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किसानों ने सपा सरकार को ललकारा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 02 Feb 2016 12:14 AM IST
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खतौली। गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर हाईवे पर उतरी भाकियू को मनाने के लिए सूबे के मुख्य सचिव को खुद पहल करनी पड़ी। लखनऊ में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से वार्ता के बाद देर रात को चक्का जाम को खत्म कर दिया गया।
एनएच-58 पर सोमवार को भाकियू के चक्का जाम को लेकर लखनऊ तक खलबली मची रही। मुख्य सचिव आलोक रंजन को हालात को देखते हुए खुद किसानों को मनाने के लिए पहल करनी पड़ी। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से लखनऊ में वार्ता की गई। भाकियू के मुद्दों पर मुख्य सचिव ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। वार्ता के बाद भाकियू ने धरना समाप्त करने का निर्णय ले लिया।
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ नरेश टिकैत ने लखनऊ में हुई वार्ता के बाद यहां चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा की। बताया कि वार्ता में सरकार ने 15 दिन का समय लेते हुए गन्ने का 280 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक मुश्त भुगतान करने तथा किसानों पर बिजली बिल की दो माह की पैनल्टी माफ करने का आश्वासन दिया गया है।
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मुख्य सचिव ने वार्ता में कहा कि अब तक जिस हिसाब से गन्ने का भुगतान किया जा रहा था। यह फैसला कैबिनेट का था, अब 280 रूपये प्रति क्विंटल गन्ने का भुगतान तथा एक मुश्त भुगतान देने संबंधी मामले को कैबिनेट में रखा जाएगा। चौधरी नरेश टिकैत ने धरना समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि अगर सरकार अपने वायदा से मुकर गई तो किसान फिर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा।
इससे पहले गन्ना मूल्य वृद्धि और बकाए के भुगतान को लेकर भाकियू ने नेशनल हाईवे पर डेरा डाल लिया है। हजारों की तादाद में किसान नावला कोठी पर पहुंचे और हाईवे जाम कर दिया। भाकियू सुप्रीमो चौधरी नरेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया। टिकैत ने चेताया कि जब तक मांगे पूरी नहीं की जाएंगी, चक्का जाम और धरना जारी रहेगा। हाईवे जाम से परेशान लोग दिनभर संपर्क मार्गों से निकलने के लिए भटकते रहे। सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे भाकियू के नेतृत्व में बड़ी तादाद में किसान नावला कोठी के पास एनएच-58 पर पहुंचे और डेरा डाल लिया और धरने पर बैठ गए।
धरने को संबोधित करते हुए चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र, प्रदेश सरकार और शुगर मिल मालिकों ने बात नहीं सुनी तो उन्हें मजबूर होकर प्रदेशव्यापी चक्का जाम करने की घोषणा करनी पड़ी। भाकियू का मकसद जनता को परेशान करने का नहीं है। सरकारों के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। शुगर मिलों ने किसानों को 240 रुपये क्विंटल गन्ने का भुगतान किया।
अब मिलों ने 10 रुपये और घटा दिए हैं। कुछ शुगर मिलों पर आज भी किसानों का करोड़ों का बकाया भुगतान बाकी है। सरकार और मिल मालिक किसानों का खुलकर शोषण कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली लाभकारी योजनाएं भी किसानों तक नहीं पहुंच रही हैं। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, वहां किसानों को 305 रुपये क्विंटल गन्ने का भुगतान मिल रहा है। उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, यहां केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों से ऐसा बर्ताव क्यों कर रही है।
हरियाणा में बिजली के रेट सही हैं, जबकि यूपी में बिजली सबसे ज्यादा महंगी है। सरकार किसानों का शोषण कर रही है। उन्होंने शासन और प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, अनिश्चितकालीन चक्का जाम और धरना रात-दिन जारी रहेगा। लखनऊ में किसानों का प्रतिनिधिमंडल पहुंच गया है। सरकार उनसे बातचीत कर किसानों की मांगें पूरे करे।
किसानों की टोलियों पर रही नजर
मुजफ्फरनगर। भाकियू के हाईवे पर चक्का जाम के दौरान ग्रामीण क्षेत्र से किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से शहर और बाहरी हिस्सों से होते हुए हाईवे तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई थी। नगर में जाम के अलावा किसानों के उग्र होने का डर था। इस वजह से पुलिस अफसरों ने शहर में पुलिस को अलर्ट कर दिया था। शहर कोतवाली और सिविल लाइंस थाने से टीमें बनाई गई थीं।
शामली बस अड्डे से होकर किसानों के आने की सूचना के बाद शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा मय फोर्स के जमे रहे। यहां से शामली की ओर से ट्रैक्टर-ट्रॉली से किसानों के आने की जानकारी मिली थी। उधर, भारतीय किसान संगठन के बैनर तले कलक्ट्रेट में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से भारी संख्या में किसान पहुंचने की सूचना से पुलिस में बेचैनी बढ़ गई। भाकियू के चक्का जाम और कलक्ट्रेट में भारतीय किसान संगठन के आंदोलन में शामिल होने के लिए शहर से अपने वाहनों से गुजरे किसानों पर नजर रखी गई।
शिवचौक, कचहरी गेट, प्रकाश चौक मीनाक्षी चौक, महावीर चौक, भोपा रोड, जानसठ रोड के चौराहे के अलावा वहलना चौक पर पुलिस के साथ पीएसी रही। रामपुर चौराहे पर पीएसी की टुकड़ी की तैनाती की गई। एसपी सिटी प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि किसानों के आंदोलन को लेकर पुलिस को सतर्कता का निर्देश दिया गया। शहर में चौकसी बरती गई।
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एनएच-58 पर सोमवार को भाकियू के चक्का जाम को लेकर लखनऊ तक खलबली मची रही। मुख्य सचिव आलोक रंजन को हालात को देखते हुए खुद किसानों को मनाने के लिए पहल करनी पड़ी। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से लखनऊ में वार्ता की गई। भाकियू के मुद्दों पर मुख्य सचिव ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। वार्ता के बाद भाकियू ने धरना समाप्त करने का निर्णय ले लिया।
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भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ नरेश टिकैत ने लखनऊ में हुई वार्ता के बाद यहां चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा की। बताया कि वार्ता में सरकार ने 15 दिन का समय लेते हुए गन्ने का 280 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक मुश्त भुगतान करने तथा किसानों पर बिजली बिल की दो माह की पैनल्टी माफ करने का आश्वासन दिया गया है।
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मुख्य सचिव ने वार्ता में कहा कि अब तक जिस हिसाब से गन्ने का भुगतान किया जा रहा था। यह फैसला कैबिनेट का था, अब 280 रूपये प्रति क्विंटल गन्ने का भुगतान तथा एक मुश्त भुगतान देने संबंधी मामले को कैबिनेट में रखा जाएगा। चौधरी नरेश टिकैत ने धरना समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि अगर सरकार अपने वायदा से मुकर गई तो किसान फिर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा।
इससे पहले गन्ना मूल्य वृद्धि और बकाए के भुगतान को लेकर भाकियू ने नेशनल हाईवे पर डेरा डाल लिया है। हजारों की तादाद में किसान नावला कोठी पर पहुंचे और हाईवे जाम कर दिया। भाकियू सुप्रीमो चौधरी नरेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया। टिकैत ने चेताया कि जब तक मांगे पूरी नहीं की जाएंगी, चक्का जाम और धरना जारी रहेगा। हाईवे जाम से परेशान लोग दिनभर संपर्क मार्गों से निकलने के लिए भटकते रहे। सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे भाकियू के नेतृत्व में बड़ी तादाद में किसान नावला कोठी के पास एनएच-58 पर पहुंचे और डेरा डाल लिया और धरने पर बैठ गए।
धरने को संबोधित करते हुए चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र, प्रदेश सरकार और शुगर मिल मालिकों ने बात नहीं सुनी तो उन्हें मजबूर होकर प्रदेशव्यापी चक्का जाम करने की घोषणा करनी पड़ी। भाकियू का मकसद जनता को परेशान करने का नहीं है। सरकारों के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। शुगर मिलों ने किसानों को 240 रुपये क्विंटल गन्ने का भुगतान किया।
अब मिलों ने 10 रुपये और घटा दिए हैं। कुछ शुगर मिलों पर आज भी किसानों का करोड़ों का बकाया भुगतान बाकी है। सरकार और मिल मालिक किसानों का खुलकर शोषण कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली लाभकारी योजनाएं भी किसानों तक नहीं पहुंच रही हैं। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, वहां किसानों को 305 रुपये क्विंटल गन्ने का भुगतान मिल रहा है। उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, यहां केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों से ऐसा बर्ताव क्यों कर रही है।
हरियाणा में बिजली के रेट सही हैं, जबकि यूपी में बिजली सबसे ज्यादा महंगी है। सरकार किसानों का शोषण कर रही है। उन्होंने शासन और प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, अनिश्चितकालीन चक्का जाम और धरना रात-दिन जारी रहेगा। लखनऊ में किसानों का प्रतिनिधिमंडल पहुंच गया है। सरकार उनसे बातचीत कर किसानों की मांगें पूरे करे।
किसानों की टोलियों पर रही नजर
मुजफ्फरनगर। भाकियू के हाईवे पर चक्का जाम के दौरान ग्रामीण क्षेत्र से किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से शहर और बाहरी हिस्सों से होते हुए हाईवे तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई थी। नगर में जाम के अलावा किसानों के उग्र होने का डर था। इस वजह से पुलिस अफसरों ने शहर में पुलिस को अलर्ट कर दिया था। शहर कोतवाली और सिविल लाइंस थाने से टीमें बनाई गई थीं।
शामली बस अड्डे से होकर किसानों के आने की सूचना के बाद शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा मय फोर्स के जमे रहे। यहां से शामली की ओर से ट्रैक्टर-ट्रॉली से किसानों के आने की जानकारी मिली थी। उधर, भारतीय किसान संगठन के बैनर तले कलक्ट्रेट में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से भारी संख्या में किसान पहुंचने की सूचना से पुलिस में बेचैनी बढ़ गई। भाकियू के चक्का जाम और कलक्ट्रेट में भारतीय किसान संगठन के आंदोलन में शामिल होने के लिए शहर से अपने वाहनों से गुजरे किसानों पर नजर रखी गई।
शिवचौक, कचहरी गेट, प्रकाश चौक मीनाक्षी चौक, महावीर चौक, भोपा रोड, जानसठ रोड के चौराहे के अलावा वहलना चौक पर पुलिस के साथ पीएसी रही। रामपुर चौराहे पर पीएसी की टुकड़ी की तैनाती की गई। एसपी सिटी प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि किसानों के आंदोलन को लेकर पुलिस को सतर्कता का निर्देश दिया गया। शहर में चौकसी बरती गई।