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मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले युवक को उम्रकैद
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कोर्ट में सजा सुनाये जानें के बाद आरोपी को जेल ले जाती पुलिस।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। मासूम बालिका से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने वाले युवक को विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो नेे आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद शामली के थाना गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के एक गांव के पीड़िता पिता ने 10 अक्टूबर 2017 को यह मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि वह अपनी पत्नी के साथ जंगल में गया था। घर पर उसकी ढाई साल की बेटी और पांच साल का बेटा था। शाम को दंपती लौट कर आया तो मासूम बेटी नहीं मिली। बेटे ने बताया कि बेटी पड़ोसी लक्ष्मण के घर गई थी। लक्ष्मण के घर पर भी बेटी को तलाश किया, मगर वह नहीं मिली। बाद में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने उसी रात लक्ष्मण को गिरफ्तार किया। उसके कपड़े खून में सने हुए थे। लक्ष्मण की निशानदेेही पर मासूम की लाश उसके ही घर की अलमारी से बरामद की गई।
लक्ष्मण ने बताया कि लाश छुपाने में बोबी पुत्र जगराम ने मदद की थी। लक्ष्मण और बोबी को आरोपी बनाया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो संजीव तिवारी की अदालत संख्या- आठ में हुई। विशेष लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने छह गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने बुधवार को दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त लक्ष्मण को बालिका के साथ दुष्कर्म कर हत्या करके शव को छुपाने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। सह अभियुक्त बोबी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर किया। शुक्रवार को सजा पर सुनवाई हुई। अदालत ने गुनहगार लक्ष्मण को आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना की धनराशि में से 50 हजार रुपये मृतका के पिता को दिए जाने का आदेश दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद शामली के थाना गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के एक गांव के पीड़िता पिता ने 10 अक्टूबर 2017 को यह मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि वह अपनी पत्नी के साथ जंगल में गया था। घर पर उसकी ढाई साल की बेटी और पांच साल का बेटा था। शाम को दंपती लौट कर आया तो मासूम बेटी नहीं मिली। बेटे ने बताया कि बेटी पड़ोसी लक्ष्मण के घर गई थी। लक्ष्मण के घर पर भी बेटी को तलाश किया, मगर वह नहीं मिली। बाद में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने उसी रात लक्ष्मण को गिरफ्तार किया। उसके कपड़े खून में सने हुए थे। लक्ष्मण की निशानदेेही पर मासूम की लाश उसके ही घर की अलमारी से बरामद की गई।
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लक्ष्मण ने बताया कि लाश छुपाने में बोबी पुत्र जगराम ने मदद की थी। लक्ष्मण और बोबी को आरोपी बनाया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो संजीव तिवारी की अदालत संख्या- आठ में हुई। विशेष लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने छह गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने बुधवार को दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त लक्ष्मण को बालिका के साथ दुष्कर्म कर हत्या करके शव को छुपाने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। सह अभियुक्त बोबी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर किया। शुक्रवार को सजा पर सुनवाई हुई। अदालत ने गुनहगार लक्ष्मण को आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना की धनराशि में से 50 हजार रुपये मृतका के पिता को दिए जाने का आदेश दिया।
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