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सीमित संसाधनों में कैसे हो कुपोषण से जंग
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पोषण पुर्नवास केन्द्र में बच्चें को पोष्टिक आहर देती महिला।।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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10 बेड ही है जिला अस्पताल स्थित पुनर्वास केंद्र में
3589 बच्चे अति कुपोषित है जिले में
बेड खाली होने के बाद ही दूसरे बच्चे को दी जाती है एंट्री
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल दस बेड हैं। जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या हजारों में हैं। केंद्र पर बहुत ही कम बच्चे आ पाते हैं। केंद्र पर जो बच्चे आते हैं, उनमें कम उम्र में मां बनने वाली और तीन से अधिक संतान उत्पन्न करने वाली महिलाओं के बच्चे अधिक हैं।
अति कुपोषित बच्चों का उपचार कर उन्हें सामान्य श्रेणी में लाने के लिए सरकार ने पोषण पुनर्वास केंद्र खोले हैं। जिला चिकित्सालय में 15 मई 2015 से पोषण पुनर्वास केंद्र चल रहा है। यहां मात्र दस बेड हैं। यहां सिर्फ एक साथ दस बच्चों को ही उपचार के लिए रखा जा सकता है। सात साल में अब तक इस केंद्र में 1300 बच्चों का उपचार हुआ है। जिले में इस समय अति कुपोषित बच्चों की संख्या 3589 है। इस संख्या को देखते हुए बेड कम है। हालात ऐसे है कि बेड खाली होने के बाद ही यहां दूसरे बच्चे को एंट्री दी जाती है।
चार अतिरिक्त बेड दिए गए
केंद्र की आहार विशेषज्ञ नेहा त्यागी का कहना है कि बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार अतिरिक्त बेड सीएमओ ने दिए हैं। ऐसे में हम 14 बच्चों तक को एंट्री दे सकते हैं। संख्या के अनुपात में यह व्यवस्था कम है। एक बच्चा 14 दिन में ठीक होता है। बेड जल्दी खाली भी नहीं हो सकता।
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जिले में 7903 कुपोषित, 3589 अति कुपोषित
जिले में जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 29 हजार 672 हैं। कुपोषित बच्चों की संख्या 7903 हैं, इनमें अति कुपोषित बच्चे 3589 हैं। सैम बच्चों की संख्या 1191 और मैम बच्चों की संख्या 2756 हैं। सैम बच्चे सबसे क्रिटिकल स्थिति के हैं, जिन्हें 14 दिन अस्पताल में रखने की आवश्यकता होती है।
स्तन पान नहीं करा रही महिलाएं
कुपोषित और अति कुपोषित की श्रेणी में जो बच्चे आ रहे हैं, उनमें अधिकतम वही बच्चे हैं जिनकी मां ने स्तनपान नहीं कराया। आहार विशेषण नेहा त्यागी ने बताया कि यदि बच्चे को जन्म के समय से ही मां का दूध पिलाया जाए तो बच्चे के कुपोषित होने की संभावनाएं कम होती है।
माताओं को नहीं मिल रहा संपूर्ण आहार
जिले में गर्भवती महिलाओं को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि कमजोर मां कमजोर बच्चे को जन्म दे रही है।
18 वां बच्चा कुपोषित
शाहपुर क्षेत्र के शौकीन की पत्नी कासिफा के 18 बच्चे हैं। 18वां बच्चा कुपोषित था। पुनर्वास केंद्र पर उसका उपचार चला, जो अब ठीक है। कासिफा के कई बच्चों की शादी हो चुकी है और उनके भी बच्चे हैं।
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3589 बच्चे अति कुपोषित है जिले में
बेड खाली होने के बाद ही दूसरे बच्चे को दी जाती है एंट्री
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल दस बेड हैं। जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या हजारों में हैं। केंद्र पर बहुत ही कम बच्चे आ पाते हैं। केंद्र पर जो बच्चे आते हैं, उनमें कम उम्र में मां बनने वाली और तीन से अधिक संतान उत्पन्न करने वाली महिलाओं के बच्चे अधिक हैं।
अति कुपोषित बच्चों का उपचार कर उन्हें सामान्य श्रेणी में लाने के लिए सरकार ने पोषण पुनर्वास केंद्र खोले हैं। जिला चिकित्सालय में 15 मई 2015 से पोषण पुनर्वास केंद्र चल रहा है। यहां मात्र दस बेड हैं। यहां सिर्फ एक साथ दस बच्चों को ही उपचार के लिए रखा जा सकता है। सात साल में अब तक इस केंद्र में 1300 बच्चों का उपचार हुआ है। जिले में इस समय अति कुपोषित बच्चों की संख्या 3589 है। इस संख्या को देखते हुए बेड कम है। हालात ऐसे है कि बेड खाली होने के बाद ही यहां दूसरे बच्चे को एंट्री दी जाती है।
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चार अतिरिक्त बेड दिए गए
केंद्र की आहार विशेषज्ञ नेहा त्यागी का कहना है कि बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार अतिरिक्त बेड सीएमओ ने दिए हैं। ऐसे में हम 14 बच्चों तक को एंट्री दे सकते हैं। संख्या के अनुपात में यह व्यवस्था कम है। एक बच्चा 14 दिन में ठीक होता है। बेड जल्दी खाली भी नहीं हो सकता।
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जिले में 7903 कुपोषित, 3589 अति कुपोषित
जिले में जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 29 हजार 672 हैं। कुपोषित बच्चों की संख्या 7903 हैं, इनमें अति कुपोषित बच्चे 3589 हैं। सैम बच्चों की संख्या 1191 और मैम बच्चों की संख्या 2756 हैं। सैम बच्चे सबसे क्रिटिकल स्थिति के हैं, जिन्हें 14 दिन अस्पताल में रखने की आवश्यकता होती है।
स्तन पान नहीं करा रही महिलाएं
कुपोषित और अति कुपोषित की श्रेणी में जो बच्चे आ रहे हैं, उनमें अधिकतम वही बच्चे हैं जिनकी मां ने स्तनपान नहीं कराया। आहार विशेषण नेहा त्यागी ने बताया कि यदि बच्चे को जन्म के समय से ही मां का दूध पिलाया जाए तो बच्चे के कुपोषित होने की संभावनाएं कम होती है।
माताओं को नहीं मिल रहा संपूर्ण आहार
जिले में गर्भवती महिलाओं को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि कमजोर मां कमजोर बच्चे को जन्म दे रही है।
18 वां बच्चा कुपोषित
शाहपुर क्षेत्र के शौकीन की पत्नी कासिफा के 18 बच्चे हैं। 18वां बच्चा कुपोषित था। पुनर्वास केंद्र पर उसका उपचार चला, जो अब ठीक है। कासिफा के कई बच्चों की शादी हो चुकी है और उनके भी बच्चे हैं।