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500 रुपये क्विंटल बिक रहा गन्ना, पड़ोसी राज्यों तक जूस के लिए हो रही सप्लाई
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:22 AM IST
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खेत में गन्ने की छिलाई करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी में गन्ने की रस की मांग बढ़ने से कीमतें उछाल पर हैं। प्राइवेट मिलों के पेराई सत्र खत्म होने के बाद जिन किसानों ने गन्ना रोका था, उनकी बल्ले-बल्ले हो रही है। मांग बढ़ने के कारण क्षेत्र के किसानों का गन्ना 450-500 रुपये क्विंटल बिक रहा है।
रोहाना मिल क्षेत्र में शुगर मिल बंद होने के बाद दूसरे प्रदेशों के व्यापारी गन्ना खरीदने के लिए जाल बिछा लेते हैं। अगेती प्रजाति का गन्ना क्षेत्र की खासी पहचान है। सबसे बेहतर 8436 प्रजाति है। सीजन में इस वैरायटी का मूल्य 315 रुपये क्विंटल निर्धारित है, जिसमें रस की मात्रा अधिक होने के कारण किसानों का गन्ना ऑफ सीजन में 450 से 500 रुपये क्विंटल तक नगद बिक रहा है।
बधाई कलां के किसान अरविंद मलिक बताते हैं कि उन्होंने करीब एक हजार क्विंटल गन्ना खेत में रोक लिया था। अब 500 रुपये तक बिक रहा है। बधाई कलां, रोहाना क्षेत्र और दधेडू कलां से रोजाना कई गाड़ियां गन्ना लादकर दिल्ली, देहरादून और गाजियाबाद समेत कई महानगरों को जा रही हैं। देवबंद क्षेत्र से किसान गन्ना लाकर रोहाना मंडी में बाहरी व्यापारियों को बेच रहे हैं। किसान दिनेश त्यागी कहते हैं कि 8436 वैरायटी सबसे अच्छी किस्म है।
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खेत से कटने के बाद ढककर रखा गया गन्ना एक महीने तक खराब अथवा खट्टा नहीं होता है। रोहाना गन्ना समिति सचिव नरेश कुमार ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ हर साल गन्ने के जूस की मांग खूब बढ़ती है, लेकिन चंद किसानों को ही गन्ने की बढ़ी कीमत का लाभ मिल पाता है। हालांकि देर तक गन्ना रोकने के लिए किसानों को रखरखाव और बीमारी से बचाव पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
मोबाइल कोल्हू बुझा रहे लोगों की प्यास
चरथावल। चरथावल-रोहाना मुख्य मार्ग और मुजफ्फरनगर-थानाभनव मार्ग पर कई दर्जन मोबाइल कोल्हू गन्ने के जूस से यात्रियों की प्यास बुझा रहे हैं। कोल्हू मालिक भी गन्ने को इस दाम पर नहीं खरीद पाते। महंगे दामों पर गन्ना बिकने के कारण पूरे मई चलने वाले कोल्हू पहले ही बंद हो गए थे। किसान मोहित कुमार, नितिन मलिक, कुबेरदत्त त्यागी और सुशील त्यागी कहते हैं कि जिनके खेतों में गन्ना खड़ा है, उनको मोटा मुनाफा हो रहा है।
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रोहाना मिल क्षेत्र में शुगर मिल बंद होने के बाद दूसरे प्रदेशों के व्यापारी गन्ना खरीदने के लिए जाल बिछा लेते हैं। अगेती प्रजाति का गन्ना क्षेत्र की खासी पहचान है। सबसे बेहतर 8436 प्रजाति है। सीजन में इस वैरायटी का मूल्य 315 रुपये क्विंटल निर्धारित है, जिसमें रस की मात्रा अधिक होने के कारण किसानों का गन्ना ऑफ सीजन में 450 से 500 रुपये क्विंटल तक नगद बिक रहा है।
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बधाई कलां के किसान अरविंद मलिक बताते हैं कि उन्होंने करीब एक हजार क्विंटल गन्ना खेत में रोक लिया था। अब 500 रुपये तक बिक रहा है। बधाई कलां, रोहाना क्षेत्र और दधेडू कलां से रोजाना कई गाड़ियां गन्ना लादकर दिल्ली, देहरादून और गाजियाबाद समेत कई महानगरों को जा रही हैं। देवबंद क्षेत्र से किसान गन्ना लाकर रोहाना मंडी में बाहरी व्यापारियों को बेच रहे हैं। किसान दिनेश त्यागी कहते हैं कि 8436 वैरायटी सबसे अच्छी किस्म है।
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खेत से कटने के बाद ढककर रखा गया गन्ना एक महीने तक खराब अथवा खट्टा नहीं होता है। रोहाना गन्ना समिति सचिव नरेश कुमार ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ हर साल गन्ने के जूस की मांग खूब बढ़ती है, लेकिन चंद किसानों को ही गन्ने की बढ़ी कीमत का लाभ मिल पाता है। हालांकि देर तक गन्ना रोकने के लिए किसानों को रखरखाव और बीमारी से बचाव पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
मोबाइल कोल्हू बुझा रहे लोगों की प्यास
चरथावल। चरथावल-रोहाना मुख्य मार्ग और मुजफ्फरनगर-थानाभनव मार्ग पर कई दर्जन मोबाइल कोल्हू गन्ने के जूस से यात्रियों की प्यास बुझा रहे हैं। कोल्हू मालिक भी गन्ने को इस दाम पर नहीं खरीद पाते। महंगे दामों पर गन्ना बिकने के कारण पूरे मई चलने वाले कोल्हू पहले ही बंद हो गए थे। किसान मोहित कुमार, नितिन मलिक, कुबेरदत्त त्यागी और सुशील त्यागी कहते हैं कि जिनके खेतों में गन्ना खड़ा है, उनको मोटा मुनाफा हो रहा है।