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एनसीआर की सीमा 100 किमी होने से मुजफ्फरनगर को लेकर असमंजस

Fri, 15 Oct 2021 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 12:06 AM IST
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Muzaffarnagar may go outside NCR
मुजफ्फरनगर। एनसीआर की बैठक में 2041 तक के प्रोजेक्ट तैयार करने में 100 किमी का दायरा तय किए जाने से मुजफ्फरनगर के एनसीआर से बाहर होने की संभावना हो गई है। इसे लेकर आम लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं है। कुछ इसे लाभकारी बता रहे हैं तो कुछ नुकसान दायक। जिला एनसीआर से बाहर होता है तो रेपिड ट्रेन सहित कई योजनाएं फलीभूत नहीं हो पाएगी। वहीं किसानों के ट्रैक्टर को लेकर राहत जरूर मिल जाएगी। उद्योगों को एनजीटी से राहत मिल सकती है।
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एनसीआर की महायोजना 2041 के लिए जो प्रपोजल तैयार किया है, उसमें सभी मूलभूत सुविधाएं 100 किमी के दायरे में देने की बात की गई है। प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन जिले में इसने हलचल मचा दी है। जिला 100 किमी के दायरे में आएगा या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग विचार आ रहे हैं। दूरी के हिसाब से जिले का एक बड़ा हिस्सा 100 किमी में आता है। अब देखना यह है कि महायोजना के प्रस्ताव पर सरकार की क्या सोच रहती है। यदि जिला एनसीआर से बाहर आता है तो रेपिड ट्रेन का सपना अधूरा रह सकता है। उद्योगों को एनजीटी की सख्ती से छूट मिल सकती है। दीपावली पर पटाखे छुड़ाए जा सकते हैं। किसानों को दस साल पुराने ट्रैक्टरों को चलाने की छूट मिल जाएगी।
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भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक और जिले के प्रमुख उद्यमी कुशपुरी का कहना है कि उद्यमियों की ये मांग रही है कि एनसीआर को दो हिस्सो में बांटा जाए। लगता है सरकार उसी आधार पर प्रपोजल तैयार कर रही है। उद्योगों पर लगे प्रतिबंध कम होने की संभावना बढ़ जाएगी। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान का कहना है कि 100 किमी में भी मुजफ्फरनगर का अधिकतम हिस्सा आता है। अभी स्थिति साफ नहीं है। सोमवार को सही जानकारी मिलेगी। हालांकि अभी प्रस्ताव रखने की बात कही गई है, इसे स्वीकृति नहीं मिली है।
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मुजफ्फरनगर का पूरा क्षेत्र हो एनसीआर से बाहर
खतौली। तहसील के गांव नावला में कृष्ण त्यागी के आवास पर किसानों की एक बैठक संपन्न हुई। आंदोलन जनकल्याण के संयोजक प्रमोद कुमार ने कहा कि मंगलवार को एनसीआर योजना बोर्ड ने ‘मसौदा क्षेत्रीय योजना 2041’ को मंजूरी देकर, सरकार एनसीआर के 150 से 175 किमी तक फैले क्षेत्र को राजघाट से 100 किमी दायरे में समेटने की तैयारी कर रही है। 100 किमी के दायरे में आंशिक रूप से पडने वाली तहसीलों का निर्णय राज्य सरकार पर छोड़ने की बात कही गई है। अगर ऐसा होता है तो केवल मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील एनसीआर से बाहर होगी।

प्रमोद कुमार ने आगे कहा कि एनसीआर में शामिल होने के नाम पर उद्योग, किसानों के ट्रैक्टर, गाड़ियां यहां तक खेतों में गन्ने की पत्ती- धान की पराली जलाने पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिले का भट्टा उद्योग तो एनसीआर के कानूनी प्रावधानों से सबसे ज्यादा पीड़ित है। उपरोक्त समस्या समाधान हेतु वह कई बार केंद्र और राज्य सरकार दोनों को लिख चुके हैं कि या तो हमारी बात सुनी जाए वरना हमारे जिले को एनसीआर क्षेत्र से बाहर किया जाए। हमारी अपील है कि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान भी पूरे मुजफ्फरनगर क्षेत्र को एनसीआर से बाहर करवाने में मजबूत पक्ष एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सामने रखें। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह पूरे मुजफ्फरनगर में इसके लिए एक बड़ा अभियान चलाएंगे क्योंकि एनसीआर के विकास के नाम पर लोगों की रोटी रोजी पर ताला लगाना ठीक नहीं है। बैठक में सदानंद मास्टर जी, दिनेश त्यागी, कर्मवीर त्यागी ,उमेश कुमार, बृजपाल त्यागी,चोना नंबरदार, विकास त्यागी, राकेश त्यागी आदि मौजूद रहे।
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