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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया था कानपुर सिख नरसंहार
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मुजफ्फरनगर में पत्रकारवार्ता करते उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के पदाधिकारी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मोदी-योगी सरकार ही सिख समाज के प्रति समर्पित
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ष 1984 में कानपुर में हुए 127 सिखों के नरसंहार में सौ से अधिक आरोपी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश कांग्रेस-सपा कार्यकर्ता शामिल हैं। मोदी-योगी सरकार इन दोषियों को सजा दिलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी सरकार ही सिख समाज के लिए पूरी तरह समर्पित है।
बुधवार को रुड़की रोड स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ष 1984 के सिख नरसंहार में कानपुर में भी 127 सिखों की हत्या की गई थी। ये हत्याएं तत्कालीन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की थी, जिनमें अब कई लोग सपा में हैं। इस तरह के सौ से अधिक आरोपियों को मोदी-योगी सरकार जांच पूरी करने के बाद चिह्नित कर चुकी है, जिनके खिलाफ इसी वर्ष कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी सरकार ही सिख समाज के लिए पूरी तरह समर्पित है। सिख नरसंहार में शामिल जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह को मोदी सरकार ने ही सजा दिलाई है। इससे पहले लगातार आयोग बनते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी तरह का काम नहीं किया गया। मोदी के कार्यकाल में ही सिख समाज के लोगों को करतारपुर कॉरिडोर जाने का मौका मिला, जबकि इससे पहले केवल यह एक सपना हुआ करता था। मोदी सरकार ने ही देश के चार अकाल तख्त के दर्शनों के लिए चार नई ट्रेनें शुरू कीं। वहीं, योगी आदित्यनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपने सरकारी आवास पर गुरु ग्रंथ साहिब का स्वागत किया। वहीं, गुरु पुत्रों की शहादत के दिन को शहादत दिवस घोषित कर उनकी शहादत को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया। इस दौरान सरदार सुखदर्शन सिंह बेदी, राजकुमार छाबड़ा, अमरजीत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, देवेंद्र सिंह नागपाल, देवेंद्र सिंह चड्ढा आदि मौजूद रहे।
अब ऑनलाइन ऐप से सीखें पंजाबी भाषा
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने एक ऐप बनाया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति पंजाबी भाषा सीख सकता है। इच्छुक व्यक्ति को ऐप के माध्यम से मिस कॉल करनी होगी, जिसके बाद उसे रजिस्टर कर सुबह-शाम पंजाबी भाषा सिखाई जाएगी। यही नहीं, सरकार से पंजाबी भाषा को हिंदी-उर्दू के बाद तीसरी भाषा के रूप में मान्यता दिए जाने की भी मांग प्रदेश सरकार से की गई है।
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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ष 1984 में कानपुर में हुए 127 सिखों के नरसंहार में सौ से अधिक आरोपी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश कांग्रेस-सपा कार्यकर्ता शामिल हैं। मोदी-योगी सरकार इन दोषियों को सजा दिलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी सरकार ही सिख समाज के लिए पूरी तरह समर्पित है।
बुधवार को रुड़की रोड स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ष 1984 के सिख नरसंहार में कानपुर में भी 127 सिखों की हत्या की गई थी। ये हत्याएं तत्कालीन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की थी, जिनमें अब कई लोग सपा में हैं। इस तरह के सौ से अधिक आरोपियों को मोदी-योगी सरकार जांच पूरी करने के बाद चिह्नित कर चुकी है, जिनके खिलाफ इसी वर्ष कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी सरकार ही सिख समाज के लिए पूरी तरह समर्पित है। सिख नरसंहार में शामिल जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह को मोदी सरकार ने ही सजा दिलाई है। इससे पहले लगातार आयोग बनते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी तरह का काम नहीं किया गया। मोदी के कार्यकाल में ही सिख समाज के लोगों को करतारपुर कॉरिडोर जाने का मौका मिला, जबकि इससे पहले केवल यह एक सपना हुआ करता था। मोदी सरकार ने ही देश के चार अकाल तख्त के दर्शनों के लिए चार नई ट्रेनें शुरू कीं। वहीं, योगी आदित्यनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपने सरकारी आवास पर गुरु ग्रंथ साहिब का स्वागत किया। वहीं, गुरु पुत्रों की शहादत के दिन को शहादत दिवस घोषित कर उनकी शहादत को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया। इस दौरान सरदार सुखदर्शन सिंह बेदी, राजकुमार छाबड़ा, अमरजीत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, देवेंद्र सिंह नागपाल, देवेंद्र सिंह चड्ढा आदि मौजूद रहे।
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अब ऑनलाइन ऐप से सीखें पंजाबी भाषा
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने एक ऐप बनाया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति पंजाबी भाषा सीख सकता है। इच्छुक व्यक्ति को ऐप के माध्यम से मिस कॉल करनी होगी, जिसके बाद उसे रजिस्टर कर सुबह-शाम पंजाबी भाषा सिखाई जाएगी। यही नहीं, सरकार से पंजाबी भाषा को हिंदी-उर्दू के बाद तीसरी भाषा के रूप में मान्यता दिए जाने की भी मांग प्रदेश सरकार से की गई है।
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