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Muzaffarnagar News: 4610 दिव्यांग बच्चों को दी जाएगी विशेष शिक्षा
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951 विद्यालयों में समर्थ एप के माध्यम से की गई स्क्रीनिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में समर्थ एप के माध्यम से की गई स्क्रीनिंग में चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को चिह्नित किया गया। इन दिव्यांग बच्चों को विशेष कक्षा देने के साथ-साथ उन्हें उपकरण वितरित करने के लिए कैंप भी लगाया जाएगा।
बीएसए शुभम शुक्ला ने बताया कि समर्थ एप के माध्यम से सभी 951 विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग कर डेटा अपडेट किया गया। इनमें से दिव्यांग बच्चों को भी चिह्नित किया गया, जिनकी संख्या 4610 है। सभी दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के माध्यम से विशेष क्लास दी जाएगी। इसके अलावा इनके प्रमाण पत्र बनवाए जाने के लिए मेडिकल कैंप लगाया जाएगा।
साथ ही सभी दिव्यांग बच्चों को उपकरण वितरित करने के लिए दो कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म अवकाश खत्म होने पर विद्यालय खुलने के बाद फिर से दिव्यांग बच्चों को चिह्नित किया जाएगा।
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दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की कमी
जिले में बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की भी कमी है। 20 दिव्यांग बच्चों के लिए एक स्पेशल एजुकेटर होना चाहिए, लेकिन पूरे जिले में केवल 18 ही स्पेशल एजुकेटर है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में समर्थ एप के माध्यम से की गई स्क्रीनिंग में चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को चिह्नित किया गया। इन दिव्यांग बच्चों को विशेष कक्षा देने के साथ-साथ उन्हें उपकरण वितरित करने के लिए कैंप भी लगाया जाएगा।
बीएसए शुभम शुक्ला ने बताया कि समर्थ एप के माध्यम से सभी 951 विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग कर डेटा अपडेट किया गया। इनमें से दिव्यांग बच्चों को भी चिह्नित किया गया, जिनकी संख्या 4610 है। सभी दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के माध्यम से विशेष क्लास दी जाएगी। इसके अलावा इनके प्रमाण पत्र बनवाए जाने के लिए मेडिकल कैंप लगाया जाएगा।
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साथ ही सभी दिव्यांग बच्चों को उपकरण वितरित करने के लिए दो कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म अवकाश खत्म होने पर विद्यालय खुलने के बाद फिर से दिव्यांग बच्चों को चिह्नित किया जाएगा।
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दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की कमी
जिले में बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की भी कमी है। 20 दिव्यांग बच्चों के लिए एक स्पेशल एजुकेटर होना चाहिए, लेकिन पूरे जिले में केवल 18 ही स्पेशल एजुकेटर है।