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गृह मंत्रालय ने संसद में कोरोना पर देश को भ्रमित किया : मदनी
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गृह मंत्रालय ने संसद में कोरोना पर देश को भ्रमित किया : मदनी
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से संसद में तब्लीगी जमात को कोरोना महामारी फैलाने का जिम्मेदार बताना देश को भ्रमित करने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाए उसे दूसरों पर थोप रही है।
बुधवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि गृह मंत्रालय को अपनी जिम्मेदारी और संसद की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और तब्लीगी जमात से संबंधित मद्रास हाईकोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के फैसलों तथा विचारों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने तब्लीगी जमात के संबंध में सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए उसे न सिर्फ आइना दिखाया था, बल्कि गलत कार्यों का पश्चाताप करने को भी कहा था। इस पर सरकार आत्म निरीक्षण करती व संसद में क्षमा याचना करती और गलतियों को दूर करने के तरीकों की घोषणा करती, लेकिन उसने पुरानी बात दोहरा कर न सिर्फ सत्यता से आंखें फेरी हैं, बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठकर अदालत के फैसले को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। मौलाना मदनी ने कहा कि जिस समय तब्लीगी जमात का मुद्दा खड़ा किया गया था उस समय देश में पांच हजार नागरिक भी कोरोना की चपेट में नहीं थे, लेकिन आज यह संख्या पचास लाख से अधिक हो गई है। संसद में पुराने हालात के कथित जिम्मेदारों का वर्णन तो किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों का जिम्मेदार कौन है, इस पर खामोशी क्यों बरती गई।
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देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से संसद में तब्लीगी जमात को कोरोना महामारी फैलाने का जिम्मेदार बताना देश को भ्रमित करने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाए उसे दूसरों पर थोप रही है।
बुधवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि गृह मंत्रालय को अपनी जिम्मेदारी और संसद की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और तब्लीगी जमात से संबंधित मद्रास हाईकोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के फैसलों तथा विचारों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने तब्लीगी जमात के संबंध में सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए उसे न सिर्फ आइना दिखाया था, बल्कि गलत कार्यों का पश्चाताप करने को भी कहा था। इस पर सरकार आत्म निरीक्षण करती व संसद में क्षमा याचना करती और गलतियों को दूर करने के तरीकों की घोषणा करती, लेकिन उसने पुरानी बात दोहरा कर न सिर्फ सत्यता से आंखें फेरी हैं, बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठकर अदालत के फैसले को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। मौलाना मदनी ने कहा कि जिस समय तब्लीगी जमात का मुद्दा खड़ा किया गया था उस समय देश में पांच हजार नागरिक भी कोरोना की चपेट में नहीं थे, लेकिन आज यह संख्या पचास लाख से अधिक हो गई है। संसद में पुराने हालात के कथित जिम्मेदारों का वर्णन तो किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों का जिम्मेदार कौन है, इस पर खामोशी क्यों बरती गई।
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