक्त शहीद कर दिया। हजरत इमाम हुसैन की कब्र पर जो भवन बना है उसी भवन के आकार का एक छोटा सा भवन कागज और बांस की तिल्लियों से बनाकर शिया सोगवार इमाम हुसैन को याद करते हैं। इसी को ताजिया कहते हैं।
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इमाम बारगाह मल्हूपुरा, लद्दावाला अंजुमने खादिमे हुसैन सुन्नत वल जमात के नोहाखान, सलीम अहमद, वसीम साबर, रफीक खैरी, जावेद सोनू, मेहराज वारसी,  नोहाख्वानी कर रहे थे। नियाजुपुरा, मिमलाना के मातमी जुलूस मोतीमहल के मुख्य जुलूस में शामिल हुए। यहां से शहर की सभी मातमी अंजूमनों ने नोहाख्वानी करते हुए हनुमान चौक पर जंजीरों, छुर्रियों और तलवारों से दिल दहला देने वाला मातम किया। नोहाख्वानी असकरी, शादाब खां, साहबे आलम, शाजम, सोनू, शबी हैदर, लारेब आदि नदी रोड से होते हुए काली नदी पार स्थित करबला के मुतवल्ली हैदर मेहंदी, मास्टर सादिक की देखरेख में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए।
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उधर, पुरकाजी कस्बे में शिया सोगवारों ने मोहर्रम पर मातमी जलूस निकाला। कस्बे के बड़ा दरबार से आरंभ हुआ मातमी जुलूस सब्जी मंडी, मेन बाजार से होता हुआ हाईवे पर पहुंचा जहां पर शिया सोंगवारों ने मातम कर अपने शरीर लहूलुहान कर लिए। जुलूस में नसीर अहमद, मियां मेहदी रजा, असगर मेंहदी, किश्वर, के अलावा पूर्व गृह मंत्री सईदुज्जमा, सलमान सईद, भारत भूषण खुल्लर, आदि मौजूद रहे।


उधर, बुढ़ाना में शिया सोगवारों ने मोहर्रम का जुलूस निकालकर करबला के शहीदों की शहादत को याद किया। जुलूस के दौरान सोगवारों ने मातमपुर्सी की। शिया सोगवारों ने शुक्रवार को मोहर्रम का जुलूस निकालकर करबला के शहीदों की शहादत को याद किया। इमामबाड़ा में मजलिस हुई। मौलाना तस्सवर हुसैन और मौलाना अर्सी ने फरमाया कि जनाबे अब्बास ने इमाम हुसैन के ऊपर अपनी जान न्योछावर कर दी।
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