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शहादत की याद में खूनी मातम
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:07 AM IST
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मुजफ्फरनगर। मोहर्रम के मौके पर हजरत इमाम हुसैन और उनके जानशीनों की शहादत की याद में शिया सोगवारों ने खूनी मातम किया। दस मोहर्रम के मौके पर गमजदा सौगवारों ने मातमी जुलूस निकालकार काली नदी पार करबला में ताजिए सुपुर्दे खाक किए। पहली मौहर्रम से चली आर रही मजलिसों और जुलूस का सिलसिला भी आज खत्म हो गया।
सुबह नौ बजे काली नदी स्थित नमाजगाह पर रोजे आशुरा एवं आमाल और नमाज मौलाना मिसम रजा ने अदा कराई। दुआएं जेहरा के इंतजार हुसैन ने फरमाया कि जालिम यजीद ने इराक स्थित करबला के मैदान में अपने लाखों के लश्कर के साथ इमाम हुसैन को उनके साथियों सहित शहीद कर दिया। रसूले खुदा के नवासे इमाम हुसैन अपने 72 साथियों सहित हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ते हुए शहीद हो गए।
इसी शहादत की याद में शिया सोगवार मजलिस और मातम बरपा करते हैं। करबला की जंग के साथ ही जुड़ा है जैनब का किरदार। जैनब ना होती को इस्लाम को उसकी पहचान न मिलती। शहर की सभी 18 इमाम बारगाहों में दिन में एक बजे के बाद मजलिसें, जुलूस, अलम और ताजिये निकाले गए।
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मुख्य जुलूस अबुपुरा पचदरा सादाता और इमाम बारगाह मोती महल से निकाला गया। सभी जुलूस अबुपुरा के मुख्य जुलूस में शामिल हुए। मिसमरजा की तकरीर के बाद जुलजुना घोड़ा इमाम बरामद हुए और यहां से सभी मातमी अंजुमने नौहाख्वानी करते हुए जंजीरों और छुरियों से मातम करते हुए हनुमान चौक पहुंचे। दिल दहला देने वाले मातम से सड़क भी खून से तरबतर हो गई।
सभी अंजुमने नौहाख्वानी मातम करते हुए काली नदी पार स्थित करबला पहुंचे जहां ताजिये सुपुर्दे खाक किए गए। करबला कमेटी के सदस्यों ने सभी शिया सौगवारों का फाका खुलवाया और सभी को जलपान कराया। बीती रात किदवई नगर में दावते हक की तरफ से जैनबिया इंटर कॉलेज में करबला का घटनाक्रम पेश किया गया। पूरी रात यहां शिया समाज के लोगों की भीड़ लगी रही। जुलूस का संचालन हैदर मेहंदी, मास्टर सादिक, कैसर हुसैन, इंतजार हुसैन ने किया। पुलिस प्रशासन पूरी तरह नगर में मुस्तैद रहा।
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सुबह नौ बजे काली नदी स्थित नमाजगाह पर रोजे आशुरा एवं आमाल और नमाज मौलाना मिसम रजा ने अदा कराई। दुआएं जेहरा के इंतजार हुसैन ने फरमाया कि जालिम यजीद ने इराक स्थित करबला के मैदान में अपने लाखों के लश्कर के साथ इमाम हुसैन को उनके साथियों सहित शहीद कर दिया। रसूले खुदा के नवासे इमाम हुसैन अपने 72 साथियों सहित हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ते हुए शहीद हो गए।
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इसी शहादत की याद में शिया सोगवार मजलिस और मातम बरपा करते हैं। करबला की जंग के साथ ही जुड़ा है जैनब का किरदार। जैनब ना होती को इस्लाम को उसकी पहचान न मिलती। शहर की सभी 18 इमाम बारगाहों में दिन में एक बजे के बाद मजलिसें, जुलूस, अलम और ताजिये निकाले गए।
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मुख्य जुलूस अबुपुरा पचदरा सादाता और इमाम बारगाह मोती महल से निकाला गया। सभी जुलूस अबुपुरा के मुख्य जुलूस में शामिल हुए। मिसमरजा की तकरीर के बाद जुलजुना घोड़ा इमाम बरामद हुए और यहां से सभी मातमी अंजुमने नौहाख्वानी करते हुए जंजीरों और छुरियों से मातम करते हुए हनुमान चौक पहुंचे। दिल दहला देने वाले मातम से सड़क भी खून से तरबतर हो गई।
सभी अंजुमने नौहाख्वानी मातम करते हुए काली नदी पार स्थित करबला पहुंचे जहां ताजिये सुपुर्दे खाक किए गए। करबला कमेटी के सदस्यों ने सभी शिया सौगवारों का फाका खुलवाया और सभी को जलपान कराया। बीती रात किदवई नगर में दावते हक की तरफ से जैनबिया इंटर कॉलेज में करबला का घटनाक्रम पेश किया गया। पूरी रात यहां शिया समाज के लोगों की भीड़ लगी रही। जुलूस का संचालन हैदर मेहंदी, मास्टर सादिक, कैसर हुसैन, इंतजार हुसैन ने किया। पुलिस प्रशासन पूरी तरह नगर में मुस्तैद रहा।