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किसान पंचायतों के मंच पर भाईचारे की मिसाल रहे जौला

Tue, 17 May 2022 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 12:03 AM IST
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Joula was an example of brotherhood on the platform of Kisan Panchayats
गुलाम मौहम्मद । फाइल फोटो। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
किसान पंचायतों के मंच पर भाईचारे की मिसाल रहे जौला
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। किसान पंचायतों के मंच पर गुलाम मोहम्मद जौला ताउम्र भाईचारे की मिसाल बनकर रहे। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत उन पर अटूट भरोसा करते थे, यही वजह रही कि कोई दूसरा मुस्लिम चेहरा कभी उनकी जगह नहीं ले सका। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े पक्षकारों में से एक थे।

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद आहत हुए तो नया संगठन खड़ा कर लिया। लेकिन कुछ दिन बार ही फिर समाज का एक करने में जुट गए। भाकियू की पंचायतों के मंच पर हर-हर महादेव व अल्लाह हू अकबर के नारे को एक साथ जोड़कर पहली बार गुलाम मोहम्मद ने ही बोला था। दो नारों को जोड़कर एक साथ बोलने का उनका यह अंदाज किसानों को खूब भाया। किसान परिवार में जन्मे और हमेशा किसानों की भलाई के बारे में सोचते रहे। किसी पद की लालसा नहीं की। बिना किसी लाग लपेट के सीधी सपाट बात कहने की उनकी आदत रही। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए अभियान चलाया।
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