मोरना। शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम प्रतीक्षानंद कथा भवन में भागवत कथा सुनाते हुए वृंदावन से पधारे स्वामी हनुमान महाराज ने कहा कि मुक्ति के दो भेद हैं, कर्म मुक्ति और सधोमुक्ति। क्रम मुक्ति का अर्थ है कि जीव एक-एक सीढ़ी चढ़ता हुआ भगवान के प्रति अपने जीवन को समर्पित कर दें।
उन्होंने कहा कि सिद्धि में प्रसिद्धि होती है, भक्ति का फल भगवान है। भगवान की जो सिद्धि करता है, उसमें भगवान की शक्ति आ जाती है। भगवान की शक्ति जिस जीव में आ जाए उसी को सिद्धि कहते हैं। पाप करके कोई सुखी हुआ नहीं, पाप का फल दुख है और पुण्य का फल सुख है। पाप पहले मन में आकर मन को बिगाड़ता है, मन में पाप आए तो स्नान करो या कथा सुनो। मन भले की पाप करें, वाणी में पाप नहीं आना चाहिए। शरीर से काम को त्याग करना सरल ही मगर मन से काम का त्याग करना बड़ा कठिन है। आपका जहां प्रेम है वह आपको याद आता है। प्रेम के लक्षण यह है कि जिसके वियोग में प्राण व्याकुल हो वह प्रेम है। जीव प्रेम से ईश्वर को वश में कर सकता है। परमेश्वर के साथ भक्ति का प्रेम करो, तो जीवन आपने आप सुधर जाएगा। मौके पर वीरेंद्र सिंह सेवानिवृत्त डीएसपी, सुदेश, ईरा, शिप्रा, डा. श्वेता चौधरी आदि मौजूद रहे।

शुकदेव आश्रम में भागवत कथा सुनाते स्वामी हनुमान महाराज।- फोटो : KHATAULI