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मिट्टी बगैर अधर में लटका है रेलवे कॉरिडोर का कार्य
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इस्टर्न रेल कॉरीडोर का निर्माण कार्य बंद रहने से खतौली से बधाई कलां तक खाली खड़े वाहन।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मिट्टी बगैर अधर में लटका है रेलवे कॉरिडोर का कार्य
मुजफ्फरनगर। जनपद की सीमा में मिट्टी उठान में आ रही दिक्कतों से रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कार्य ठप पड़ा है। परियोजना पर नौ महीने से कार्य ठप रहने के कारण ठेकेदारों के सैकड़ों वाहन खाली खड़े हैं और स्टाफ खाली है। जिले में खनन विभाग की उदासीनता के कारण केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना बाधित हो रही है। परियोजना के मुख्यालय दिल्ली से परियोजना निर्माण में अरसे से आ रही दिक्कतों के संबंध में प्रोजेक्ट मैनेजर कुलदीप कुमार ने डीएम को पत्र भेजा है।
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट रेलवे कॉरिडोर का निर्माण खुर्जा से होकर मुजफ्फरनगर-सहारनपुर होकर पंजाब के अंबाला- शानेवाल तक करीब 1400 किलोमीटर प्रस्तावित है। मिट्टी कार्य में आ रहे व्यवधान से वेस्ट यूपी के अन्य जिलों की अपेक्षा मुजफ्फरनगर में प्रगति फिसड्डी है। कंपनी के अधिकारी जिले में पिछड़ने का कारण खनन विभाग में मिट्टी उठाने की अनुमति के लिए चक्कर काटना बता रहे हैं। विभिन्न आपत्तियां लगाकर महीनों तक मंजूरी नहीं मिल पाने से मिट्टी उठाने का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा। नौ महीनों से हालत बदतर है। एपीएस हाइड्रो कंपनी का तीन महीने से कार्य ठप है। परियोजना का अनुबंध कंपनी एलएंडटी के नाम है। परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार ने अति आवश्यक कार्य में आ रही समस्याओं को हल कराने के लिए डीएम को पत्र भेजा है। प्रोजेक्ट के प्रशासनिक अधिकारी एवं आईआर रमन चौधरी ने बताया इस परियोजना में दो मीटर तक मिट्टी उठाने में कोई रॉयल्टी नहीं है। शासन ने सात दिन के स्थान पर 15 दिन में परमिशन संबंधी समस्याओं का निस्तारण करने का नियम बनाया है। यहां अनुमति नहीं मिलने के कारण करीब नौ महीने से मिट्टी उपलब्ध नहीं होने से परियोजना का कार्य बाधित हो रहा है।
वेस्ट यूपी में मुजफ्फरनगर की पिछड़ रही प्रगति
ईस्टर्न रेलवे कॉरिडोर परियोजना में खुर्जा से शुरू होकर बुलंदशहर, गाजियाबाद और हापुड़ में मिट्टी कार्य खत्म हो गया। मेरठ में 90 प्रतिशत हो चुका है। जबकि मुजफ्फरनगर में सिर्फ 48 प्रतिशत हो पाया है। मुंबई से मुगलसराय-कोलकाता वाले इस कॉरिडोर को इटावा से टर्न ईस्टर्न कॉरिडोर का नाम दिया गया है। जून 2022 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की मियाद है।
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मुजफ्फरनगर। जनपद की सीमा में मिट्टी उठान में आ रही दिक्कतों से रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कार्य ठप पड़ा है। परियोजना पर नौ महीने से कार्य ठप रहने के कारण ठेकेदारों के सैकड़ों वाहन खाली खड़े हैं और स्टाफ खाली है। जिले में खनन विभाग की उदासीनता के कारण केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना बाधित हो रही है। परियोजना के मुख्यालय दिल्ली से परियोजना निर्माण में अरसे से आ रही दिक्कतों के संबंध में प्रोजेक्ट मैनेजर कुलदीप कुमार ने डीएम को पत्र भेजा है।
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट रेलवे कॉरिडोर का निर्माण खुर्जा से होकर मुजफ्फरनगर-सहारनपुर होकर पंजाब के अंबाला- शानेवाल तक करीब 1400 किलोमीटर प्रस्तावित है। मिट्टी कार्य में आ रहे व्यवधान से वेस्ट यूपी के अन्य जिलों की अपेक्षा मुजफ्फरनगर में प्रगति फिसड्डी है। कंपनी के अधिकारी जिले में पिछड़ने का कारण खनन विभाग में मिट्टी उठाने की अनुमति के लिए चक्कर काटना बता रहे हैं। विभिन्न आपत्तियां लगाकर महीनों तक मंजूरी नहीं मिल पाने से मिट्टी उठाने का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा। नौ महीनों से हालत बदतर है। एपीएस हाइड्रो कंपनी का तीन महीने से कार्य ठप है। परियोजना का अनुबंध कंपनी एलएंडटी के नाम है। परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार ने अति आवश्यक कार्य में आ रही समस्याओं को हल कराने के लिए डीएम को पत्र भेजा है। प्रोजेक्ट के प्रशासनिक अधिकारी एवं आईआर रमन चौधरी ने बताया इस परियोजना में दो मीटर तक मिट्टी उठाने में कोई रॉयल्टी नहीं है। शासन ने सात दिन के स्थान पर 15 दिन में परमिशन संबंधी समस्याओं का निस्तारण करने का नियम बनाया है। यहां अनुमति नहीं मिलने के कारण करीब नौ महीने से मिट्टी उपलब्ध नहीं होने से परियोजना का कार्य बाधित हो रहा है।
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वेस्ट यूपी में मुजफ्फरनगर की पिछड़ रही प्रगति
ईस्टर्न रेलवे कॉरिडोर परियोजना में खुर्जा से शुरू होकर बुलंदशहर, गाजियाबाद और हापुड़ में मिट्टी कार्य खत्म हो गया। मेरठ में 90 प्रतिशत हो चुका है। जबकि मुजफ्फरनगर में सिर्फ 48 प्रतिशत हो पाया है। मुंबई से मुगलसराय-कोलकाता वाले इस कॉरिडोर को इटावा से टर्न ईस्टर्न कॉरिडोर का नाम दिया गया है। जून 2022 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की मियाद है।
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