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अटूट आस्था का केंद्र गोयला का शिव सिद्ध पीठ
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गोयला मंदिर में एतिहासिक शिवलिंग
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
हमारे शिवालय
कुएं की खोदाई में जमीन से निकली मूर्ति के बाद कराया गया था मंदिर का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। गांव गोयला का सिद्धपीठ बारह वाला शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। कुएं की खोदाई के दौरान जमीन से निकली मूर्ति के बाद मंदिर का निर्माण कराया गया था।
गांव के बाहर पश्चिम दिशा में स्थित इस शिव मंदिर की स्थापना 1751 में हुई थी। बताते है कि ग्रामीण पानी के लिए कुएं का निर्माण कर रहे थे। खोदाई करते समय फावड़ा किसी पत्थर जैसी वस्तु से टकराया। अचानक निर्माणाधीन कुएं में पानी आ गया। ग्रामीणों ने हाथों से खुदाई की तो सफेद रंग का शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने शिवलिंग निकालकर कुएं के पास ही स्थापित कर मंदिर का निर्माण करा दिया। जिस भूमि पर मंदिर का निर्माण हुआ, वह 12 बीघे थी। इसके चलते यह शिव मंदिर बारह वाला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। श्रावण मास में विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
केंद्रीय मंत्री के प्रयास से मिला रास्ता
ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर में आने के लिए कोई रास्ता नहीं था। खेतों के बीच से होकर वह मंदिर में जाते थे। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान और ग्राम प्रधान धर्मपाल सिंह के प्रयास से मंदिर में जाने के लिए रास्ते का निर्माण हुआ ।
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चल रहा मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य
सिद्धपीठ समिति के सदस्य ऋषिपाल सिंह ने बताया कि जो श्रद्धालु जलाभिषेक करने के साथ दीपक जलाकर मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। समिति के ब्रजवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर में एक बरामदे का निर्माण कार्य कराया गया है। अब मंदिर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है ।
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कुएं की खोदाई में जमीन से निकली मूर्ति के बाद कराया गया था मंदिर का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। गांव गोयला का सिद्धपीठ बारह वाला शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। कुएं की खोदाई के दौरान जमीन से निकली मूर्ति के बाद मंदिर का निर्माण कराया गया था।
गांव के बाहर पश्चिम दिशा में स्थित इस शिव मंदिर की स्थापना 1751 में हुई थी। बताते है कि ग्रामीण पानी के लिए कुएं का निर्माण कर रहे थे। खोदाई करते समय फावड़ा किसी पत्थर जैसी वस्तु से टकराया। अचानक निर्माणाधीन कुएं में पानी आ गया। ग्रामीणों ने हाथों से खुदाई की तो सफेद रंग का शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने शिवलिंग निकालकर कुएं के पास ही स्थापित कर मंदिर का निर्माण करा दिया। जिस भूमि पर मंदिर का निर्माण हुआ, वह 12 बीघे थी। इसके चलते यह शिव मंदिर बारह वाला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। श्रावण मास में विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
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केंद्रीय मंत्री के प्रयास से मिला रास्ता
ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर में आने के लिए कोई रास्ता नहीं था। खेतों के बीच से होकर वह मंदिर में जाते थे। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान और ग्राम प्रधान धर्मपाल सिंह के प्रयास से मंदिर में जाने के लिए रास्ते का निर्माण हुआ ।
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चल रहा मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य
सिद्धपीठ समिति के सदस्य ऋषिपाल सिंह ने बताया कि जो श्रद्धालु जलाभिषेक करने के साथ दीपक जलाकर मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। समिति के ब्रजवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर में एक बरामदे का निर्माण कार्य कराया गया है। अब मंदिर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है ।