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Muzaffarnagar News: दरोगा से धक्का-मुक्की में पूर्व विधायक संगीत सोम दोषमुक्त, तीन निजी अंगरक्षकों को सजा
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अदालत से बरी होने के बाद कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के साथ पूर्व विधायक संगीत सोम
- सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई
- तीनों अंगरक्षकों को दो-दो साल की सुनाई गई सजा, जमानत मिली
- एटा, इटावा और मैनपुरी क्षेत्र के रहने वाले है तीनों निजी अंगरक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव 2009 के दौरान यातायात पुलिस के दरोगा के साथ धक्का-मुक्की के मुकदमे में मेरठ के सरधना से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम दोषमुक्त हो गए हैं। अदालत ने उनके निजी तीन अंगरक्षकों को दोषी मानते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई। तीनों को जमानत मिल गई है। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक/विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मयंक जायसवाल ने फैसला सुनाया।
पूर्व विधायक ने मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। टीएसआई हरमीत सिंह ने 17 मार्च 2009 को मुकदमा दर्ज कराया था कि मालवीय चौक के निकट रास्ते में 7-8 गाडि़यां रोककर संगीत सोम और उनके साथी बातचीत कर रहे थे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर गाडि़यां हटाने के लिए कहा। आरोप है कि इस बात से खिन्न होकर हथियारों के बल पर उन्हें सड़क पर गिराकर धक्का-मुक्की की गई। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए एटा के हत्थौड़ा वन निवासी वीरेंद्र, इटावा के सहसापुर निवासी जयपाल सिंह और मैनपुरी निवासी कम्मोद को रिवाल्वर और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने संगीत सोम सहित चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। प्रकरण की सुनवाई विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल और ठाकुर कंवरपाल सिंह ने बताया कि अदालत ने संगीत सोम को दोष मुक्त करार दिया है, जबकि उनके तीनों साथियों को वारदात का दोषी माना है।
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अभियोजन अधिकारी अरविंद भाटी ने बताया कि धारा 332 में तीनों दोषियों को दो-दो साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। धारा 353 में 18-18 माह के कारावास और ढाई-ढाई हजार रुपये का जुर्माना, 7 लॉ क्रिमिनल एक्ट में छह-छह माह की सजा सुनाई गई है। तीनों दोषियों से 22500 रुपये जमा कराने के बाद अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया।
दरोगा ने मुख्य बयान में नहीं लिया संगीत सोम का नाम
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि टीएसआई ने मुख्य बयान में संगीत सोम का नाम नहीं लिया। वादी के हमराह आरक्षी योगेंद्र कुमार ने अदालत में पूरी घटना से इंकार किया। इस बयान का संगीत सोम का फायदा मिला। घटना में वादी को सड़क पर गिराकर मारपीट करने का आरोप उनके तीनों निजी अंग रक्षकों पर था। अदालत ने पुलिस अधिकारी के साथ गाली गलौज और मारपीट करना गंभीर माना।
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- तीनों अंगरक्षकों को दो-दो साल की सुनाई गई सजा, जमानत मिली
- एटा, इटावा और मैनपुरी क्षेत्र के रहने वाले है तीनों निजी अंगरक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव 2009 के दौरान यातायात पुलिस के दरोगा के साथ धक्का-मुक्की के मुकदमे में मेरठ के सरधना से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम दोषमुक्त हो गए हैं। अदालत ने उनके निजी तीन अंगरक्षकों को दोषी मानते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई। तीनों को जमानत मिल गई है। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक/विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मयंक जायसवाल ने फैसला सुनाया।
पूर्व विधायक ने मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। टीएसआई हरमीत सिंह ने 17 मार्च 2009 को मुकदमा दर्ज कराया था कि मालवीय चौक के निकट रास्ते में 7-8 गाडि़यां रोककर संगीत सोम और उनके साथी बातचीत कर रहे थे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर गाडि़यां हटाने के लिए कहा। आरोप है कि इस बात से खिन्न होकर हथियारों के बल पर उन्हें सड़क पर गिराकर धक्का-मुक्की की गई। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए एटा के हत्थौड़ा वन निवासी वीरेंद्र, इटावा के सहसापुर निवासी जयपाल सिंह और मैनपुरी निवासी कम्मोद को रिवाल्वर और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था।
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पुलिस ने संगीत सोम सहित चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। प्रकरण की सुनवाई विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल और ठाकुर कंवरपाल सिंह ने बताया कि अदालत ने संगीत सोम को दोष मुक्त करार दिया है, जबकि उनके तीनों साथियों को वारदात का दोषी माना है।
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अभियोजन अधिकारी अरविंद भाटी ने बताया कि धारा 332 में तीनों दोषियों को दो-दो साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। धारा 353 में 18-18 माह के कारावास और ढाई-ढाई हजार रुपये का जुर्माना, 7 लॉ क्रिमिनल एक्ट में छह-छह माह की सजा सुनाई गई है। तीनों दोषियों से 22500 रुपये जमा कराने के बाद अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया।
दरोगा ने मुख्य बयान में नहीं लिया संगीत सोम का नाम
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि टीएसआई ने मुख्य बयान में संगीत सोम का नाम नहीं लिया। वादी के हमराह आरक्षी योगेंद्र कुमार ने अदालत में पूरी घटना से इंकार किया। इस बयान का संगीत सोम का फायदा मिला। घटना में वादी को सड़क पर गिराकर मारपीट करने का आरोप उनके तीनों निजी अंग रक्षकों पर था। अदालत ने पुलिस अधिकारी के साथ गाली गलौज और मारपीट करना गंभीर माना।