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मुद्दा : बोले बुजुर्ग - पुरानी पेंशन हो बहाल, बुढ़ापे का यही सहारा
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मुद्दा : बोले बुजुर्ग - पुरानी पेंशन हो बहाल, बुढ़ापे का यही सहारा
मुजफ्फरनगर। इस बार के विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन बड़ा मुद्दा बन रही है। कर्मचारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों के घोषणापत्र पर उनकी नजर टिकी हुई है। नई सरकार बनते ही सबसे पहले पुरानी पेंशन की व्यवस्था शुरू होनी चाहिए। पेंशन की व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारियों को असुरक्षा की भावना घेर रही है। बुढ़ापे में किस तरह जीवनयापन होगा, इसका सवाल भी कर्मचारियों को परेशान करता है। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन ही प्रभावी है और कोई भी सरकार बनें, उसे बहाल किया जाना चाहिए।
बहाल होनी चाहिए कर्मचारियों की पेंशन
शाहपुर कस्बे के जूनियर हाई स्कूल गोकलपुर के सहायक अध्यापक जैरिल के सिंह का कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारी सेवा भाव से कार्य करते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन न मिल पाने के कारण दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी बने, लेकिन कर्मचारियों की पेंशन बहाल करनी चाहिए।
पेंशन मिले और रोका जाए निजीकरण
खतौली यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड कीपर शिव कुमार का कहना है कि बैंक कर्मचारियों को पहले सरकार की तरफ से पेंशन मिलती थी, लेकिन वह पेंशन मिलना बंद हो गई। सरकार को चाहिए कि बैंक कर्मचारियों को भी पहले की तरह पेंशन मुहैया कराएं। बैंकों के मर्जर से सभी बैंक कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। बैंकों का निजीकरण भी नहीं होना चाहिए।
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सरकार ने छीन लिया बुढ़ापे का सहारा
मेदपुर निवासी सुधीर कुमार कौशिक यूनियन बैंक में हेड कैशियर है। उनका कहना है कि 2004 में सरकार ने पेंशन बंद की थी, जिससे कर्मचारियों को बहुत नुकसान हुआ। समाज व परिवार में सेवानिवृत्त के बाद जो सम्मान मिलता था, अब वो नहीं रहा है। पेंशन व्यक्ति के बुढ़ापे का सहारा थी वो भी सरकार ने छीन ली है।
पेंशन बहाल कर दिया जाना चाहिए हक
क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी शिक्षक सोविंदर बालियान गांव मुजाहिदपुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं। उनका कहना है कि पेंशन किसी भी कर्मचारी का सुरक्षित भविष्य का आधार है। कर्मचारी घर से दूर दराज के क्षेत्रों में अपनी सेवा देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जब घर आएंगे तो खाली हाथ लौटेंगे, उनके बुढ़ापे का सहारा क्या होगा। तब तक महंगाई बहुत बढ़ चुकी होगी, इसलिए आने वाली सरकार को चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।
पेंशन नहीं मिलने से बढ़ेगी परेशानी
पुरकाजी ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय तुगलकपुर में तैनात प्रधानाध्यापक मेराज खालिद रिजवी का कहना है, कि कर्मचारी अपने जीवन के 30 से 35 साल सरकारी सेवा देकर सेवानिवृत्त होते हैं, तो बुढ़ापे का सहारा एकमात्र पेंशन होती है। पेंशन 2004 के बाद से बंद चल रही है। कर्मचारियों को पेंशन ना मिलने के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। समय-समय पर कर्मचारियों को पेंशन देने की मांग उठाई जा रही है। प्रकरण का समाधान होना चाहिए।
नई सरकार बनते ही सबसे पहले मिले पेंशन
भोपा के अथाई प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक राजेश राठी का कहना है कि कर्मचारी 30 साल सरकारी सेवा करने के बाद भी खाली हाथ घर लौट रहे हैं। कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं। पुरानी पेंशन स्कीम बंद कर सरकार ने आने वाली पीढ़ी को भी दर-दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर कर दिया है। सूबे में सरकार बनते ही सरकार को पुरानी पेंशन लागू करने चाहिए।
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मुजफ्फरनगर। इस बार के विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन बड़ा मुद्दा बन रही है। कर्मचारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों के घोषणापत्र पर उनकी नजर टिकी हुई है। नई सरकार बनते ही सबसे पहले पुरानी पेंशन की व्यवस्था शुरू होनी चाहिए। पेंशन की व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारियों को असुरक्षा की भावना घेर रही है। बुढ़ापे में किस तरह जीवनयापन होगा, इसका सवाल भी कर्मचारियों को परेशान करता है। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन ही प्रभावी है और कोई भी सरकार बनें, उसे बहाल किया जाना चाहिए।
बहाल होनी चाहिए कर्मचारियों की पेंशन
शाहपुर कस्बे के जूनियर हाई स्कूल गोकलपुर के सहायक अध्यापक जैरिल के सिंह का कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारी सेवा भाव से कार्य करते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन न मिल पाने के कारण दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी बने, लेकिन कर्मचारियों की पेंशन बहाल करनी चाहिए।
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पेंशन मिले और रोका जाए निजीकरण
खतौली यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड कीपर शिव कुमार का कहना है कि बैंक कर्मचारियों को पहले सरकार की तरफ से पेंशन मिलती थी, लेकिन वह पेंशन मिलना बंद हो गई। सरकार को चाहिए कि बैंक कर्मचारियों को भी पहले की तरह पेंशन मुहैया कराएं। बैंकों के मर्जर से सभी बैंक कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। बैंकों का निजीकरण भी नहीं होना चाहिए।
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सरकार ने छीन लिया बुढ़ापे का सहारा
मेदपुर निवासी सुधीर कुमार कौशिक यूनियन बैंक में हेड कैशियर है। उनका कहना है कि 2004 में सरकार ने पेंशन बंद की थी, जिससे कर्मचारियों को बहुत नुकसान हुआ। समाज व परिवार में सेवानिवृत्त के बाद जो सम्मान मिलता था, अब वो नहीं रहा है। पेंशन व्यक्ति के बुढ़ापे का सहारा थी वो भी सरकार ने छीन ली है।
पेंशन बहाल कर दिया जाना चाहिए हक
क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी शिक्षक सोविंदर बालियान गांव मुजाहिदपुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं। उनका कहना है कि पेंशन किसी भी कर्मचारी का सुरक्षित भविष्य का आधार है। कर्मचारी घर से दूर दराज के क्षेत्रों में अपनी सेवा देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जब घर आएंगे तो खाली हाथ लौटेंगे, उनके बुढ़ापे का सहारा क्या होगा। तब तक महंगाई बहुत बढ़ चुकी होगी, इसलिए आने वाली सरकार को चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।
पेंशन नहीं मिलने से बढ़ेगी परेशानी
पुरकाजी ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय तुगलकपुर में तैनात प्रधानाध्यापक मेराज खालिद रिजवी का कहना है, कि कर्मचारी अपने जीवन के 30 से 35 साल सरकारी सेवा देकर सेवानिवृत्त होते हैं, तो बुढ़ापे का सहारा एकमात्र पेंशन होती है। पेंशन 2004 के बाद से बंद चल रही है। कर्मचारियों को पेंशन ना मिलने के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। समय-समय पर कर्मचारियों को पेंशन देने की मांग उठाई जा रही है। प्रकरण का समाधान होना चाहिए।
नई सरकार बनते ही सबसे पहले मिले पेंशन
भोपा के अथाई प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक राजेश राठी का कहना है कि कर्मचारी 30 साल सरकारी सेवा करने के बाद भी खाली हाथ घर लौट रहे हैं। कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं। पुरानी पेंशन स्कीम बंद कर सरकार ने आने वाली पीढ़ी को भी दर-दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर कर दिया है। सूबे में सरकार बनते ही सरकार को पुरानी पेंशन लागू करने चाहिए।