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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - डीएम के खिलाफ दाखिल प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र खारिज
Sat, 23 Sep 2023 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 23 Sep 2023 12:41 AM IST
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- 20 मार्च 2015 को तत्कालीन डीएम ने की थी धारा 14 की कार्रवाई
- लेखपाल जयभगवान ने अदालत में दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। अपर सत्र न्यायालय (विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट) कोर्ट नंबर पांच के पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार ने सेवानिवृत्त लेखपाल जयभगवान बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य में जिलाधिकारी के खिलाफ दाखिल प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। जमीन पर कब्जा दिलाने का यह मामला चर्चित रहा था। जयभगवान लेखपाल संघ के अध्यक्ष रहे थे।
मामला करीब साढ़े आठ साल पुराना है। 20 मार्च 2015 को तत्कालीन डीएम ने जयभगवान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई की थी। इसी आधार पर प्रशासन ने उनकी रामराज क्षेत्र में संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए थे। जयभगवान ने संपत्ति मुक्त कराने के लिए प्रत्यावेदन किया, लेकिन निराशा मिली। आदेश के खिलाफ जयभगवान, लक्ष्मी देवी, गौरव कुमार एवं सतीश कुमार ने तीन दांडिक अपील दाखिल कर उच्च न्यायालय में दरवाजा खटखटाया था।
उच्च न्यायालय ने मामले में तीनों अपीलों को समेकित कर दिया था। न्यायामूर्ति ने 27 सितंबर 2017 को निचली अदालत के आदेश खंडित करने के आदेश कर दिए। मामले को पुन: गुण दोष के आधार पर तय करने के लिए रिमांड किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित न्यायालय ने जिलाधिकारी के दोनों आदेशों को खारिज करते हुए कुर्क संपत्ति को अवमुक्त करने का आदेश दिया था।
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इसके बावजूद जयभगवान ने जिलाधिकारी पर अदालत के आदेशों की अवमानना का आरोप लगाया था। विपक्षी के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई किए जाने और 12 दिसंबर 2018 के आदेशों के अनुपालन में अमल दरामद राजस्व अभिलेखों में किए जाने का प्रकीर्ण वाद दाखिल किया। अदालत ने राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करते हुए दांडिक प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
पीठासीन अधिकारी ने तहसीलदार सदर की आख्या 14 अगस्त 2023 में प्रश्नगत भूमि पर कुर्की से पूर्व एवं वर्तमान में लक्ष्मी देवी पत्नी जयभगवान निवासी गांव बुआड़ा खुर्द तहसील खतौली का कब्जा बताया गया है। इसी आधार पर प्रार्थना पत्र निरस्त किया गया।
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- लेखपाल जयभगवान ने अदालत में दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। अपर सत्र न्यायालय (विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट) कोर्ट नंबर पांच के पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार ने सेवानिवृत्त लेखपाल जयभगवान बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य में जिलाधिकारी के खिलाफ दाखिल प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। जमीन पर कब्जा दिलाने का यह मामला चर्चित रहा था। जयभगवान लेखपाल संघ के अध्यक्ष रहे थे।
मामला करीब साढ़े आठ साल पुराना है। 20 मार्च 2015 को तत्कालीन डीएम ने जयभगवान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई की थी। इसी आधार पर प्रशासन ने उनकी रामराज क्षेत्र में संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए थे। जयभगवान ने संपत्ति मुक्त कराने के लिए प्रत्यावेदन किया, लेकिन निराशा मिली। आदेश के खिलाफ जयभगवान, लक्ष्मी देवी, गौरव कुमार एवं सतीश कुमार ने तीन दांडिक अपील दाखिल कर उच्च न्यायालय में दरवाजा खटखटाया था।
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उच्च न्यायालय ने मामले में तीनों अपीलों को समेकित कर दिया था। न्यायामूर्ति ने 27 सितंबर 2017 को निचली अदालत के आदेश खंडित करने के आदेश कर दिए। मामले को पुन: गुण दोष के आधार पर तय करने के लिए रिमांड किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित न्यायालय ने जिलाधिकारी के दोनों आदेशों को खारिज करते हुए कुर्क संपत्ति को अवमुक्त करने का आदेश दिया था।
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इसके बावजूद जयभगवान ने जिलाधिकारी पर अदालत के आदेशों की अवमानना का आरोप लगाया था। विपक्षी के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई किए जाने और 12 दिसंबर 2018 के आदेशों के अनुपालन में अमल दरामद राजस्व अभिलेखों में किए जाने का प्रकीर्ण वाद दाखिल किया। अदालत ने राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करते हुए दांडिक प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
पीठासीन अधिकारी ने तहसीलदार सदर की आख्या 14 अगस्त 2023 में प्रश्नगत भूमि पर कुर्की से पूर्व एवं वर्तमान में लक्ष्मी देवी पत्नी जयभगवान निवासी गांव बुआड़ा खुर्द तहसील खतौली का कब्जा बताया गया है। इसी आधार पर प्रार्थना पत्र निरस्त किया गया।