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शिक्षक ऋण घोटाले का जिन्न बाहर आया

Thu, 24 Dec 2020 12:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 12:17 AM IST
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Investigation started after 13 years in teacher loan scam, 15 statements recorded
शिक्षक ऋण घोटाला में 13 साल बाद शुरू हुई जांच, 15 के बयान दर्ज
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मुजफ्फरनगर। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की ओर से बनाई गई सहकारी समिति में हुए करोड़ों के घोटाले का जिन्न 13 साल बाद बाहर आ गया है। शासन के निर्देश पर मंगलवार को सीबीसीआईडी लखनऊ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। टीम ने घोटाले के शिकार हुए 15 शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। जिला सहकारी बैंक करीब 200 शिक्षकों को बकाया का नोटिस जारी कर चुका है। बैंक का लगभग चार करोड़ बकाया है, जबकि शिक्षक अपना पैसा समिति में जमा कर चुके हैं। इस मामले में बैंक के कुछ अफसरों और बेसिक शिक्षा लेखा विभाग के कर्मचारी भी फंसे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग का घोटाला गत वर्ष उस समय चर्चाओं में आया था, जब शिव चौक स्थित जिला सहकारी बैंक की शाखा की ओर से मुजफ्फरनगर और शामली के 500 शिक्षकों को एक मुश्त नोटिस भेजकर उन पर लोन की राशि का तीन गुना तक वसूली के लिए चेतावनी दी गई थी। अधिकतर शिक्षक ऋण जमा कर चुके हैं। वर्ष 2007 में शिक्षक संघ से जुड़े कुछ परिषदीय शिक्षकों ने एक समिति पंजीकृत कराई थी, जिसका नाम मुजफ्फरनगर प्राथमिक शिक्षक वेतनभोगी कर्मचारी ऋण समिति रखा गया। अध्यक्ष जयप्रकाश बने, तो सचिव संजय दहिया बनाए गए। ये दोनों शिक्षक संघ के पदाधिकारी थे। जिले के 500 शिक्षकों ने समिति से लेनदेन शुरू किया। शुरू के चार साल तक समिति चलती रही।
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समिति ने पीएनबी बुढ़ाना में एक अन्य खाता खुलवाया। लेखा विभाग से बैंक की किस्त सीधे इस खाते में जाने लगी। कुछ दिन तक यह पैसा ट्रांसफर हुआ। बाद में खाता खोलने वाले लोगों ने इस पैसे को खुद ही निकाल लिया। यह धनराशि सवा करोड़ से अधिक की बताई गई है। मामला खुलने के बाद सहकारी बैंक की ओर से बुढ़ाना थाने पर गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें अध्यक्ष और सचिव के साथ बैंक मैनेजर पर भी आरोप लगाए गए थे। कई साल तक यह जांच फाइलों में ही दबी रही। शासन ने यह जांच सीबीसीआईडी के हवाले की तो एक बार फिर बोतल का जिन्न बाहर आ गया।
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टीम जिला सहकारी बैंक पहुंची तो यहां हड़कंप मच गया। टीम ने जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय के साथ ही बीएसए दफ्तर पहुंचकर भी दस्तावेज मांगे। हालांकि दोनों स्थानों से अभी दस्तावेज टीम को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस मामले में शामली के साथ-साथ मुजफ्फरनगर के भी बेसिक शिक्षक अपना लोन चुकाने के बाद भी तनाव झेल रहे हैं। अब जांच शुरू होने के साथ ही तत्कालीन शाखा प्रबंधक व पटल सहायक के साथ उन अफसरों की भी तलाश शुरू हो गई है, जिसके इशारे पर यह पूरा खेल हुआ था। सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर राजीव चतुर्वेदी ने कुछ शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। इनमे शिव कुमार, रियाज अली, आलोक शर्मा, सुभाष शर्मा, अमीर अहमद, नजाकत अली, विकास चंद व पंकज कुमार आदि हैं।
संजय दहिया की हो चुकी है मौत
मुजफ्फरनगर। शिक्षण ऋण घोटाले के मुख्य सूत्रधार संजय दहिया की 2016 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। संजय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं। समिति में अध्यक्ष रहे जयप्रकाश रिटायर हो चुके हैं। वो इस घोटाले के घेरे में आ सकते हैं।
रिकार्ड में लगा दी गई थी आग
मुजफ्फरनगर। शिक्षक ऋण समिति में जब घोटाला सामने आया तो पूरे रिकार्ड को आग के हवाले कर दिया गया था। सुबूत मिटाने के लिए पदाधिकारियों ने बड़ा खेल किया। जांच शुरू होने से रिकार्ड जलाने वाले भी चिह्नित होंगे। जांच टीम सहकारी बैंक, पीएनबी बुढ़ाना और एआर कोआपरेटिव के यहां से रिकार्ड एकत्र कर रही है।

हम सहयोग को तैयार हैं: बीएसए
मुजफ्फरनगर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम का कहना है कि शिक्षकों की समिति का हमारे पास कोई रिकार्ड नहीं है। लेखा विभाग से कुछ सुबूत मिल सकते हैं। हम हर तरह से समिति का सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
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