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मुजफ्फरनगर दंगा : छह माह में एक भी मुकदमा वापस नहीं हुआ
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर दंगा : छह माह में एक भी मुकदमा वापस नहीं
मुजफ्फरनगर। सूूबे की योगी सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के चिह्नित किए गए 92 मुकदमों में से 74 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दे चुकी है। इसके लिए जनवरी से अब तक दस शासनादेश जारी हो चुके हैं। फिलहाल अभी तक एक भी मुकदमा वापस नहीं हुआ है। निचली अदालत में 12 मुकदमों की पत्रावली दाखिल है, जिनमें कोर्ट मुकदमों के वादी को तलब भी कर चुकी है, मगर अभी तक किसी भी मुकदमे का निर्णय नहीं हो सका है।
छह साल पहले वर्ष 2013 में जिले में हुए दंगे में पांच सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। एसआईसी ने जांच के उपरांत 170 मुकदमों में चार्टशीट दाखिल की थी। इनमें से अधिकांश मुकदमे आगजनी, लूट, डकैती आदि धाराओं के हैं। भाजपा नेताओं ने ऐसे मुकदमों को वापस लेने की पहल की थी। डेढ़ साल पहले फरवरी 2018 को केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक, विजय कश्यप के अलावा भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, गठवाला खाप के राजेंद्र सिंह मलिक आदि ने सीएम योगी से भेंट की थी। बताया था कि दंगे के बाद पुलिस और कुछ लोगों ने पांच सौ से अधिक ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। उन्होंने सीएम को 131 मुकदमों की पत्रावली सौंपी थी। शासन ने जिला प्रशासन से इन मुकदमों की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी थी। तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने इन मुकदमों की आख्या शासन को भेजी थी। शासन ने इनमें से 92 मुकदमों को वापस लेने के लिए चिह्नित किया था। जनवरी माह से अब तक दस शासनादेश जारी हो चुके हैं, जिनमें 74 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दी जा चुकी है। इन मुकदमों से पांच मुकदमे कोर्ट में निस्तारित हो चुके हैं, जबकि एक में पुलिस एफआर लगा चुकी है। अब 68 मुकदमे वापस होने हैं, जो विभिन्न कोर्ट में विचाराधीन है। इनमें से निचली कोर्ट में चल रहे 12 मुकदमों को वापस लेने की पत्रावली अदालत में दाखिल की जा चुकी है, जिनमें कोर्ट मुकदमों के वादी को भी तलब कर चुकी है, मगर अभी तक कोर्ट से एक भी मुकदमा वापस नहीं हुआ है।
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मुजफ्फरनगर। सूूबे की योगी सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के चिह्नित किए गए 92 मुकदमों में से 74 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दे चुकी है। इसके लिए जनवरी से अब तक दस शासनादेश जारी हो चुके हैं। फिलहाल अभी तक एक भी मुकदमा वापस नहीं हुआ है। निचली अदालत में 12 मुकदमों की पत्रावली दाखिल है, जिनमें कोर्ट मुकदमों के वादी को तलब भी कर चुकी है, मगर अभी तक किसी भी मुकदमे का निर्णय नहीं हो सका है।
छह साल पहले वर्ष 2013 में जिले में हुए दंगे में पांच सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। एसआईसी ने जांच के उपरांत 170 मुकदमों में चार्टशीट दाखिल की थी। इनमें से अधिकांश मुकदमे आगजनी, लूट, डकैती आदि धाराओं के हैं। भाजपा नेताओं ने ऐसे मुकदमों को वापस लेने की पहल की थी। डेढ़ साल पहले फरवरी 2018 को केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक, विजय कश्यप के अलावा भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, गठवाला खाप के राजेंद्र सिंह मलिक आदि ने सीएम योगी से भेंट की थी। बताया था कि दंगे के बाद पुलिस और कुछ लोगों ने पांच सौ से अधिक ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। उन्होंने सीएम को 131 मुकदमों की पत्रावली सौंपी थी। शासन ने जिला प्रशासन से इन मुकदमों की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी थी। तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने इन मुकदमों की आख्या शासन को भेजी थी। शासन ने इनमें से 92 मुकदमों को वापस लेने के लिए चिह्नित किया था। जनवरी माह से अब तक दस शासनादेश जारी हो चुके हैं, जिनमें 74 मुकदमों को वापस लेने की अनुमति दी जा चुकी है। इन मुकदमों से पांच मुकदमे कोर्ट में निस्तारित हो चुके हैं, जबकि एक में पुलिस एफआर लगा चुकी है। अब 68 मुकदमे वापस होने हैं, जो विभिन्न कोर्ट में विचाराधीन है। इनमें से निचली कोर्ट में चल रहे 12 मुकदमों को वापस लेने की पत्रावली अदालत में दाखिल की जा चुकी है, जिनमें कोर्ट मुकदमों के वादी को भी तलब कर चुकी है, मगर अभी तक कोर्ट से एक भी मुकदमा वापस नहीं हुआ है।
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