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देसी-विदेशी पक्षियों की कलरव से गूंज रहा वेटलैंड
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शानदार नजारा : मुजफ्फरनगर के हैदरपुर वेटलैंड में उड़ान भरते विदेशी पक्षी। फोटो- मनीष कुमार
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। एक साल पहले झाड़ियों से घिरे हैदरपुर वेटलैंड के दिन अब बहुरने लगे हैं। आमजन के लिए अनजान यह स्थान लोगों की पसंदीदा जगह बन रहा है। लोग यहां आकर विदेशी पक्षियों का दीदार कर उनकी प्रजातियों से अवगत हो रहे हैं। हर साल की तरह इन दिनों भी यह स्थान स्थानीय एवं विदेशी पक्षियों कलरव से गूंज रहा है।
अमर उजाला ने तीन जनवरी 2019 के अंक में बिजनौर गंगा बैराज के पास स्थित हैदरपुर वेटलैंड में विदेशी एवं स्थानीय पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी को लेकर खबर प्रकाशित की थी। जेडएसआई देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिल कुमार ने मौके पर पहुंचकर यहां करीब 45 प्रजातियां देखी थीं। अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर सहारनपुर वन संरक्षक वीके जैन ने इस स्थान के विकास का खाका तैयार किया। विश्व वेटलैंड दिवस दो फरवरी को यहां कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंडलायुक्त सहारनपुर संजय कुमार ने यहां वाच हट बनवाने के साथ ही यहां पर बैरियर लगवाने के लिए 25 लाख रुपये जारी कराए। शिकारियों पर निगरानी रखने के लिए एक मोटर बोट भी खरीदी जा रही है। 14 नवंबर को बाल दिवस पर कार्यक्रम कराया गया। इस स्थान का अब पर्यटन स्थल के रूप में विकास होने लगा है। स्थान की जानकारी देने के लिए बड़े बोर्ड लगा दिए गए हैं और फ्लैक्स एवं बोर्ड पर यहां मौजूद पक्षियों के विषय में जानकारी दी गई है। रविवार को भी यहां कई लोग पक्षियों को देखने पहुंचे। इनमें मेरठ के दो परिवारों के अतिरिक्त मीरापुर और बिजनौर के पक्षी प्रेमी शामिल थे।
तीन हजार एकड़ में फैला है वेटलैंड
मुजफ्फरनगर। वन विभाग के अफसरों ने यहां पर प्रवासी व स्थानीय 250 से अधिक के 19500 पक्षियों की गणना की है। वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। वन संरक्षक वीके जैन के अनुसार इस क्षेत्र में 36 डॉल्फिन हैं। घड़ियाल तथा कछुए भी हैं। वेटलैंड करीब 12 हजार हेक्टेयर में फैला है। मंडलायुक्त ने यहां नेचर गाइड की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं।
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4.43 करोड़ से बनेगा बायो डायवर्सिटी पार्क
गंगा बैराज के नजदीक स्थित हैदरपुर वेटलैंड को 4.43 करोड़ रुपये की लागत से बायो डायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाना है। मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर स्थित यह स्थान सर्दिर्यों में विदेशी और स्थानीय पक्षियों से गुलजार रहता है। इसमें वॉच टावर, दो डबल बैरियर चेकपोस्ट, एक इंटरपिटीशन सेंटर, बर्ड वाचर्स के लिए छह प्लेटफार्म, चार आइसलैंड बनाने के साथ ही तथा पौधरोपण किया जाएगा। डीएफओ सूरज का कहना है कि भेजे गए प्रस्ताव पर शासन से मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
यहां मौजूद पक्षियों की प्रमुख प्रजातियां
हैदरपुर वेटलैंड में स्थानीय पक्षियों में ग्रे हेडेड स्वांप हेन, वुली नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन रिवर टर्न, इंडियन ग्रे हॉर्नविल, ओरियंटल डार्टर, इंडियन सिल्वर बिल, इंडियन रोलर, ब्लैक हेडेड आईबिल तथा प्रवासी पक्षियों में रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कॉमन पोचार्ड, व्हाइट टेल्ड लेपविंग, सिट्रिन वैगटेल, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, नार्दर्न शोवलर, करल्यू सैंड पाइपर, ब्लैक हेडेड आइबिस, बार हैडेड गूस, गल बिल्ड टर्न, यूरेशियन करल्यू, ग्रेटर स्पॉटेड, वुड सैंड पाइपर, ब्लैक टेल्ड गाडविट, ब्लू थ्रोट, नार्दर्न पिनटेल, फेरूजिनस डक सहित अन्य कई प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें से कई प्रजातियां तो संकटग्रस्त तथा संकटासन्न हैं।
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अमर उजाला ने तीन जनवरी 2019 के अंक में बिजनौर गंगा बैराज के पास स्थित हैदरपुर वेटलैंड में विदेशी एवं स्थानीय पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी को लेकर खबर प्रकाशित की थी। जेडएसआई देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिल कुमार ने मौके पर पहुंचकर यहां करीब 45 प्रजातियां देखी थीं। अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर सहारनपुर वन संरक्षक वीके जैन ने इस स्थान के विकास का खाका तैयार किया। विश्व वेटलैंड दिवस दो फरवरी को यहां कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंडलायुक्त सहारनपुर संजय कुमार ने यहां वाच हट बनवाने के साथ ही यहां पर बैरियर लगवाने के लिए 25 लाख रुपये जारी कराए। शिकारियों पर निगरानी रखने के लिए एक मोटर बोट भी खरीदी जा रही है। 14 नवंबर को बाल दिवस पर कार्यक्रम कराया गया। इस स्थान का अब पर्यटन स्थल के रूप में विकास होने लगा है। स्थान की जानकारी देने के लिए बड़े बोर्ड लगा दिए गए हैं और फ्लैक्स एवं बोर्ड पर यहां मौजूद पक्षियों के विषय में जानकारी दी गई है। रविवार को भी यहां कई लोग पक्षियों को देखने पहुंचे। इनमें मेरठ के दो परिवारों के अतिरिक्त मीरापुर और बिजनौर के पक्षी प्रेमी शामिल थे।
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तीन हजार एकड़ में फैला है वेटलैंड
मुजफ्फरनगर। वन विभाग के अफसरों ने यहां पर प्रवासी व स्थानीय 250 से अधिक के 19500 पक्षियों की गणना की है। वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। वन संरक्षक वीके जैन के अनुसार इस क्षेत्र में 36 डॉल्फिन हैं। घड़ियाल तथा कछुए भी हैं। वेटलैंड करीब 12 हजार हेक्टेयर में फैला है। मंडलायुक्त ने यहां नेचर गाइड की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं।
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4.43 करोड़ से बनेगा बायो डायवर्सिटी पार्क
गंगा बैराज के नजदीक स्थित हैदरपुर वेटलैंड को 4.43 करोड़ रुपये की लागत से बायो डायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाना है। मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर स्थित यह स्थान सर्दिर्यों में विदेशी और स्थानीय पक्षियों से गुलजार रहता है। इसमें वॉच टावर, दो डबल बैरियर चेकपोस्ट, एक इंटरपिटीशन सेंटर, बर्ड वाचर्स के लिए छह प्लेटफार्म, चार आइसलैंड बनाने के साथ ही तथा पौधरोपण किया जाएगा। डीएफओ सूरज का कहना है कि भेजे गए प्रस्ताव पर शासन से मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
यहां मौजूद पक्षियों की प्रमुख प्रजातियां
हैदरपुर वेटलैंड में स्थानीय पक्षियों में ग्रे हेडेड स्वांप हेन, वुली नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन रिवर टर्न, इंडियन ग्रे हॉर्नविल, ओरियंटल डार्टर, इंडियन सिल्वर बिल, इंडियन रोलर, ब्लैक हेडेड आईबिल तथा प्रवासी पक्षियों में रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कॉमन पोचार्ड, व्हाइट टेल्ड लेपविंग, सिट्रिन वैगटेल, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, नार्दर्न शोवलर, करल्यू सैंड पाइपर, ब्लैक हेडेड आइबिस, बार हैडेड गूस, गल बिल्ड टर्न, यूरेशियन करल्यू, ग्रेटर स्पॉटेड, वुड सैंड पाइपर, ब्लैक टेल्ड गाडविट, ब्लू थ्रोट, नार्दर्न पिनटेल, फेरूजिनस डक सहित अन्य कई प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें से कई प्रजातियां तो संकटग्रस्त तथा संकटासन्न हैं।