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Muzaffarnagar News: चुनाव हारकर भी बालियान ने दिल्ली में दिखाई ताकत

Thu, 14 Aug 2025 12:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:59 AM IST
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Even after losing the election, Baliyan showed his strength in Delhi
मुजफ्फरनगर। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब नई दिल्ली के चुनाव में सचिव प्रशासन पद पर हार मिली लेकिन 290 वोट हासिल कर बालियान दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में कामयाब रहे। देशभर के सांसदों और पूर्व सांसदों के बीच उन्हें खूब सुर्खियां भी मिली। क्लब का चुनाव पहली बार इतना हाई प्रोफाइल हुआ।
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कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में सचिव पद के लिए अब तक चार बार चुनाव हुए। पहले तीन चुनाव में औसतन 100 के करीब मतदाताओं ने वोट डाले। इस बार रिकॉर्ड 707 मत पड़े, जिनमें 38 सदस्यों ने डाक मत का भी इस्तेमाल किया। मंगलवार देर रात नतीजे घोषित किए गए। भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने 391 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। चुनाव में कुल 1295 मतदाता थे। नामांकन के बाद शुरूआत में रूडी के सामने बालियान को मजबूत दावेदार नहीं माना जा रहा था। लेकिन जिस तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री ने चुनाव लड़ा और उन्हें सांसदों, मंत्रियों ओर पूर्व सांसदों का समर्थन मिला, उससे उनकी पकड़ जाहिर हुई।
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हार की यह मानी जा रही वजह
पूर्व केंद्रीय मंत्री बालियान ने पहली बार चुनाव के लिए नामांकन किया था। पिछले 25 साल से पद पर काबिज रूडी ने अपने नामांकन के दौरान ही 38 पोस्टल बैलेट के वोट दाखिल कर दिए, जबकि बालियान के पक्ष में इनमें से एक भी वोट नहीं आया। नियम को समझने में हुई चूक भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस और सपा खेमे का भाजपा सांसद के पक्ष में रुख होने का नुकसान भी बालियान को उठाना पड़ा। कांग्रेस, सपा, टीएमसी और निर्दलीय सांसदों के पैनल का झुकाव भाजपा सांसद की ओर रहा। ब्यूरो
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पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि क्लब निर्वाचन में प्राप्त जनादेश को मैं धैर्य एवं आत्ममंथन के भाव से स्वीकार करता हूं। संघर्ष की यह परिपाटी यथावत रहेगी, क्योंकि लोकतंत्र में निरंतरता ही असली विजय है।

मेरा वोट होता तो बालियान को देता : मलिक

सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि अगर मेरा वोट होता तो डॉ. संजीव बालियान के पक्ष में जाता। एक ही जिले से होने के नाते वोट उन्हें मिलता। चुनावी राजनीति अलग है, लेकिन बाहर के प्रकरण में अपने जिले और प्रदेश के व्यक्ति की मदद करने का लगाव होता है। बालियान अच्छा चुनाव लड़े, हार-जीत तो भाजपा का आंतरिक मामला है। हमें अच्छा लगता अगर बालियान चुनाव जीत जाते। राजनीति में विरोधी है, लेकिन व्यक्ति दुश्मनी नहीं है।
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