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बाजारों में हर्बल रंग और सुगंधित गुलाल की डिमांड
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खतौली में होली के पर्व को लेकर रंग, गुलाल व पिचकारियों से सजी दुकानें।
- फोटो : KHATAULI
बाजारों में हर्बल रंग और सुगंधित गुलाल की डिमांड
खतौली। होली पर्व को लेकर बाजारों में इस बार कोरोना वायरस के भय के चलते चाइना के रंग और पिचकारी देखने को भी नहीं मिली रही। इस बार चीन से कोई माल बाजार में नहीं आया है। देसी रंग, गुलाल और पिचकारी की इस बार रहेगी डिमांड।
होली के पर्व को लेकर बाजार रंग, गुलाल और पिचकारी से गुलजार हो गए हैं। बाजारों में हर्बल रंग व सुगंधित गुलाल की डिमांड ज्यादा है। युवाओं व बच्चों को ऐेसे गुलाल व रंग अधिक भाए हैं। दुकानदार सतीश व राजेश ने बताया कि यह गुलाल व रंग हाथरस से मंगवाया गया है। इसके अलावा पिचकारी और गुब्बारे का माल दिल्ली और मेरठ से लेकर आए हैं। चीन के रंग और पिचकारी इस बार नहीं आई है और न ही वे बाहर का माल खरीदेंगे। होली के पर्व को लेकर महंगे रंग व गुलाल के साथ सस्ते हर्बल रंग व गुलाल की बाजार में डिमांड ज्यादा देखने को मिली है। मोहल्ला गणेशपुरी के राहुल, दीपक, आशु, बंटी, नितिन ने बताया कि हर्बल और सुगंधित गुलाल व रंग से त्वचा को कोई भी नुकसान नहीं होता है। इनके अलावा मोहल्ला जमना विहार, मूलचंद विहार, मिटठूलाल, देवीदास के युवकों ने ऐसे रंगों और गुलाल को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि पानी के पक्के रंगों में केमिकल व कांच मिला हुआ आता है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होता है। मुर्गा छाप के गुलाल व रंग में ना ही कोई केमिकल होता है और यह त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता है। इस रंग को बिना पानी के भी लगाया जाता है, जिससे पानी की भी बचत होती है।
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खतौली। होली पर्व को लेकर बाजारों में इस बार कोरोना वायरस के भय के चलते चाइना के रंग और पिचकारी देखने को भी नहीं मिली रही। इस बार चीन से कोई माल बाजार में नहीं आया है। देसी रंग, गुलाल और पिचकारी की इस बार रहेगी डिमांड।
होली के पर्व को लेकर बाजार रंग, गुलाल और पिचकारी से गुलजार हो गए हैं। बाजारों में हर्बल रंग व सुगंधित गुलाल की डिमांड ज्यादा है। युवाओं व बच्चों को ऐेसे गुलाल व रंग अधिक भाए हैं। दुकानदार सतीश व राजेश ने बताया कि यह गुलाल व रंग हाथरस से मंगवाया गया है। इसके अलावा पिचकारी और गुब्बारे का माल दिल्ली और मेरठ से लेकर आए हैं। चीन के रंग और पिचकारी इस बार नहीं आई है और न ही वे बाहर का माल खरीदेंगे। होली के पर्व को लेकर महंगे रंग व गुलाल के साथ सस्ते हर्बल रंग व गुलाल की बाजार में डिमांड ज्यादा देखने को मिली है। मोहल्ला गणेशपुरी के राहुल, दीपक, आशु, बंटी, नितिन ने बताया कि हर्बल और सुगंधित गुलाल व रंग से त्वचा को कोई भी नुकसान नहीं होता है। इनके अलावा मोहल्ला जमना विहार, मूलचंद विहार, मिटठूलाल, देवीदास के युवकों ने ऐसे रंगों और गुलाल को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि पानी के पक्के रंगों में केमिकल व कांच मिला हुआ आता है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होता है। मुर्गा छाप के गुलाल व रंग में ना ही कोई केमिकल होता है और यह त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता है। इस रंग को बिना पानी के भी लगाया जाता है, जिससे पानी की भी बचत होती है।
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