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नोटबंदी के झटके से दवा बाजार में मंदी, डेढ़ माह में घट गई 60 फीसदी बिक्री
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:19 AM IST
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दवाइयां।
- फोटो : demo
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नोटबंदी के झटके से दवा कारोबार में मंदी छाई है। बीते डेढ़ माह में जिले में 60 फीसदी दवाइयों का व्यवसाय ठप हो चुका है। देश की शीर्ष फार्मास्यूटिकल कंपनियों की बिक्री ही नहीं घटी, बल्कि कैश की कमी से थोक विक्रेताओं के सामने व्यापार बचाने का संकट आ गया है। मेडिकल स्टोरों और नर्सिंगहोम की केमिस्ट शॉप पर सेल्स आधी रह गई है।
जिला परिषद और अग्रवाल मार्केट में थोक दवा की मंडी है। वेस्ट यूपी में आगरा के बाद सबसे ज्यादा दवाइयों का कारोबार मुजफ्फरनगर से होता है। यहां से अन्य प्रांतों तक में दवाई की आपूर्ति होती है। नोट बंदी के असर से दवा के थोक बाजार की रौनक गायब हो गई है। सबसे ज्यादा बिक्री के उत्पादों की सेल्स आधी हो चुकी है।
टैबलेट्स, इंजेक्शन, सिरप, ड्राप्स और अन्य दवाओं की बिक्री के लक्ष्य को पूरा करना कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया है। बड़े नोटों पर प्रतिबंध से आम रोगियों के सामने इलाज की दिक्कत है। चिकित्सक से परामर्श के बाद जिन मरीजों को एक कोर्स लिखा गया है, वह भी दो या तीन दिन की ही दवाइयों ले पा रहे हैं। कैश की कमी से नर्सिंगहोम और बड़े फुटकर विक्रेताओं ने दवा का स्टॉक रखना बंद कर दिया है।
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सप्ताह की बिक्री के हिसाब से दवाइयों की आपूर्ति ली जा रही है। अभी तक ज्यादातर थोक बाजार नकदी पर दवा का क्रय-विक्रय करता था। अब थोक व्यापारी चेक पर ही मेडिकल स्टोर की बिलिंग कर रहे हैं। वैसे भी फार्मास्यूटिकल कंपनियां अग्रिम चेक पर होलसेल विक्रेताओं को दवा सप्लाई करती है। जो कंपनियां ड्राफ्ट से डिस्ट्रीब्यूटरों को दवाईयां आपूर्ति करती है, वह भी बैंकों से ड्राफ्ट नहीं बन पाने से परेशानी में है।
केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह बताते हैं कि जिले का दवा व्यापार नोट बंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। 60 फीसदी से ज्यादा बिक्री में गिरावट आई है। छोटे व्यापारियों के सामने सबसे ज्यादा दिक्कतें हैं। कैश की कमी से मेडिकल स्टोर भी जरूरत के लायक ही दवाईयां खरीद रहे हैं। बिक्री आधी रहने से कर्मचारियों का वेतन निकालना भी कठिन हो गया है।
स्वाइप मशीन और नेट बैंकिंग से दूर दवा बाजार
मुजफ्फरनगर। करोड़ों की दवा मंडी में अधिकांश लेनदेन कैश पर ही चलता था। केवल फार्मास्यूटिकल सीएंडएफ अग्रिम चेक पर थोक विक्रेताओं को दवा आपूर्ति करते हैं। आगे का क्रय-विक्रय नकद या उधारी पर है। दवा बाजार में स्वाइप मशीन या नेट बैंकिंग का सिस्टम भी अभी कम ही है। अग्रवाल मार्केट के थोक विक्रेता दिनेश किट्टी, आदित्य केशव बताते हैं कि नोटबंदी के चलते दवा व्यापारियों को चेकबुक भी समय से नहीं मिल पा रही है।
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जिला परिषद और अग्रवाल मार्केट में थोक दवा की मंडी है। वेस्ट यूपी में आगरा के बाद सबसे ज्यादा दवाइयों का कारोबार मुजफ्फरनगर से होता है। यहां से अन्य प्रांतों तक में दवाई की आपूर्ति होती है। नोट बंदी के असर से दवा के थोक बाजार की रौनक गायब हो गई है। सबसे ज्यादा बिक्री के उत्पादों की सेल्स आधी हो चुकी है।
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टैबलेट्स, इंजेक्शन, सिरप, ड्राप्स और अन्य दवाओं की बिक्री के लक्ष्य को पूरा करना कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया है। बड़े नोटों पर प्रतिबंध से आम रोगियों के सामने इलाज की दिक्कत है। चिकित्सक से परामर्श के बाद जिन मरीजों को एक कोर्स लिखा गया है, वह भी दो या तीन दिन की ही दवाइयों ले पा रहे हैं। कैश की कमी से नर्सिंगहोम और बड़े फुटकर विक्रेताओं ने दवा का स्टॉक रखना बंद कर दिया है।
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सप्ताह की बिक्री के हिसाब से दवाइयों की आपूर्ति ली जा रही है। अभी तक ज्यादातर थोक बाजार नकदी पर दवा का क्रय-विक्रय करता था। अब थोक व्यापारी चेक पर ही मेडिकल स्टोर की बिलिंग कर रहे हैं। वैसे भी फार्मास्यूटिकल कंपनियां अग्रिम चेक पर होलसेल विक्रेताओं को दवा सप्लाई करती है। जो कंपनियां ड्राफ्ट से डिस्ट्रीब्यूटरों को दवाईयां आपूर्ति करती है, वह भी बैंकों से ड्राफ्ट नहीं बन पाने से परेशानी में है।
केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह बताते हैं कि जिले का दवा व्यापार नोट बंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। 60 फीसदी से ज्यादा बिक्री में गिरावट आई है। छोटे व्यापारियों के सामने सबसे ज्यादा दिक्कतें हैं। कैश की कमी से मेडिकल स्टोर भी जरूरत के लायक ही दवाईयां खरीद रहे हैं। बिक्री आधी रहने से कर्मचारियों का वेतन निकालना भी कठिन हो गया है।
स्वाइप मशीन और नेट बैंकिंग से दूर दवा बाजार
मुजफ्फरनगर। करोड़ों की दवा मंडी में अधिकांश लेनदेन कैश पर ही चलता था। केवल फार्मास्यूटिकल सीएंडएफ अग्रिम चेक पर थोक विक्रेताओं को दवा आपूर्ति करते हैं। आगे का क्रय-विक्रय नकद या उधारी पर है। दवा बाजार में स्वाइप मशीन या नेट बैंकिंग का सिस्टम भी अभी कम ही है। अग्रवाल मार्केट के थोक विक्रेता दिनेश किट्टी, आदित्य केशव बताते हैं कि नोटबंदी के चलते दवा व्यापारियों को चेकबुक भी समय से नहीं मिल पा रही है।