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वॉलीबाल में चमकेगा भारत: विनीत
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भारतीय वॉलीबाल टीम के कप्तान विनीत कुमार अपने गांव बुढ़ीना कलां में लॉकडाउन के चलते ट्रैक्टर चल?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
वॉलीबाल में चमकेगा भारत: विनीत
मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन के चलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के कदम भी ठिठक गए हैं। कोई गांव की मिट्टी में प्राकृतिक ऊर्जा संचित करने में लगा है, तो कोई बेसिक फिटनेस को वक्त दे रहा है। भारतीय वॉलीबाल टीम के कप्तान विनीत कुमार ऐसी ही खेल शख्सियत हैं। उन्होंने कहा कि वॉलीबाल में भारत का नाम जरूर चमकेगा। अमर उजाला ने वॉलीबाल खिलाड़ी विनीत से बेबाक बातचीत की।
वॉलीबाल के खेल को चुनने की मुख्य वजह थी कि बचपन में पैतृक गांव बुड़ीना कलां में ग्रामीणों को वॉलीबाल खेलते देखता था। श्रीराम कॉलेज में ग्रेजुएशन के दौरान वॉलीबाल खेलने की पर्याप्त मौका मिला। मेहनत रंग लाई, पहले चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी मेरठ की टीम में चयनित हुआ। फिर यूपी की ओर से राष्ट्रीय वॉलीबाल टीम में जगह बनाई। भारतीय वॉलीबाल टीम का कप्तान बनना बड़ी उपलब्धि है। देश की टीम का नेतृत्व करना गौरवान्वित करता हैं। वर्ष 2016 से लगातार राष्ट्रीय टीम में हूं। उम्दा प्रदर्शन की लय, अनुशासन और व्यवहार की गरिमा ने कप्तान बनने की राह बना दी। विनीत कुमार ने कहा कि यह आपदा में तैयारी प्रभावित हुई है। कोरोना संक्रमण से बचाव को अभी ग्रुप में तैयारी नहीं कर सकते। फिलहाल गांव में नित्य बेसिक फिटनेस का अभ्यास होता है। शेष वक्त खेतीबाड़ी और किताबें पढ़ने में बीत रहा है। उन्होंने कहा कि वॉलीबाल को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण स्तर पर परफैक्ट कोच की सबसे ज्यादा जरूरत है, जो ग्राउंड लेवल पर काम कर सके। युवा केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कॅरियर बनाकर वॉलीबाल खेलें। विश्व स्तर पर भारत को वॉलीबाल में चमकाना ही लक्ष्य है।
फख्र की बात, बेटा बना कप्तान
मुजफ्फरनगर। बघरा ब्लाक के गांव बुड़ीना कलां में किसान हरेंद्र सिंह तथा मां अमरेश देवी के इकलौते पुत्र विनीत कुमार ओएनजीसी, गुवाहाटी में तैनात हैं। वह माता-पिता के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के ऋणी हैं। विनीत कहते हैं कि राष्ट्रीय वॉलीबाल टीम में वह यूपी के अकेले खिलाड़ी हैं। भारतीय टीम जनवरी माह में उनकी कप्तानी में ओलंपिक क्वालिफाइंग राउंड के लिए चीन गई थी, मगर आस्ट्रेलिया और कोरिया के खिलाफ मैच में हार से निराशा हुई थी। पिता हरेंद्र सिंह कहते है कि बेटे ने भारतीय टीम का कप्तान बनकर जिले का नाम रोशन कर दिया।
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मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन के चलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के कदम भी ठिठक गए हैं। कोई गांव की मिट्टी में प्राकृतिक ऊर्जा संचित करने में लगा है, तो कोई बेसिक फिटनेस को वक्त दे रहा है। भारतीय वॉलीबाल टीम के कप्तान विनीत कुमार ऐसी ही खेल शख्सियत हैं। उन्होंने कहा कि वॉलीबाल में भारत का नाम जरूर चमकेगा। अमर उजाला ने वॉलीबाल खिलाड़ी विनीत से बेबाक बातचीत की।
वॉलीबाल के खेल को चुनने की मुख्य वजह थी कि बचपन में पैतृक गांव बुड़ीना कलां में ग्रामीणों को वॉलीबाल खेलते देखता था। श्रीराम कॉलेज में ग्रेजुएशन के दौरान वॉलीबाल खेलने की पर्याप्त मौका मिला। मेहनत रंग लाई, पहले चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी मेरठ की टीम में चयनित हुआ। फिर यूपी की ओर से राष्ट्रीय वॉलीबाल टीम में जगह बनाई। भारतीय वॉलीबाल टीम का कप्तान बनना बड़ी उपलब्धि है। देश की टीम का नेतृत्व करना गौरवान्वित करता हैं। वर्ष 2016 से लगातार राष्ट्रीय टीम में हूं। उम्दा प्रदर्शन की लय, अनुशासन और व्यवहार की गरिमा ने कप्तान बनने की राह बना दी। विनीत कुमार ने कहा कि यह आपदा में तैयारी प्रभावित हुई है। कोरोना संक्रमण से बचाव को अभी ग्रुप में तैयारी नहीं कर सकते। फिलहाल गांव में नित्य बेसिक फिटनेस का अभ्यास होता है। शेष वक्त खेतीबाड़ी और किताबें पढ़ने में बीत रहा है। उन्होंने कहा कि वॉलीबाल को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण स्तर पर परफैक्ट कोच की सबसे ज्यादा जरूरत है, जो ग्राउंड लेवल पर काम कर सके। युवा केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कॅरियर बनाकर वॉलीबाल खेलें। विश्व स्तर पर भारत को वॉलीबाल में चमकाना ही लक्ष्य है।
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फख्र की बात, बेटा बना कप्तान
मुजफ्फरनगर। बघरा ब्लाक के गांव बुड़ीना कलां में किसान हरेंद्र सिंह तथा मां अमरेश देवी के इकलौते पुत्र विनीत कुमार ओएनजीसी, गुवाहाटी में तैनात हैं। वह माता-पिता के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के ऋणी हैं। विनीत कहते हैं कि राष्ट्रीय वॉलीबाल टीम में वह यूपी के अकेले खिलाड़ी हैं। भारतीय टीम जनवरी माह में उनकी कप्तानी में ओलंपिक क्वालिफाइंग राउंड के लिए चीन गई थी, मगर आस्ट्रेलिया और कोरिया के खिलाफ मैच में हार से निराशा हुई थी। पिता हरेंद्र सिंह कहते है कि बेटे ने भारतीय टीम का कप्तान बनकर जिले का नाम रोशन कर दिया।
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