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Muzaffarnagar News: मन स्वस्थ नहीं तो सोचने और कार्य करने की क्षमता पर असर
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-मेरा वजूद फाउंडेशन एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में हुई कार्यशाला
फोटो समेत
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। स्वामी तेजाश्वरानंद ने कहा कि वर्तमान की शिक्षा में विद्यार्थियों की सफलता में स्वस्थ मन और संस्कार की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि मन स्वस्थ नहीं है तो हम मानसिक रूप से बीमार रहते हैं और हमारी सोचने व करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
मेरा वजूद फाउंडेशन एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में विद्यार्थियों की सफलता में स्वस्थ मन एवं संस्कारों की भूमिका पर कार्यशाला का आयोजन लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में किया गया। मुख्य अतिथि डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार श्रीवास, मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं सन्यासी स्वामी तेजाश्वरानंद, समृद्धि त्यागी रहे। वहीं कार्यक्रम अतिथि डॉ. राकेश राणा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अखिलेश शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, सजीव शंकर, पंकज धीमान, प्रवेन्द्र दहिया, प्रेरक जैन रहे। मुख्य वक्ता ने कहा कि संस्कार कठिन विषय होते हुए भी वार्ता के माध्यम से हम सरल बना लेते हैं। शरीर आत्मा का स्वामी होता है।
डीआईओएस ने कहा कि स्वस्थ मन और संस्कारों का महत्व सबसे पहले मां ही देती है। इसके बाद संस्कार विद्यालय और समाज देता है। मेरा वजूद फाउण्डेशन के संरक्षक संजीव शंकर ने अतिथियों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का आभार जताया। संचालन डॉ. रणवीर सिंह ने किया।
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फोटो समेत
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। स्वामी तेजाश्वरानंद ने कहा कि वर्तमान की शिक्षा में विद्यार्थियों की सफलता में स्वस्थ मन और संस्कार की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि मन स्वस्थ नहीं है तो हम मानसिक रूप से बीमार रहते हैं और हमारी सोचने व करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
मेरा वजूद फाउंडेशन एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में विद्यार्थियों की सफलता में स्वस्थ मन एवं संस्कारों की भूमिका पर कार्यशाला का आयोजन लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में किया गया। मुख्य अतिथि डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार श्रीवास, मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं सन्यासी स्वामी तेजाश्वरानंद, समृद्धि त्यागी रहे। वहीं कार्यक्रम अतिथि डॉ. राकेश राणा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अखिलेश शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, सजीव शंकर, पंकज धीमान, प्रवेन्द्र दहिया, प्रेरक जैन रहे। मुख्य वक्ता ने कहा कि संस्कार कठिन विषय होते हुए भी वार्ता के माध्यम से हम सरल बना लेते हैं। शरीर आत्मा का स्वामी होता है।
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डीआईओएस ने कहा कि स्वस्थ मन और संस्कारों का महत्व सबसे पहले मां ही देती है। इसके बाद संस्कार विद्यालय और समाज देता है। मेरा वजूद फाउण्डेशन के संरक्षक संजीव शंकर ने अतिथियों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का आभार जताया। संचालन डॉ. रणवीर सिंह ने किया।
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