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विजय कौशल महाराज ने मांगा था धर्म के नाम पर एक दिन

Sat, 01 Aug 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 12:03 AM IST
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Ram janmabhoomi movement muzaffarnagar
विजय कौशल महाराज ने मांगा था धर्म के नाम पर एक दिन
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मुजफ्फरनगर। छह मार्च 1983 में यहां हुए जिस विराट हिंदू सम्मेलन में रामजन्म भूमि मुक्ति का प्रस्ताव पारित हुआ और आंदोलन की नींव पड़ी, उसे सफल बनाने की तैयारियां तीन माह पहले शुरू कर दी गई थी। इसी कड़ी में टाऊन हाल में हुए एक सम्मेलन में भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत भी शामिल हुए थे। संघ और विहिप के कार्यकर्ता गांव-गांव बैठक कर राम मंदिर निर्माण के प्रति जन जागृति पैदा कर रहे थे। विख्यात कथा वाचक विजय कौशल महाराज उस समय यहां संघ के जिला प्रचारक थे। बैठकों में वह कहा करते थे कि मुझे आपका एक दिन धर्म के नाम पर चाहिए। उनकी बात का असर यह हुआ था कि लोग उनको अनसुना नहीं कर सके। जिस गांव में भी वह पहुंचे उन सभी से लोग अपने ट्रैक्टरों से सम्मेलन में आए।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का 1983 में जनवरी के प्रथम सप्ताह में गाजियाबाद में एक सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हिंदू अपने धर्म और राजनीति के प्रति जागरूक नहीं है। हिंदू जागरण और अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने को लेकर एक बड़े सम्मेलन का निर्णय लिया गया। जिला कार्यवाह जयपाल सिंह ने उस समय मुजफ्फरनगर में सम्मेलन रखने का प्रस्ताव किया, जिसका जिला प्रचारक विजय कौशल महाराज ने समर्थन किया। राजकीय इंटर कॉलेज में हुए इस सम्मेलन को लेकर डॉ सुरेश संगल, विजय कौशल और जयपाल सिंह दिन रात जुटे हुए। उस समय के सभी 14 ब्लाक और 20 नगरों में बड़ी बैठके हुई। टाउन हाल के सम्मेलन में भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत भी शामिल हुए। जयपाल सिंह कहते हैं कि अपने जीवन में किसी सम्मेलन में उन्होंने इतनी भीड़ नहीं देखी जितनी राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में इस सम्मेलन में थी। शाहडब्बर गांव में स्वर्गीय बारू सिंह के नेतृत्व में गांव के सभी 24 ट्रैक्टर आए थे। लोग अपने वाहनों से इस सम्मेलन में आए थे।
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आंदोलन से जुड़े ये लोग नहीं रहे
मुजफ्फरनगर। हिंदू सम्मेलन काने में सहयोग करने वाले रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े डॉ गणेश, रामपाल भोपा, चौधरी हरबंस सालारपुर, सुरेंद्र संगल जानसठ, भागमल शामली, बीरबल, राजेंद्र, शिवचरण बुढाना, संतलाल, महेश शर्मा मुजफ्फरनगर, अतरसिंह, बारू सिंह शाहडब्बर, डीके माहेश्वरी पुरकाजी, आशीष गर्ग चरथावल, अशोक जानसठ, टीकाराम, भवीचंद सिसौली ऐसे लोग है जो अब नहीं रहे।
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इनके लिए होंगे खुशी के पल
मुजफ्फरनगर। शामली के प्रोफेसर देवराज, नरेंद्र, बुढाना के सुरेंद्र देव, प्रेम, शाहपुर के श्याम पाल, डॉ हरवीर, सिसौली के डॉ बाबूराम मलिक, सुरेश, पुरकाजी के नरेंद्र, ऊन के सत्यदेव, रामराज के धनेश बंसल, मीरापुर के हरीश, दिनेश और खतौली के अशोक एडवोकेट उन भाग्यशाली लोगों में से हैं जो आंदोलन में शरीक रहे और अपनी आंखों से भगवान राम कें मंदिर निर्माण को देखेंगे।
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