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संस्कारयुक्त शिक्षा से समाज और राष्ट्र का उत्थान : सत्यपाल
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:44 AM IST
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स्वामी कल्याणदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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तीन सदी के युगदृष्टा, शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव की 14वीं पुण्यतिथि पर भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में महान संत को श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया गया। केंद्रीय मानव संसाधन, नदी विकास एवं जल संसाधन राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि भारत के नवनिर्माण के लिए संस्कार शालाएं खोली जाएं। संस्कारयुक्त शिक्षा से ही राष्ट्र और समाज का उत्थान होगा।
पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में परमपूज्य स्वामी कल्याणदेव की श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि पश्चिम के ग्रामीण अंचल में किसानों और मजदूरों को शिक्षा से जोड़ने में स्वामी कल्याणदेव का कार्य अद्वितीय और अमिट है। आजादी के बाद देश में शिक्षा बढ़ी, लेकिन वर्तमान में नैतिक मूल्यों का ह्रास चिंता जनक है।
भावी पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा की जरूरत है। गांव-गांव और शहरों में संस्कार शालाएं खुलनी चाहिए, तभी समाज का उद्धार होगा। महाभारत के बाद वेदों की उपेक्षा से बुराइयां, कुरीतियां, पाखंड, अंधविश्वास बढ़ता गया।
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वेदों को सम्मान दें, वेद मार्ग पर चलें और वेदानुकूल आचरण करें तभी कल्याण होगा। भागवत के सार तत्व को समझना जरूरी है। शब्दों की वैज्ञानिकता महत्वपूर्ण है। शब्द दिखाई नहीं देते मगर वायु मंडल प्रभावी रहते हैं। शुकतीर्थ में महामुनि शुकदेव की अमर वाणी आज भी गूंज रही है। जिनके जीवन में सदाचरण है, वहीं सत्य है।
अल्पसंख्यक कल्याण, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि शुकतीर्थ के विकास को सरकार प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। सीएम योगी से इस संदर्भ में वार्ता हो चुकी है। पीएम के वाराणसी दौरे की वजह से सीएम आज शुकतीर्थ नहीं आ पाये हैं। नहीं तो उनका यहां आना तय था।
तीर्थों और संतों की कृपा से केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं। यदि अब भी धार्मिक नगरी का विकास नहीं हुआ तो कब होगा। स्वामी कल्याणदेव के निस्वार्थ सेवा कार्यों का राष्ट्र ऋणी है। क्षेत्रीय विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने कहा कि महाभारत कालीन शुक्रताल के जीर्णोद्धार में वीतराग संत का त्याग, तपस्या और परिश्रम दिख रहा है। सरकारों की उपेक्षा से शुकतीर्थ त्रस्त है। यहां जन सुलभ विकास ही शिक्षा ऋषि को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने संत-महात्माओं, अतिथियों और भागवत भक्तों का आभार व्यक्त किया।
पूर्व विधायक जगत सिंह मेरठ, हरियाणा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एमएल रंगा, आचार्य गुरुदत्त आर्य, ट्रस्ट अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, जिला सहकारी बैंक पूर्व अध्यक्षा वंदना वर्मा, सरजीत सिंह ने विचार रखे।
संचालन शिक्षाविद् गजेंद्र पाल सिंह ने किया। रमेश मलिक, देवराज पंवार, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, वीरपाल निर्वाल, जगदीश पांचाल, पूर्व प्राचार्य रामपाल सिंह, पूर्व न्यायाधीश बीबी सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ हरपाल पंवार, सत्यप्रकाश रेशू, उदयवीर सिंह, प्रधानाचार्य राकेश कुमार, जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र, विकास कुमार आदि मौजूद रहे।
परोपकार को समर्पित रहा गुरुदेव का जीवन : ओमानंद
शुक्रताल। शुकतीर्थ जीर्णोद्धारक स्वामी कल्याणदेव की सेवाभावी दिव्य जीवन यात्रा के साक्षी परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने अपना शिष्य बनाकर मेरा जीवन धन्य कर दिया है। डोंगरे भागवत भवन में श्रद्धांजलि सभा में आशीर्वचन देते हुए जीवन का ध्येय परोपकार बताया।
संत वही है जो परमार्थ में अपना जीवन लगाये। भगवान बुद्ध, स्वामी विवेकानंद के त्याग और सेवा मंत्र को गुरुदेव ने साक्षात किया। जनप्रतिनिधि गांव में जायें, पीड़ितों का दर्द सुने और समस्याओं का हल करें। शिक्षा ऋषि के आदर्श, उपदेश और प्रेरणा समाज का मार्ग दर्शन करती रहेगी।
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पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में परमपूज्य स्वामी कल्याणदेव की श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि पश्चिम के ग्रामीण अंचल में किसानों और मजदूरों को शिक्षा से जोड़ने में स्वामी कल्याणदेव का कार्य अद्वितीय और अमिट है। आजादी के बाद देश में शिक्षा बढ़ी, लेकिन वर्तमान में नैतिक मूल्यों का ह्रास चिंता जनक है।
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भावी पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा की जरूरत है। गांव-गांव और शहरों में संस्कार शालाएं खुलनी चाहिए, तभी समाज का उद्धार होगा। महाभारत के बाद वेदों की उपेक्षा से बुराइयां, कुरीतियां, पाखंड, अंधविश्वास बढ़ता गया।
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वेदों को सम्मान दें, वेद मार्ग पर चलें और वेदानुकूल आचरण करें तभी कल्याण होगा। भागवत के सार तत्व को समझना जरूरी है। शब्दों की वैज्ञानिकता महत्वपूर्ण है। शब्द दिखाई नहीं देते मगर वायु मंडल प्रभावी रहते हैं। शुकतीर्थ में महामुनि शुकदेव की अमर वाणी आज भी गूंज रही है। जिनके जीवन में सदाचरण है, वहीं सत्य है।
अल्पसंख्यक कल्याण, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि शुकतीर्थ के विकास को सरकार प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। सीएम योगी से इस संदर्भ में वार्ता हो चुकी है। पीएम के वाराणसी दौरे की वजह से सीएम आज शुकतीर्थ नहीं आ पाये हैं। नहीं तो उनका यहां आना तय था।
तीर्थों और संतों की कृपा से केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं। यदि अब भी धार्मिक नगरी का विकास नहीं हुआ तो कब होगा। स्वामी कल्याणदेव के निस्वार्थ सेवा कार्यों का राष्ट्र ऋणी है। क्षेत्रीय विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने कहा कि महाभारत कालीन शुक्रताल के जीर्णोद्धार में वीतराग संत का त्याग, तपस्या और परिश्रम दिख रहा है। सरकारों की उपेक्षा से शुकतीर्थ त्रस्त है। यहां जन सुलभ विकास ही शिक्षा ऋषि को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने संत-महात्माओं, अतिथियों और भागवत भक्तों का आभार व्यक्त किया।
पूर्व विधायक जगत सिंह मेरठ, हरियाणा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एमएल रंगा, आचार्य गुरुदत्त आर्य, ट्रस्ट अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, जिला सहकारी बैंक पूर्व अध्यक्षा वंदना वर्मा, सरजीत सिंह ने विचार रखे।
संचालन शिक्षाविद् गजेंद्र पाल सिंह ने किया। रमेश मलिक, देवराज पंवार, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, वीरपाल निर्वाल, जगदीश पांचाल, पूर्व प्राचार्य रामपाल सिंह, पूर्व न्यायाधीश बीबी सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ हरपाल पंवार, सत्यप्रकाश रेशू, उदयवीर सिंह, प्रधानाचार्य राकेश कुमार, जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र, विकास कुमार आदि मौजूद रहे।
परोपकार को समर्पित रहा गुरुदेव का जीवन : ओमानंद
शुक्रताल। शुकतीर्थ जीर्णोद्धारक स्वामी कल्याणदेव की सेवाभावी दिव्य जीवन यात्रा के साक्षी परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने अपना शिष्य बनाकर मेरा जीवन धन्य कर दिया है। डोंगरे भागवत भवन में श्रद्धांजलि सभा में आशीर्वचन देते हुए जीवन का ध्येय परोपकार बताया।
संत वही है जो परमार्थ में अपना जीवन लगाये। भगवान बुद्ध, स्वामी विवेकानंद के त्याग और सेवा मंत्र को गुरुदेव ने साक्षात किया। जनप्रतिनिधि गांव में जायें, पीड़ितों का दर्द सुने और समस्याओं का हल करें। शिक्षा ऋषि के आदर्श, उपदेश और प्रेरणा समाज का मार्ग दर्शन करती रहेगी।