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शुकदेव सेतु के मध्य भाग में आया झुकाव, पीडब्लूडी इंजीनियर ने किया निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 24 May 2017 12:27 AM IST
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पुल का निरीक्षण करने पहुंचे इंजीनियर।
- फोटो : अमर उजाला
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शुक्रताल में गंगा नदी पर बने शुकदेव सेतु के मध्य भाग में झुकाव की जानकारी मिलने पर पहुंचे लोकनिर्माण विभाग के सहायक अभियंता सुरेंद्र कुमार ने पुल की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की स्थिति देखकर जल निगम, सेतु निर्माण विभाग को पत्र लिखने की बात कही है। ग्रामीणों को पुल और सड़क की शीघ्र मरम्मत कराने का आश्वासन दिया।
शुक्रताल को गंगा खादर से जोड़ने वाले शुकदेव सेतु का निर्माण बाबा बचनसिंह भूरी वालों के सहयोग से तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में सात वर्ष पूर्व निर्माण कराया गया था। पुल के मध्य भाग में आए झुकाव को लेकर पुल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा गया है। पुल का निरीक्षण करने आए सहायक अभियंता एसके जैन ने पुल में आए झुकाव को गंभीर मानते हुए जल निगम व सेतु निर्माण विभाग को पत्र लिखकर रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
सेतु निगम की टीम दो दिन के भीतर शुक्रताल आकर पुल का निरीक्षण कर आवश्यक उपाय करेगी। इस मौके पर पहुंचे धर्मेंद्र, मिंटू, सरदार पलविंदर सिंह, ओमवीर सिंह, राजपाल, सुशील, सतेंद्र, राम सिंह, ऋषिपाल, मोनू आदि ने पुल के आसपास सड़क में गहरे गड्ढों की शिकायत की। इस पर सहायक अभियंता ने शीघ्र ही सड़क की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है।
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भोपा इलाके के पुलों पर खतरा मंडराया
शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते भोपा और मोरना में निर्मित पुलों पर खतरा मंडराने लगा है। क्षेत्रवासियों ने पुलों की मरम्मत की मांग प्रदेश सरकार से की है। ब्रिटिशकाल में निर्माण किए गए गंगनहर पुलों पर भारी वाहनों के गुजरने तथा मरम्मत न होने के कारण पुलों के दरक जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
कुछ पुलों को पहले ही भारी आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है, जिसमें गांव बेलड़ा स्थित पुल भी शामिल है। इसके बंद होने से भारी वाहनों के गुजरने का रूट डायवर्ट करना पड़ गया। गांव निरगाजनी स्थित गंगनहर झाल पर बने पुल में गहरे गड्ढ़ों के कारण पुल कभी भी दरक सकता है। इससे बरला, मोरना, शुक्रताल मार्ग का आवागमन बंद हो जाएगा।
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शुक्रताल को गंगा खादर से जोड़ने वाले शुकदेव सेतु का निर्माण बाबा बचनसिंह भूरी वालों के सहयोग से तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में सात वर्ष पूर्व निर्माण कराया गया था। पुल के मध्य भाग में आए झुकाव को लेकर पुल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा गया है। पुल का निरीक्षण करने आए सहायक अभियंता एसके जैन ने पुल में आए झुकाव को गंभीर मानते हुए जल निगम व सेतु निर्माण विभाग को पत्र लिखकर रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
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सेतु निगम की टीम दो दिन के भीतर शुक्रताल आकर पुल का निरीक्षण कर आवश्यक उपाय करेगी। इस मौके पर पहुंचे धर्मेंद्र, मिंटू, सरदार पलविंदर सिंह, ओमवीर सिंह, राजपाल, सुशील, सतेंद्र, राम सिंह, ऋषिपाल, मोनू आदि ने पुल के आसपास सड़क में गहरे गड्ढों की शिकायत की। इस पर सहायक अभियंता ने शीघ्र ही सड़क की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है।
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भोपा इलाके के पुलों पर खतरा मंडराया
शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते भोपा और मोरना में निर्मित पुलों पर खतरा मंडराने लगा है। क्षेत्रवासियों ने पुलों की मरम्मत की मांग प्रदेश सरकार से की है। ब्रिटिशकाल में निर्माण किए गए गंगनहर पुलों पर भारी वाहनों के गुजरने तथा मरम्मत न होने के कारण पुलों के दरक जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
कुछ पुलों को पहले ही भारी आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है, जिसमें गांव बेलड़ा स्थित पुल भी शामिल है। इसके बंद होने से भारी वाहनों के गुजरने का रूट डायवर्ट करना पड़ गया। गांव निरगाजनी स्थित गंगनहर झाल पर बने पुल में गहरे गड्ढ़ों के कारण पुल कभी भी दरक सकता है। इससे बरला, मोरना, शुक्रताल मार्ग का आवागमन बंद हो जाएगा।