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Muzaffarnagar News: रविंद्र की हत्या में 26 साल बाद सात आरोपियों को उम्रकैद
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रविंद्र कुमार , फाइल फोटो
मुजफ्फरनगर। भोपा थाना क्षेत्र के धीराहेड़ी गांव में 26 साल पहले प्रधान पद के चुनाव की रंजिश में रविंद्र सिंह की हत्या के मामले में पूर्व प्रधान के पति बसंत समेत सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। प्रत्येक दोषी पर 1.8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जिसमें से 25 प्रतिशत घायलों, 25 मुकदमे के वादी और 50 प्रतिशत राज्य सरकार को दिया जाएगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिंह ने फैसला सुनाया।
वर्ष 2000 के जून माह में धीराहेड़ी के मजरा महमूदपुर माजरा के बसंत कुमार की पत्नी सुमन प्रधान चुनी गई थीं, जबकि धीराहेड़ी के वेदपाल की पत्नी हरवीरी चुनाव हार गईं थीं। चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच रंजिश बन गई।
वादी जसवीर सिंह ने 20 सितंबर 2000 को भोपा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा जयविंद्र अपने साथी रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। गांव में जब वह धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे तो दूसरे पक्ष ने रूपक और गौतम को पकड़कर घर में बंद कर लिया। मौके से किसी तरह भागकर जयविंद्र ने घर पर जानकारी दी।
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परिजन दौड़कर मौके पर पहुंचे। इस बीच दूसरे पक्ष के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में रविंद्र की मौत हो गई थी, जबकि सात लोग घायल हुए थे। पुलिस ने धीराहेड़ी के धूम सिंह, उसके बेटे गुलवीर, ओमवीर के अलावा अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज, प्रीतम और बसंत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।
ट्रायल के दौरान धूम सिंह की मौत हो गई, जबकि बुधवार को उसके बेटे गुलवीर और ओमवीर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश किए गए।
शनिवार को सजा पर सुनवाई हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार जावला और वादी के अधिवक्ता अनोद बालियान ने बताया कि सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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बचाव पक्ष ने कहा, जाएंगे हाईकोर्ट
मुजफ्फरनगर। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के काफी लोग पहुंचे। दोषियों के परिजनों के अलावा बसेड़ा के ग्रामीण भी पहुंचे थे। अधिवक्ता कंवरपाल सैनी ने बताया कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी।
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मेरठ ले जाते हुए हुई थी रविंद्र की मौत
मुजफ्फरनगर। प्रधान पद की रंजिश को लेकर धीराहेड़ी में तनाव बना हुआ था। झगड़े वाले दिन दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हमलावरों ने पीड़ित पक्ष के ऊपर लाइसेंसी रिवाल्वर, बंदूक, पिस्टल के अलावा देशी बंदूक और तमंचों से फायरिंग की थी। इस हमले में धर्मवीर, सत्यपाल, जसवीर, लोटन सिंह, ओमकार, सनसपाल, प्रवीण उर्फ अरुण, रविंद्र घायल हो गए थे। जिला अस्पताल से रविंद्र और सतपाल को मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में रविंद्र की मौत हो गई थी। ब्यूरो
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मुख्य आरोपी बनाए थे अध्यक्ष धूम सिंह
धीराहेड़ी गांव के धूम सिंह मंसूरपुर गन्ना समिति के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। भोपा इंटर कॉलेज के प्रबंधक का दायित्व भी संभाला। मोरना ब्लॉक प्रमुख का चुनाव एक वोट से हार गए थे। शुकतीर्थ क्षेत्र के सामाजिक कामों में वह हिस्सा लेते थे। उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान उनकी मौत हो गई थी, जबकि उनके दोनों बेटे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए।
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पांच साल रही सुरक्षा, पंचायतों में फैसला नहीं
जिले के चर्चित मामले में दोनों पक्षों के बीच सामाजिक फैसले का सिलसिला भी चला। दिवंगत किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और सपा के वर्तमान सांसद हरेंद्र मलिक ने 15 बार गांव में पंचायत कर समझौते का प्रयास किया था। दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई। दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। इस दौरान पुलिस के साथ यहां पर पीएसी तैनात की गई थी।
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वर्ष 2000 के जून माह में धीराहेड़ी के मजरा महमूदपुर माजरा के बसंत कुमार की पत्नी सुमन प्रधान चुनी गई थीं, जबकि धीराहेड़ी के वेदपाल की पत्नी हरवीरी चुनाव हार गईं थीं। चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच रंजिश बन गई।
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वादी जसवीर सिंह ने 20 सितंबर 2000 को भोपा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा जयविंद्र अपने साथी रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। गांव में जब वह धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे तो दूसरे पक्ष ने रूपक और गौतम को पकड़कर घर में बंद कर लिया। मौके से किसी तरह भागकर जयविंद्र ने घर पर जानकारी दी।
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परिजन दौड़कर मौके पर पहुंचे। इस बीच दूसरे पक्ष के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में रविंद्र की मौत हो गई थी, जबकि सात लोग घायल हुए थे। पुलिस ने धीराहेड़ी के धूम सिंह, उसके बेटे गुलवीर, ओमवीर के अलावा अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज, प्रीतम और बसंत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।
ट्रायल के दौरान धूम सिंह की मौत हो गई, जबकि बुधवार को उसके बेटे गुलवीर और ओमवीर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश किए गए।
शनिवार को सजा पर सुनवाई हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार जावला और वादी के अधिवक्ता अनोद बालियान ने बताया कि सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
बचाव पक्ष ने कहा, जाएंगे हाईकोर्ट
मुजफ्फरनगर। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के काफी लोग पहुंचे। दोषियों के परिजनों के अलावा बसेड़ा के ग्रामीण भी पहुंचे थे। अधिवक्ता कंवरपाल सैनी ने बताया कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी।
मेरठ ले जाते हुए हुई थी रविंद्र की मौत
मुजफ्फरनगर। प्रधान पद की रंजिश को लेकर धीराहेड़ी में तनाव बना हुआ था। झगड़े वाले दिन दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हमलावरों ने पीड़ित पक्ष के ऊपर लाइसेंसी रिवाल्वर, बंदूक, पिस्टल के अलावा देशी बंदूक और तमंचों से फायरिंग की थी। इस हमले में धर्मवीर, सत्यपाल, जसवीर, लोटन सिंह, ओमकार, सनसपाल, प्रवीण उर्फ अरुण, रविंद्र घायल हो गए थे। जिला अस्पताल से रविंद्र और सतपाल को मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में रविंद्र की मौत हो गई थी। ब्यूरो
मुख्य आरोपी बनाए थे अध्यक्ष धूम सिंह
धीराहेड़ी गांव के धूम सिंह मंसूरपुर गन्ना समिति के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। भोपा इंटर कॉलेज के प्रबंधक का दायित्व भी संभाला। मोरना ब्लॉक प्रमुख का चुनाव एक वोट से हार गए थे। शुकतीर्थ क्षेत्र के सामाजिक कामों में वह हिस्सा लेते थे। उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान उनकी मौत हो गई थी, जबकि उनके दोनों बेटे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए।
पांच साल रही सुरक्षा, पंचायतों में फैसला नहीं
जिले के चर्चित मामले में दोनों पक्षों के बीच सामाजिक फैसले का सिलसिला भी चला। दिवंगत किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और सपा के वर्तमान सांसद हरेंद्र मलिक ने 15 बार गांव में पंचायत कर समझौते का प्रयास किया था। दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई। दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। इस दौरान पुलिस के साथ यहां पर पीएसी तैनात की गई थी।

रविंद्र कुमार , फाइल फोटो