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फ्रांस के विरोध में मदरसा छात्राओं की आनलाइन मुहिम शुरु
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देवबंद। फ्रांस में मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी किए जाने के विरोध में शुक्रवार को मदरसा आयशा सिद्दीका कासिमुल उलूम लिलबनात में नबी-ए-रहमत शीर्षक से दस दिवसीय आनलाइन कैंपेन की शुरुआत की गई। इसके साथ ही मदरसे की छात्राओं ने फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार करने का आह्वान किया।
नगर के मोहल्ला अबुल बरकात स्थित मदरसा आयशा सिद्दीका कासिमुल उलूम में हुई पत्रकार वार्ता में मदरसा संचालक मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि फ्रांस में मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी के मामले को लेकर दुनियाभर के मुसलमानों में बेचैनी का माहौल बना हुआ है। यही नहीं विदेश मंत्रालय द्वारा फ्रांस के समर्थन में दिए गए बयान से मुस्लिमों की भावनाएं आहत हुई हैं। संस्था की प्रधानाचार्य इफ्फत नदीमुल वाजदी ने बताया कि मोहम्मद साहब को नबी-ए-रहमत क्यों कहा जाता है इसी को बताने के लिए संस्था की छात्राओं ने नबी-ए-रहमत शीर्षक से 10 दिवसीय कैंपेन की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत संस्था की छात्राएं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसार करेंगी और मोहम्मद साहब की शिक्षा के बारे में बताएंगी। इसके साथ ही छात्राएं फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार कर देश में बनने वाले उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर लोगों को जागरूक करेंगी। इफ्फत नदीम ने बताया कि नगर एवं देहात क्षेत्रों में घर घर जाकर छात्राएं मोहम्मद साहब की शिक्षा से लोगों को अवगत कराने का काम करेंगी। अभियान को लेकर पोस्टर भी लांच किया गया। वार्ता के दौरान समरीन, फातिमा, सना शाहिद, गुल अफशा राव, मौलाना महमूद रहमान, उजमा हशमत, हमनशीं, मुफ्ती मेराज कासमी, मुफ्ती शाकिर कासमी आदि मौजूद रहे।
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नगर के मोहल्ला अबुल बरकात स्थित मदरसा आयशा सिद्दीका कासिमुल उलूम में हुई पत्रकार वार्ता में मदरसा संचालक मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि फ्रांस में मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी के मामले को लेकर दुनियाभर के मुसलमानों में बेचैनी का माहौल बना हुआ है। यही नहीं विदेश मंत्रालय द्वारा फ्रांस के समर्थन में दिए गए बयान से मुस्लिमों की भावनाएं आहत हुई हैं। संस्था की प्रधानाचार्य इफ्फत नदीमुल वाजदी ने बताया कि मोहम्मद साहब को नबी-ए-रहमत क्यों कहा जाता है इसी को बताने के लिए संस्था की छात्राओं ने नबी-ए-रहमत शीर्षक से 10 दिवसीय कैंपेन की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत संस्था की छात्राएं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसार करेंगी और मोहम्मद साहब की शिक्षा के बारे में बताएंगी। इसके साथ ही छात्राएं फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार कर देश में बनने वाले उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर लोगों को जागरूक करेंगी। इफ्फत नदीम ने बताया कि नगर एवं देहात क्षेत्रों में घर घर जाकर छात्राएं मोहम्मद साहब की शिक्षा से लोगों को अवगत कराने का काम करेंगी। अभियान को लेकर पोस्टर भी लांच किया गया। वार्ता के दौरान समरीन, फातिमा, सना शाहिद, गुल अफशा राव, मौलाना महमूद रहमान, उजमा हशमत, हमनशीं, मुफ्ती मेराज कासमी, मुफ्ती शाकिर कासमी आदि मौजूद रहे।
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