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एफडीआर का भुगतान न करने पर एसबीआई पर जुर्माना
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एफडीआर का भुगतान न करने पर एसबीआई पर जुर्माना
मुजफ्फरनगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने बुढ़ाना एसबीआई शाखा को महिला उपभोक्ता की एफडीआर का समय पूरा होने के बावजूद भुगतान न देने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना किया है। इनमें दस हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व पांच हजार वाद व्यय के शामिल हैं।
बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मंडी निवासी रीना ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बताया कि उसके पिता राजेंद्र ने वर्ष 2008 में उसके नाम से एसबीआई बुढ़ाना शाखा में दस हजार रुपये की एफडीआर कराई थी। इसकी मूल प्रति भी रीना के पास है। पीड़िता के मुताबिक वर्ष 2011 में समय पूरा होने के बावजूद बैंक द्वारा एफडीआर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिला उपभोक्ता फोरम ने इस संबंध में बैंक शाखा के अफसरों को बुलाकर जानकारी ली, तो उन्होंने एफडीआर न होने की जानकारी दी। इस पर वादिया के अधिवक्ता उदयवीर प्रजापति ने एफडीआर के संबंध में पुख्ता सुबूत प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने इसे सीधे तौर पर सेवा में कमी का मामला करार देते हुए रीना के पक्ष में आदेश पारित किए। इसके तहत एसबीआई बुढ़ाना को पीड़िता की एफडीआर की धनराशि दस हजार रुपये के साथ ही अब तक के कुल ब्याज का भुगतान एक माह की अवधि में करने के आदेश दिए। इसके साथ ही फोरम ने एसबीआई को पीड़िता रीना को मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए दस हजार रुपये की अतिरिक्त रकम, वाद व्यय के पांच हजार रुपये और अधिवक्ता की फीस के तीन हजार रुपये भी एक माह के भीतर भुगतान कर देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक के मुख्य प्रबंधक दिल्ली व क्षेत्रीय प्रबंधक मेरठ को भी पत्र जारी कर मामले में दोषी बैंक कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की है।
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मुजफ्फरनगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने बुढ़ाना एसबीआई शाखा को महिला उपभोक्ता की एफडीआर का समय पूरा होने के बावजूद भुगतान न देने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना किया है। इनमें दस हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व पांच हजार वाद व्यय के शामिल हैं।
बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मंडी निवासी रीना ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बताया कि उसके पिता राजेंद्र ने वर्ष 2008 में उसके नाम से एसबीआई बुढ़ाना शाखा में दस हजार रुपये की एफडीआर कराई थी। इसकी मूल प्रति भी रीना के पास है। पीड़िता के मुताबिक वर्ष 2011 में समय पूरा होने के बावजूद बैंक द्वारा एफडीआर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिला उपभोक्ता फोरम ने इस संबंध में बैंक शाखा के अफसरों को बुलाकर जानकारी ली, तो उन्होंने एफडीआर न होने की जानकारी दी। इस पर वादिया के अधिवक्ता उदयवीर प्रजापति ने एफडीआर के संबंध में पुख्ता सुबूत प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने इसे सीधे तौर पर सेवा में कमी का मामला करार देते हुए रीना के पक्ष में आदेश पारित किए। इसके तहत एसबीआई बुढ़ाना को पीड़िता की एफडीआर की धनराशि दस हजार रुपये के साथ ही अब तक के कुल ब्याज का भुगतान एक माह की अवधि में करने के आदेश दिए। इसके साथ ही फोरम ने एसबीआई को पीड़िता रीना को मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए दस हजार रुपये की अतिरिक्त रकम, वाद व्यय के पांच हजार रुपये और अधिवक्ता की फीस के तीन हजार रुपये भी एक माह के भीतर भुगतान कर देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक के मुख्य प्रबंधक दिल्ली व क्षेत्रीय प्रबंधक मेरठ को भी पत्र जारी कर मामले में दोषी बैंक कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की है।
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