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जौली और रामराज में अनाज से बनेगा इथेनॉल
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जौली और रामराज में अनाज से बनेगा इथेनॉल
मुजफ्फरनगर। वाहनों में जैव ईंधन के तौर पर प्रयोग किए जा रहा इथेनॉल अब शीरे के अलावा गेहूूं और चावल से भी बनेगा। इसके लिए गोदामों में खराब हो जाने वाले अनाज का प्रयोग किया जाएगा। त्रिवेणी ग्रुप ने जौली में अनाज से इथेनॉल बनाने की योजना बनाई है। इसके अलावा रामराज में भी प्लांट के लिए जमीन खरीदी गई है। जिले में अभी तक शीरे से ही इथेनॉल बनाने का काम चीनी मिलें कर रही थी।
इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकतर जगह अभी तक शीरे से ही इथेनॉल तैयार किया जा रहा है। सरकार भी जैव ईंधन को बढ़ावा दे रही है। बायो फ्यूल पर चलने वाले वाहनों को अनिवार्य किए जाने की तैयारी है। जिले में अब इथेनॉल का निर्माण सिर्फ शीरे पर ही निर्भर नहीं रहेगा। त्रिवेणी ग्रुप जौली गांव में इथेनॉल के प्लांट को और अधिक आधुनिक बनाने जा रहा है। गोदामों में खराब हो जाने वाले गेहूं या चावल से भी यहां इथेनॉल बनाया जाएगा। त्रिवेणी ग्रुप के अधिकारी त्रिवेंद्र चौधरी ने पुष्टि करते हुए बताया कि योजना पर काम चल रहा है।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि रामराज क्षेत्र में भी कंपनी ने इथेनॉल बनाने के लिए जमीन खरीदी है। दोनों जगह गेहूं और चावल से इथेनॉल बनाने का कार्य किया जाएगा, जिसका जिले को भी लाभ मिलेगा।
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इनसेट
पर्यावरण की सुरक्षा करता है इथेनॉल
इथेनॉल से पर्यावरण की सुरक्षा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल में ऑक्सीजन की अधिकता होती है। इसे इको-फ्रेंडली ईंधन माना जाता है।
इनसेट
इथेनॉल के निर्माण को बढ़ावा दे रही सरकार
केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले बायो फ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दी थी। समिति के सदस्य रहे केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि इथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैव ईंधन से पर्यावरण सुरक्षित रहता है। 2014 से अब तक सरकार ने इथेनॉल का उत्पादन दो से करीब 10 फीसदी कर दिया है। 2025 तक इसे करीब 25 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है।
गोदामों में खराब होने वाले खाद्यान्न का प्रयोग
सरकारी गोदामों में प्रत्येक वर्ष खराब होने वाले चावल और गेहूं का प्रयोग इथेनॉल बनाने में किया जाएगा। इससे अनाज का सदुपयोग होगा। इसके अलावा इंडस्ट्री संचालक सीधे किसानों से भी खरीद कर सकते हैं। किसानों के पास भी अपनी फसल को बेचने का विकल्प रहेगा।
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मुजफ्फरनगर। वाहनों में जैव ईंधन के तौर पर प्रयोग किए जा रहा इथेनॉल अब शीरे के अलावा गेहूूं और चावल से भी बनेगा। इसके लिए गोदामों में खराब हो जाने वाले अनाज का प्रयोग किया जाएगा। त्रिवेणी ग्रुप ने जौली में अनाज से इथेनॉल बनाने की योजना बनाई है। इसके अलावा रामराज में भी प्लांट के लिए जमीन खरीदी गई है। जिले में अभी तक शीरे से ही इथेनॉल बनाने का काम चीनी मिलें कर रही थी।
इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकतर जगह अभी तक शीरे से ही इथेनॉल तैयार किया जा रहा है। सरकार भी जैव ईंधन को बढ़ावा दे रही है। बायो फ्यूल पर चलने वाले वाहनों को अनिवार्य किए जाने की तैयारी है। जिले में अब इथेनॉल का निर्माण सिर्फ शीरे पर ही निर्भर नहीं रहेगा। त्रिवेणी ग्रुप जौली गांव में इथेनॉल के प्लांट को और अधिक आधुनिक बनाने जा रहा है। गोदामों में खराब हो जाने वाले गेहूं या चावल से भी यहां इथेनॉल बनाया जाएगा। त्रिवेणी ग्रुप के अधिकारी त्रिवेंद्र चौधरी ने पुष्टि करते हुए बताया कि योजना पर काम चल रहा है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि रामराज क्षेत्र में भी कंपनी ने इथेनॉल बनाने के लिए जमीन खरीदी है। दोनों जगह गेहूं और चावल से इथेनॉल बनाने का कार्य किया जाएगा, जिसका जिले को भी लाभ मिलेगा।
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पर्यावरण की सुरक्षा करता है इथेनॉल
इथेनॉल से पर्यावरण की सुरक्षा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल में ऑक्सीजन की अधिकता होती है। इसे इको-फ्रेंडली ईंधन माना जाता है।
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इथेनॉल के निर्माण को बढ़ावा दे रही सरकार
केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले बायो फ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दी थी। समिति के सदस्य रहे केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि इथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैव ईंधन से पर्यावरण सुरक्षित रहता है। 2014 से अब तक सरकार ने इथेनॉल का उत्पादन दो से करीब 10 फीसदी कर दिया है। 2025 तक इसे करीब 25 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है।
गोदामों में खराब होने वाले खाद्यान्न का प्रयोग
सरकारी गोदामों में प्रत्येक वर्ष खराब होने वाले चावल और गेहूं का प्रयोग इथेनॉल बनाने में किया जाएगा। इससे अनाज का सदुपयोग होगा। इसके अलावा इंडस्ट्री संचालक सीधे किसानों से भी खरीद कर सकते हैं। किसानों के पास भी अपनी फसल को बेचने का विकल्प रहेगा।