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हंगामे की भेंट चढ़ी बोर्ड बैठक, बजट भी लटका
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 27 Apr 2017 12:45 AM IST
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पालिका बोर्ड की बैठक में हंगामा करते सभासद।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर नगर पालिका की बोर्ड बैठक बुधवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। सभासदों के वार्ड प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल नहीं करने पर जमकर हंगामा हुआ। पालिका प्रशासक और ईओ की कार्यप्रणाली पर बिफरे सभासदों के विरोध के बाद बैठक को स्थगित करना पड़ा। बोर्ड बैठक के निरस्त होने से पालिका का बजट भी लटक गया है।
पालिका सभाकक्ष में निर्धारित समय से दस मिनट की देरी पर बोर्ड बैठक शुरू हुई। प्रशासक एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह की अध्यक्षता में ईओ अजीत कुमार सिंह ने एजेंडा सदन में रखा। एजेंडे चर्चा शुरू होती, इससे पहले ही सभासदों का विरोध बाहर आ गया। सभासद योगेश मित्तल और सभासद विवेक गर्ग ने ऐतराज जताया कि निकाय चुनाव सिर पर आ चुके हैं।
बोर्ड बैठक का एजेंडा तैयार करने से पहले सभासदों के वार्डों में प्राथमिकता वाले कार्यों पर कोई प्रस्ताव नहीं लिया गया। बात इतनी बड़ी की सभासदों ने सदन चलने नहीं दिया। आरोप लगाए कि पालिका प्रशासन ने खुद एजेंडा तय किया और बैठक बुला ली। सभासदों ने पालिका प्रशासक पर परिचयात्मक बैठक नहीं बुलाने के आरोप लगाए।
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बोर्ड बैठक में 122 करोड़ रुपये की आय का बजट पारित होना था। गुस्साए सभासदों ने पालिका के इस एजेंडे पर सहमति तो दूर चर्चा करने से भी इंकार कर दिया। अंत में करीब 38 सभासदों ने एजेंडे को बहुमत के आधार पर निरस्त करने का प्रस्ताव रखा। जिसके चलते पालिका का बजट भी लटक गया।
स्थिति को भांपकर तुरंत ही अधिकारी बैकफुट पर आ गए। प्रशासक एडीएम वित्त सुनील सिंह ने कहा कि उपेक्षा के आरोप लगाना गलत है। बोर्ड के एजेंडे में जनहित के प्रस्ताव ही शामिल किये गये थे। अब विधिक राय लेकर ही दूसरी बैठक बुलाने का एजेंडा जारी किया जाएगा। उधर, ईओ अजीत कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड बैठक स्थगित की गई है। इसमें कोई तकनीकी अड़चन नहीं है। एजेंडा जारी होने पर बैठक बुलाई जाएगी।
छह माह बाद हुई थी बैठक
नगर पालिका में छह माह बाद बोर्ड बैठक की गई थी। इसमें पालिका की आय संबंधित बजट पेश किया जाना था। उसके आधार पर ही शहर के विकास की रूपरेखा तैयार होनी थी, लेकिन विरोध के कारण बजट पारित नहीं होने से अब विकास कार्यों पर भी संकट छा गया है। वहीं, बोर्ड बैठक में इस बार चेयरमैन पंकज अग्रवाल नहीं रहे, क्यों कि उन्हें विभिन्न आरोपों के कारण राज्य सरकार ने पद से हटा दिया है।
पालिका चुनाव में लगे कर्मचारी
नगर पालिका के चुनाव नजदीक आने से हलचल बढ़ गई है। विभागीय कर्मचारी भी इस कार्य में जुट गए हैं, क्योंकि अभी तक 45 वार्ड हैं, लेकिन नए चुनाव में 50 वार्ड से सभासद चुने जाएंगे।
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पालिका सभाकक्ष में निर्धारित समय से दस मिनट की देरी पर बोर्ड बैठक शुरू हुई। प्रशासक एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह की अध्यक्षता में ईओ अजीत कुमार सिंह ने एजेंडा सदन में रखा। एजेंडे चर्चा शुरू होती, इससे पहले ही सभासदों का विरोध बाहर आ गया। सभासद योगेश मित्तल और सभासद विवेक गर्ग ने ऐतराज जताया कि निकाय चुनाव सिर पर आ चुके हैं।
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बोर्ड बैठक का एजेंडा तैयार करने से पहले सभासदों के वार्डों में प्राथमिकता वाले कार्यों पर कोई प्रस्ताव नहीं लिया गया। बात इतनी बड़ी की सभासदों ने सदन चलने नहीं दिया। आरोप लगाए कि पालिका प्रशासन ने खुद एजेंडा तय किया और बैठक बुला ली। सभासदों ने पालिका प्रशासक पर परिचयात्मक बैठक नहीं बुलाने के आरोप लगाए।
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बोर्ड बैठक में 122 करोड़ रुपये की आय का बजट पारित होना था। गुस्साए सभासदों ने पालिका के इस एजेंडे पर सहमति तो दूर चर्चा करने से भी इंकार कर दिया। अंत में करीब 38 सभासदों ने एजेंडे को बहुमत के आधार पर निरस्त करने का प्रस्ताव रखा। जिसके चलते पालिका का बजट भी लटक गया।
स्थिति को भांपकर तुरंत ही अधिकारी बैकफुट पर आ गए। प्रशासक एडीएम वित्त सुनील सिंह ने कहा कि उपेक्षा के आरोप लगाना गलत है। बोर्ड के एजेंडे में जनहित के प्रस्ताव ही शामिल किये गये थे। अब विधिक राय लेकर ही दूसरी बैठक बुलाने का एजेंडा जारी किया जाएगा। उधर, ईओ अजीत कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड बैठक स्थगित की गई है। इसमें कोई तकनीकी अड़चन नहीं है। एजेंडा जारी होने पर बैठक बुलाई जाएगी।
छह माह बाद हुई थी बैठक
नगर पालिका में छह माह बाद बोर्ड बैठक की गई थी। इसमें पालिका की आय संबंधित बजट पेश किया जाना था। उसके आधार पर ही शहर के विकास की रूपरेखा तैयार होनी थी, लेकिन विरोध के कारण बजट पारित नहीं होने से अब विकास कार्यों पर भी संकट छा गया है। वहीं, बोर्ड बैठक में इस बार चेयरमैन पंकज अग्रवाल नहीं रहे, क्यों कि उन्हें विभिन्न आरोपों के कारण राज्य सरकार ने पद से हटा दिया है।
पालिका चुनाव में लगे कर्मचारी
नगर पालिका के चुनाव नजदीक आने से हलचल बढ़ गई है। विभागीय कर्मचारी भी इस कार्य में जुट गए हैं, क्योंकि अभी तक 45 वार्ड हैं, लेकिन नए चुनाव में 50 वार्ड से सभासद चुने जाएंगे।