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Muzaffarnagar News: आस्था का केन्द्र खरड़ गांव का महाभारतकालीन शिव मंदिर
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बुढ़ाना के खरड़ गांव की जूड़ में महाभारत कालीन प्राचीन शिव मंदिर, श्रद्धालुओं की आस्था का केन्
संवाद न्यूज एजेंसी
बुढ़ाना। खरड़ गांव में महाभारतकालीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मंदिर परिसर में प्राचीन लिपि में लिखा हुआ पत्थर लगा है। मन में मुराद लेकर दूर-दराज से बड़ी संख्या में प्रतिवर्ष यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते है।
खरड़ गांव की महिला प्रधान पूनम मलिक और उनके पति विकास मलिक ने बताया कि करीब 558 बीघा में फैले हुए वन क्षेत्र में शिव मंदिर और कदम्ब के वृक्ष है। मंदिर के महंत मदन गिरी का कहना है कि बरनावा में लाक्षागृह से बचने के बाद अज्ञात वास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आकर रूके थे। भगवान शिव की आराधना के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कर अद्भुत पंचमुखी शिवलिंग स्थापित किया था। पांडवों से मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और विदुर के दूत यहां आए थे। मंदिर की दीवारों पर हाथ से चित्रकारी बनी है। मंदिर परिसर में प्राचीन लिपि में लिखा हुआ एक पत्थर भी लगा हुआ है।
भगवान कृष्ण के पैर पड़ने से उगे थे कदम्ब के पेड़
महाभारत कालीन शिव मंदिर में सदियों पुराने कदम्ब के पेड़ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पैर जहां पड़े, वहीं पर कदम्ब के पेड़ है। श्रद्धालु इन पेड़ों को भगवान का प्रतिरूप मानकर पूजा-अर्चना करते है। दूर-दराज से लोग व श्रद्धालु कदम्ब के पेड़ के दर्शन करने के लिए यहां आते है।
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बुढ़ाना। खरड़ गांव में महाभारतकालीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मंदिर परिसर में प्राचीन लिपि में लिखा हुआ पत्थर लगा है। मन में मुराद लेकर दूर-दराज से बड़ी संख्या में प्रतिवर्ष यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते है।
खरड़ गांव की महिला प्रधान पूनम मलिक और उनके पति विकास मलिक ने बताया कि करीब 558 बीघा में फैले हुए वन क्षेत्र में शिव मंदिर और कदम्ब के वृक्ष है। मंदिर के महंत मदन गिरी का कहना है कि बरनावा में लाक्षागृह से बचने के बाद अज्ञात वास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आकर रूके थे। भगवान शिव की आराधना के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कर अद्भुत पंचमुखी शिवलिंग स्थापित किया था। पांडवों से मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और विदुर के दूत यहां आए थे। मंदिर की दीवारों पर हाथ से चित्रकारी बनी है। मंदिर परिसर में प्राचीन लिपि में लिखा हुआ एक पत्थर भी लगा हुआ है।
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भगवान कृष्ण के पैर पड़ने से उगे थे कदम्ब के पेड़
महाभारत कालीन शिव मंदिर में सदियों पुराने कदम्ब के पेड़ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पैर जहां पड़े, वहीं पर कदम्ब के पेड़ है। श्रद्धालु इन पेड़ों को भगवान का प्रतिरूप मानकर पूजा-अर्चना करते है। दूर-दराज से लोग व श्रद्धालु कदम्ब के पेड़ के दर्शन करने के लिए यहां आते है।
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