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बजट की कमी में संतुलित आहार को तरसते हैं गोवंश

Sun, 22 Nov 2020 12:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2020 12:35 AM IST
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Govans crave balanced diet due to lack of budget
चरथावल की बधाई कलां गोशाला में मौजूद गोवंश - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बजट की कमी में संतुलित आहार को तरसते हैं गोवंश
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश की सुरक्षा के लिए प्रदेश में गोशालाओं का निर्माण कराकर बेसहारा पशुओं को आसरा देने के लिए पहल की। बजट में 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पशुपालकों को मिलता है। पशुपालकों का मानना है कि रोजाना एक पशु पर 30 रुपये के बजट में केवल सूखा भूसा मिलता है। ऐसे में भरपेट भोजन नहीं मिलने से गोशालाओं में गोवंश कमजोरी में दम तोड़ रहे हैं। संसाधनों के अभाव में गोवंश की दुर्दशा हो रही है।
बधाई कलां और कसौली में वृहद गोशाला का संचालन मार्च में शुरू हुआ। गोवंश के पालन एवं संवर्धन के लिए प्रधान सचिन मलिक की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। मार्च में यहां बेसहारा घूमने वाले 191 पशु थे, लेकिन कुछ पशुओं ने कमजोरी के चलते दम तोड़ दिया। करीब 50 से ज्यादा पशुओं को गोपालकों को सुपुर्दगी में दे दिया गया। फिलहाल यहां 85 पशु हैं। ग्रामीण संजीव और पिंकी मलिक कहते हैं हरा चारा नहीं मिलने के कारण गोवंशों की दुर्दशा हो रही है। वहीं, चरथावल की गोशाला की दशा भी दयनीय है। निर्धारित बजट में पशुओं को पौष्टिक आहार नहीं मिलता। कमजोरी की वजह से गाय आदि जमीन पर बैठती हैं, तो उठ नहीं पाती। कसौली गोशाला में 80 पशु हैं। पिछले दिनों संसाधनों के अभाव में पशुओं की मौत के कारण हिंदू जागरण मंच के जिला महामंत्री अंकुर राणा ने कार्यकर्ताओं के साथ हंगामा किया था। साथ ही गोवंश की सुरक्षा को उनके स्वास्थ्य की हिफाजत करने के लिए बीडीओ को ज्ञापन दिया था, लेकिन हालात जस के तस हैं। चरथावल के पशुपालक विजेंद्र त्यागी, अमरीश कुमार, यमन कुमार कहते हैं एक पशु के लिए पर्याप्त हरा चारा, चोकर, चना और खल आदि देने में करीब 100 से 150 रुपये प्रतिदिन का खर्च आता है। हालांकि शासन से 30 रुपये का बजट ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है। ब्लॉक में तीन गोशाला होने के बावजूद आवारा गोवंश खेतों में घूमते हैं।
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बधाई कलां के प्रधान सचिन मलिक कहते हैं कि 30 रुपये में संतुलित और अच्छा आहार दिया जाना संभव नहीं है। इसके बावजूद उनका नियमित मेडिकल कराया जाता है। तीन कर्मचारी उनकी सुरक्षा में लगे हैं। माकूल आहार के बिना पशु कमजोर हो जाते हैं।
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चरथावल के पशु चिकित्साधीक्षक डॉ. अमरदीप सिंह कहते हं किै गोशालाओं में टीम नियमित भ्रमण कर पशुओं का चेकअप करती है। हालांकि उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार नहीं मिलने के वजह से गोवंशों का कमजोर और बीमार होना स्वाभाविक हैस, जो पशु दुधारू होता है, उसे ग्रामीण सुपुर्दगी में लेते हैं।
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