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Muzaffarnagar News: बस में महिलाएं है तो बाहर निकलो...हम आग लगा देंगे

Sat, 25 May 2024 04:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2024 04:41 AM IST
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If there are women in the bus, get out...we will set it on fire.
मुजफ्फरनगर। चर्चित रामपुर तिराहा कांड की सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी पत्रावली में चश्मदीद पर्वतीय शिक्षक कर्मचारी संघ पोखरी की सदस्या ने अदालत में कहा कि पुलिस ने ट्रक आड़े तिरछे खड़े कर आंदोलनकारियों की बसें रोक ली थी। महिलाओं को गालियां दी गईं। बचने के लिए हम सीटों के नीचे छिप गई थीं। बस में आग लगाने की धमकी दी गई थी। रात के समय पुलिसकर्मी एक जैसे ही दिख रहे थे, इस वजह से पहचानना मुश्किल है।
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शुक्रवार को अपर जिला जज/विशेष पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-दो के पीठासीन अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने सुनवाई की। उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रवण कुमार ने बताया कि वर्तमान में कर्णप्रयाण के कनौठ से पहुंची 62 साल की चश्मदीद ने बताया कि वह साल 1994 में पर्वतीय शिक्षक कर्मचारी संघ पोखरी की सदस्या थीं। अन्य कर्मचारियों के साथ वह बस में सवार होकर रात के करीब साढ़े 10 बजे रामपुर तिराहा पर पहुंचे थे। पुलिस ने डंडा मारकर उनकी बस में सवार शिवराज सिंह पंवार का सिर फाड़ दिया था।
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पुलिसकर्मियों ने हमारी बस को घेर लिया था। खिड़कियों पर डंडे मारे जा रहे थे। महिलाएं सीटों के नीचे छिप गईं थी। रात के करीब ढाई बजे पुलिस की ओर से धमकी दी गई कि महिलाएं नीचे नहीं उतरी तो बस में आग लगा दी जाएगी।
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इनसेट

यह था मामला

एक अक्तूबर, 1994 की रात अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। इनमें महिला आंदोलनकारी भी शामिल थीं। पुलिसकर्मियों ने रात करीब एक बजे रामपुर तिराहा पर बस रुकवा लीं। आरोप है कि महिला आंदोलनकारियों के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म किया गया। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिसकी सुनवाई चल रही है।

इनसेट
गढ़वाली पुलिसवाले ने दिया भरोसा
चश्मदीद ने यह भी कहा फिर हमें एक गढ़वाली पुलिसवाला मिला। भरोसा दिया कि कुछ नहीं होने देंगे। इसके बाद हमें बस में बैठाकर वापस भेजा गया। तीन अक्तूबर 1994 को हम वापस गोपेश्वर पहुंचे थे।
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