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जो सत्य से भागता है, उसका भाग्य उससे भाग जाता है-महाराज
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जो सत्य से भागता है, उसका भाग्य उससे भाग जाता है
मोरना। शुकदेव आश्रम के डोगरे भवन में भागवत कथा में अमृत वर्षा करते हुए राम स्नेही संप्रदाय के स्वामी गोविंदराम महाराज ने कहा कि जो सत्य से भागता है, उसका भाग्य उससे भाग जाता है। दुख उस मानव को जकड़ लेते हैं। भक्ति वही जो गरीब असहाय लोगों के लिए की जाए। मानव कल्याण के लिए भागवत अमृतरूपी है, जो इसका स्वाद चखता है। वह इस मोह माया के जंजाल से पार होकर भगवान की शरणागत होकर जीवन को सुधार लेता है।
शुकतीर्थ में जोधपुर राजस्थान राम स्नेही संप्रदाय पीठ रामदाम खेड़ा से पधारे स्वामी गोविंद राम महाराज ने कहा कि दुख भक्ति को पैदा करता है, जो भी मानव दुखों से दूर रहता है, वह भगवान को भूल जाता है। दुखी लोगों पर भगवान जल्दी कृपा करते हैं। भगवान का चिंतन और मनन दुखों का हरण करने में सक्षम है। जो अज्ञानी होते हैं, वह भगवान रूपी मानव संत आदि का अपमान करते हैं, अहंकार विनाश का कारण बनता है। इसलिए ज्ञानी बनो, पर अहंकारी मत बनो। जब कभी भी आप अकेले हो, किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवान का भजन करो। दुखी और असहाय लोगों की सहायता कर सेवा करो, उनमें भगवान का वास होता है। राजस्थान के नागोर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर आदि से काफी संख्या में श्रद्धालु कथा को सुनकर पुण्य कमा रहे हैं।
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मोरना। शुकदेव आश्रम के डोगरे भवन में भागवत कथा में अमृत वर्षा करते हुए राम स्नेही संप्रदाय के स्वामी गोविंदराम महाराज ने कहा कि जो सत्य से भागता है, उसका भाग्य उससे भाग जाता है। दुख उस मानव को जकड़ लेते हैं। भक्ति वही जो गरीब असहाय लोगों के लिए की जाए। मानव कल्याण के लिए भागवत अमृतरूपी है, जो इसका स्वाद चखता है। वह इस मोह माया के जंजाल से पार होकर भगवान की शरणागत होकर जीवन को सुधार लेता है।
शुकतीर्थ में जोधपुर राजस्थान राम स्नेही संप्रदाय पीठ रामदाम खेड़ा से पधारे स्वामी गोविंद राम महाराज ने कहा कि दुख भक्ति को पैदा करता है, जो भी मानव दुखों से दूर रहता है, वह भगवान को भूल जाता है। दुखी लोगों पर भगवान जल्दी कृपा करते हैं। भगवान का चिंतन और मनन दुखों का हरण करने में सक्षम है। जो अज्ञानी होते हैं, वह भगवान रूपी मानव संत आदि का अपमान करते हैं, अहंकार विनाश का कारण बनता है। इसलिए ज्ञानी बनो, पर अहंकारी मत बनो। जब कभी भी आप अकेले हो, किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवान का भजन करो। दुखी और असहाय लोगों की सहायता कर सेवा करो, उनमें भगवान का वास होता है। राजस्थान के नागोर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर आदि से काफी संख्या में श्रद्धालु कथा को सुनकर पुण्य कमा रहे हैं।
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