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उद्योग-धंधे चलने से जिंदगी भी पकड़ेगी रफ्तार
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 20 अप्रैल से प्रमुख उद्योगों को चलाए जाने की घोषणा की है। जनपद में चीनी, पेपर, स्टील और केमिकल प्रमुख उद्योग में शामिल हैं। इनके चलने से जिले के 20 हजार श्रमिकों की जिंदगी पटरी पर लौट जाएगी। यहां बड़ी बात यह है कि 95 प्रतिशत लेबर लॉकल की है।
उद्योग के क्षेत्र में मुजफ्फरनगर जनपद की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। पेपर उद्योग में यह जिला पूरे देश में पहले नंबर पर है। प्रति वर्ष यहां 15 लाख टन पेपर का उत्पादन होता है। चीनी और स्टील उद्योग में इसकी अपनी पहचान है। जिले में आठ चीनी मिल हैं जो लॉकडाउन में भी निरंतर पेराई कर रही है। स्टील उद्योग में भी यह जिला अपना बड़ा मुकाम रखता है। लगभग दस लाख टन लोहे का उत्पादन यहां होता है। चौथे नंबर पर यहां केमिकल उद्योग आता है। जिंक बनाने की यहां कई फैक्टरी हैं। चार यहां प्रमुख उद्योग हैं। इनमें चीनी उद्योग निरंतर चल ही रहा है। प्रदेश सरकार ने 20 अप्रैल से जिन उद्योगों को चलाने की घोषणा की है, उनमें पेपर, स्टील और केमिकल उद्योग शामिल हैं। उद्योगों से जिले के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इनमें 20 हजार के लगभग श्रमिक हैं, जो फैक्टिरयों में नौकरी करते हैं।
सरकार ने शुरूआत में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने और 50 प्रतिशत से कम लेबर से काम चलाने का आदेश दिया है। ऐसे में उद्यमी श्रमिकों को शिफ्टों में भी बुला सकते हैं। उद्योगों के सामने यहां कच्चेमाल की परेशानी आ सकती है। दूसरे लॉकडाउन का पालन करना बड़ी चुनौती बनेगी। सरकार की इस घोषणा से श्रमिकों में बना निराशा का माहौल दूर होगा और जिले में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। श्रमिक संजय शर्मा का कहना है कि सरकार का अच्छा प्रयास है, इससे जिंदगी पटरी पर लौटेगी। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि हमारे जिले के लगभग 95 प्रतिशत उद्योग ऐसे हैं जो सरकार की गाइड लाइन में आ रहे हैं। इनके चलने से जीवन का रफ्तार मिलेगी।
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क्या कहते हैं उद्यमी
- सरकार का अच्छा प्रयास है। उद्योग चलेंगे तो लेबर को भी पैसा देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सरकार को भी टैक्स जाएगा। माहौल में भी बदलाव आएगा। यह जनपद कोरोना से बहुत जल्द उबर जाएगा। - पंकज अग्रवाल, उद्यमी
- सरकार का निराशा के माहौल में आशा भरा प्रयास है। जिंदगी को दोबारा पटरी पर तो लाना ही है। जो अर्थ तंत्र रुका पड़ा है वह गति पकड़ेगा। पेट्रोल की बिक्री बढे़गी, सरकार का टैक्स जाना शुरू होगा। - कुशपुरी, चेयरमैन , इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहारनपुर मंडल
- अर्थ तंत्र का पटरी पर लाने का सरकार का अच्छा प्रयास है। इस प्रयास से उद्योग तो पटरी पर आएगा ही श्रमिकों में भी विश्वास जगेगा। जीवन को सामान्य बनाने का एक अच्छा प्रयास है। - भीमसेन कंसल, उद्यमी
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उद्योग के क्षेत्र में मुजफ्फरनगर जनपद की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। पेपर उद्योग में यह जिला पूरे देश में पहले नंबर पर है। प्रति वर्ष यहां 15 लाख टन पेपर का उत्पादन होता है। चीनी और स्टील उद्योग में इसकी अपनी पहचान है। जिले में आठ चीनी मिल हैं जो लॉकडाउन में भी निरंतर पेराई कर रही है। स्टील उद्योग में भी यह जिला अपना बड़ा मुकाम रखता है। लगभग दस लाख टन लोहे का उत्पादन यहां होता है। चौथे नंबर पर यहां केमिकल उद्योग आता है। जिंक बनाने की यहां कई फैक्टरी हैं। चार यहां प्रमुख उद्योग हैं। इनमें चीनी उद्योग निरंतर चल ही रहा है। प्रदेश सरकार ने 20 अप्रैल से जिन उद्योगों को चलाने की घोषणा की है, उनमें पेपर, स्टील और केमिकल उद्योग शामिल हैं। उद्योगों से जिले के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इनमें 20 हजार के लगभग श्रमिक हैं, जो फैक्टिरयों में नौकरी करते हैं।
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सरकार ने शुरूआत में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने और 50 प्रतिशत से कम लेबर से काम चलाने का आदेश दिया है। ऐसे में उद्यमी श्रमिकों को शिफ्टों में भी बुला सकते हैं। उद्योगों के सामने यहां कच्चेमाल की परेशानी आ सकती है। दूसरे लॉकडाउन का पालन करना बड़ी चुनौती बनेगी। सरकार की इस घोषणा से श्रमिकों में बना निराशा का माहौल दूर होगा और जिले में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। श्रमिक संजय शर्मा का कहना है कि सरकार का अच्छा प्रयास है, इससे जिंदगी पटरी पर लौटेगी। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि हमारे जिले के लगभग 95 प्रतिशत उद्योग ऐसे हैं जो सरकार की गाइड लाइन में आ रहे हैं। इनके चलने से जीवन का रफ्तार मिलेगी।
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क्या कहते हैं उद्यमी
- सरकार का अच्छा प्रयास है। उद्योग चलेंगे तो लेबर को भी पैसा देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सरकार को भी टैक्स जाएगा। माहौल में भी बदलाव आएगा। यह जनपद कोरोना से बहुत जल्द उबर जाएगा। - पंकज अग्रवाल, उद्यमी
- सरकार का निराशा के माहौल में आशा भरा प्रयास है। जिंदगी को दोबारा पटरी पर तो लाना ही है। जो अर्थ तंत्र रुका पड़ा है वह गति पकड़ेगा। पेट्रोल की बिक्री बढे़गी, सरकार का टैक्स जाना शुरू होगा। - कुशपुरी, चेयरमैन , इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहारनपुर मंडल
- अर्थ तंत्र का पटरी पर लाने का सरकार का अच्छा प्रयास है। इस प्रयास से उद्योग तो पटरी पर आएगा ही श्रमिकों में भी विश्वास जगेगा। जीवन को सामान्य बनाने का एक अच्छा प्रयास है। - भीमसेन कंसल, उद्यमी