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टैक्स पर बवाल, व्यापारी उठा रहे सवाल
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स्वकर निर्धारण प्रणाली में दरें बढ़ाने को लेकर आक्रोश
मुजफ्फरनगर। स्वकर निर्धारण प्रणाली के तहत लागू की गई दरों को लेकर शहर में बवाल मचा हुआ है। सामान्य नागरिक से लेकर दुकानदार, सभी पर टैक्स की मार पड़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स की दरें बेतहाशा बढ़ा दी गई हैं। नगरवासियों को दस गुना तक कर देना होगा। व्यापारी इसके विरोध में हैं और रोजाना सुबह नगर पालिका पर प्रदर्शन करते हैं।
नगर पालिका बोर्ड की 20 अप्रैल 2018 की बैठक में टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव संख्या 18 रखा गया। इसे स्वीकार कर लिया गया। नागरिकों से आपत्ति एवं सुझाव मांगे तो कोई आपत्ति नहीं आई। इसलिए 16 जनवरी 2019 की बोर्ड बैठक में दरों को स्वीकृत कर शासन को भेज दिया गया और वहां से गजट जारी हो गया। दुकानदार टैक्स की निर्धारित दरों को बहुत ज्यादा बता रहे हैं। उनका कहना है कि किसी के लिए भी इतना टैक्स दे पाना मुमकिन नहीं है।
आपत्ति मांगने को लेकर खड़े हुए सवाल
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के मुख्य संयोजक रेवतीनंदन सिंघल का कहना है कि आपत्ति के लिए विज्ञापन ऐसे समाचार पत्रों में दिया गया, जिनकी नगर में प्रसार संख्या बेहद कम है। इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी ही नहीं हुई। पालिका ने गुपचुप तरीके से दरें निर्धारित कर दीं और शासन से स्वीकृत भी हो गईं।
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टैक्स की प्रक्रिया में हुआ बदलाव
अब तक टैक्स निर्धारण के लिए नगर पालिका की कमेटी बैठती थी। वह आवश्यकता के अनुसार टैक्स का निर्धारण करती थी। अब पालिका ने दरें निर्धारित कर दी हैं। व्यक्ति स्वयं अपनी संपत्ति का ब्यौरा देगा और उसकी पैमाइश के बाद निर्धारित दरों के आधार पर टैक्स लगेगा।
कई गुना बढ़ जाएगी टैक्स की मार
स्वकर प्रणाली के तहत लागू की गई दरों से नागरिकों पर टैक्स की मार दस गुना तक बढ़ जाएगी। यदि 100 वर्ग गज की कोई दुकान 12 फीट के रास्ते पर है तो उस पर अब तक लगभग 660 रुपये टैक्स लगता था लेकिन नई दरों ये टैक्स 5500 रुपये वार्षिक तक पहुंचने की संभावना है।
टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ किया प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ रेडीमेड वस्त्र व्यापार एसोसिएशन एवं संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल ने सुबह साढ़े नौ बजे नगर पालिका में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने टैक्स बढ़ोतरी को उत्पीड़नात्मक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में बिजेंद्र गोयल, ओमप्रकाश बजाज, पवन छाबड़ा, नीरज बंसल, मन्नू लाल, वाजिद अली, व्यापार मंडल से रेवतीनंदन, राजेंद्र काटी, प्रमोद मित्तल आदि शामिल रहे।
टैक्स निर्धारण को तीन कैटेगरी निर्धारित
नगर पालिका में 12 मीटर से कम चौड़े रास्ते पर स्थित संपत्ति पर कच्चे, साधारण फर्श एवं मार्बल टाइल्स के भवनों के आधार पर क्रमश: एक, डेढ़ तथा ढाई रुपये प्रति माह प्रति वर्ग फीट की दर निर्धारित की है। इसी तरह 12-24 मीटर तथा 24 मीटर से अधिक चौड़े रास्ते की संपत्ति पर सवा से तीन रुपये की दर लागू की है।
इन्होंने कहा...
(फोटो)
बिना सोचे-समझे नगर पालिका ने नागरिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया है। इसे कम किया जाना चाहिए।
- राकेश त्यागी, व्यापारी।
(फोटो)
कारोबार की मंदी से दुकानदार पहले से ही परेशान हैं, ऊपर से टैक्स का बोझ व्यापारियों के लिए असहनीय है।
- रामप्रकाश साहनी, व्यापारी।
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(फोटो)
टैक्स की बढ़ोतरी जनभावनाओं को ध्यान में रखकर नहीं की गई। मनमाने तरीके से दरें लागू कर दी गईं हैं।
- राजेंद्र अरोरा, व्यापारी।
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(फोटो)
बढ़ाई गईं टैक्स की दरें कम की जानी चाहिए। व्यापारियों के सामने पहले से ही बड़ी समस्याएं हैं।
- सतीश अरोरा, व्यापारी।
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- वर्ष 1997 से टैक्स नहीं बढ़ा है। नियमानुसार प्रति पांच वर्ष में टैक्स की दरों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। अब स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू हुई है। दरों पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई। प्रस्ताव का शासन से गजट हो चुका है। अब दरों में कोई बदलाव नहीं हो सकता।
- आरडी पोरवाल, कर अधीक्षक, नगर पालिका।
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मुजफ्फरनगर। स्वकर निर्धारण प्रणाली के तहत लागू की गई दरों को लेकर शहर में बवाल मचा हुआ है। सामान्य नागरिक से लेकर दुकानदार, सभी पर टैक्स की मार पड़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स की दरें बेतहाशा बढ़ा दी गई हैं। नगरवासियों को दस गुना तक कर देना होगा। व्यापारी इसके विरोध में हैं और रोजाना सुबह नगर पालिका पर प्रदर्शन करते हैं।
नगर पालिका बोर्ड की 20 अप्रैल 2018 की बैठक में टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव संख्या 18 रखा गया। इसे स्वीकार कर लिया गया। नागरिकों से आपत्ति एवं सुझाव मांगे तो कोई आपत्ति नहीं आई। इसलिए 16 जनवरी 2019 की बोर्ड बैठक में दरों को स्वीकृत कर शासन को भेज दिया गया और वहां से गजट जारी हो गया। दुकानदार टैक्स की निर्धारित दरों को बहुत ज्यादा बता रहे हैं। उनका कहना है कि किसी के लिए भी इतना टैक्स दे पाना मुमकिन नहीं है।
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आपत्ति मांगने को लेकर खड़े हुए सवाल
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के मुख्य संयोजक रेवतीनंदन सिंघल का कहना है कि आपत्ति के लिए विज्ञापन ऐसे समाचार पत्रों में दिया गया, जिनकी नगर में प्रसार संख्या बेहद कम है। इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी ही नहीं हुई। पालिका ने गुपचुप तरीके से दरें निर्धारित कर दीं और शासन से स्वीकृत भी हो गईं।
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टैक्स की प्रक्रिया में हुआ बदलाव
अब तक टैक्स निर्धारण के लिए नगर पालिका की कमेटी बैठती थी। वह आवश्यकता के अनुसार टैक्स का निर्धारण करती थी। अब पालिका ने दरें निर्धारित कर दी हैं। व्यक्ति स्वयं अपनी संपत्ति का ब्यौरा देगा और उसकी पैमाइश के बाद निर्धारित दरों के आधार पर टैक्स लगेगा।
कई गुना बढ़ जाएगी टैक्स की मार
स्वकर प्रणाली के तहत लागू की गई दरों से नागरिकों पर टैक्स की मार दस गुना तक बढ़ जाएगी। यदि 100 वर्ग गज की कोई दुकान 12 फीट के रास्ते पर है तो उस पर अब तक लगभग 660 रुपये टैक्स लगता था लेकिन नई दरों ये टैक्स 5500 रुपये वार्षिक तक पहुंचने की संभावना है।
टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ किया प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ रेडीमेड वस्त्र व्यापार एसोसिएशन एवं संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल ने सुबह साढ़े नौ बजे नगर पालिका में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने टैक्स बढ़ोतरी को उत्पीड़नात्मक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में बिजेंद्र गोयल, ओमप्रकाश बजाज, पवन छाबड़ा, नीरज बंसल, मन्नू लाल, वाजिद अली, व्यापार मंडल से रेवतीनंदन, राजेंद्र काटी, प्रमोद मित्तल आदि शामिल रहे।
टैक्स निर्धारण को तीन कैटेगरी निर्धारित
नगर पालिका में 12 मीटर से कम चौड़े रास्ते पर स्थित संपत्ति पर कच्चे, साधारण फर्श एवं मार्बल टाइल्स के भवनों के आधार पर क्रमश: एक, डेढ़ तथा ढाई रुपये प्रति माह प्रति वर्ग फीट की दर निर्धारित की है। इसी तरह 12-24 मीटर तथा 24 मीटर से अधिक चौड़े रास्ते की संपत्ति पर सवा से तीन रुपये की दर लागू की है।
इन्होंने कहा...
(फोटो)
बिना सोचे-समझे नगर पालिका ने नागरिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया है। इसे कम किया जाना चाहिए।
- राकेश त्यागी, व्यापारी।
(फोटो)
कारोबार की मंदी से दुकानदार पहले से ही परेशान हैं, ऊपर से टैक्स का बोझ व्यापारियों के लिए असहनीय है।
- रामप्रकाश साहनी, व्यापारी।
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टैक्स की बढ़ोतरी जनभावनाओं को ध्यान में रखकर नहीं की गई। मनमाने तरीके से दरें लागू कर दी गईं हैं।
- राजेंद्र अरोरा, व्यापारी।
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बढ़ाई गईं टैक्स की दरें कम की जानी चाहिए। व्यापारियों के सामने पहले से ही बड़ी समस्याएं हैं।
- सतीश अरोरा, व्यापारी।
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- वर्ष 1997 से टैक्स नहीं बढ़ा है। नियमानुसार प्रति पांच वर्ष में टैक्स की दरों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। अब स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू हुई है। दरों पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई। प्रस्ताव का शासन से गजट हो चुका है। अब दरों में कोई बदलाव नहीं हो सकता।
- आरडी पोरवाल, कर अधीक्षक, नगर पालिका।