{"_id":"5f679f3c8ebc3e97fa05b8fb","slug":"dynasty-poses-a-threat-to-life-and-property-on-the-highway-muzaffarnagar-news-mrt5023025163","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईवे पर जानमाल का खतरा बने गोवंश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे पर जानमाल का खतरा बने गोवंश
विज्ञापन
हाईवे पर जानमाल का खतरा बने गोवंश
बुढ़ाना। गोवंश की खरीद-फरोख्त नहीं होने के कारण पशु पालक उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। लावारिस गोमाता व गौवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। लावारिस गोवंश हाईवे पर दुर्घटनाओं को बुलावा दे रहे हैं। बड़े वाहनों की टक्कर से गोवंश भी मौत का शिकार हो रहे हैं। देेहातों में किसानों व पशुपालकों का गाय व उसके वंश को पालना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत का कहना है कि यह विदेशी नस्ल का दुधारू पशु है। देशी नस्ल की गाय व उनके बछड़े हमारे लिए आज भी पूजनीय हैं। विदेशी नस्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे हैं। फुगाना गांव के प्रगतिशील किसान चौ. मुकेश मलिक का कहना है कि सरकार को लावारिस गोवंश के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। लावारिस गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। कई आवारा पशु तो खेतों से बाहर निकाले जाने पर किसान पर हमला करते हैं।
जौला गांव के किसान हाजी जमशेद का कहना है कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण गोवंश लावारिस घूमने को मजबूर हो गए हैं। खरड़ गांव के रालोद नेता रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी का कहना है कि गोवंश अथवा गोमाता की हत्या करना गलत है।
विज्ञापन
लावारिस गोवंश के लिए पूरे ब्लॉक में अस्थायी आश्रय स्थल की व्यवस्था की गई है। बुढ़ाना ब्लॉक में फतेहपुरखेड़ी व अटाली गांव में अस्थायी आश्रय स्थल का निर्माण करवाया गया है। यह दोनों स्थान बहुत कम क्षमता के हैं। कस्बे में बनी कान्हा गोशाला व बेसहारा पशुआश्रय शहरी क्षेत्र के लिए है। इस गोशाला की क्षमता करीब 150 पशुओं की है। वर्तमान में कस्बे की गोशाला में करीब 170 की संख्या में गौवंश है। इनके पूरे वर्ष के चारे के लिए विभिन्न संसाधनों से भूसे का स्टाक कर लिया गया है। - अधिशासी अधिकारी ओमगिरी
विज्ञापन
बुढ़ाना। गोवंश की खरीद-फरोख्त नहीं होने के कारण पशु पालक उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। लावारिस गोमाता व गौवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। लावारिस गोवंश हाईवे पर दुर्घटनाओं को बुलावा दे रहे हैं। बड़े वाहनों की टक्कर से गोवंश भी मौत का शिकार हो रहे हैं। देेहातों में किसानों व पशुपालकों का गाय व उसके वंश को पालना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत का कहना है कि यह विदेशी नस्ल का दुधारू पशु है। देशी नस्ल की गाय व उनके बछड़े हमारे लिए आज भी पूजनीय हैं। विदेशी नस्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे हैं। फुगाना गांव के प्रगतिशील किसान चौ. मुकेश मलिक का कहना है कि सरकार को लावारिस गोवंश के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। लावारिस गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। कई आवारा पशु तो खेतों से बाहर निकाले जाने पर किसान पर हमला करते हैं।
विज्ञापन
जौला गांव के किसान हाजी जमशेद का कहना है कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण गोवंश लावारिस घूमने को मजबूर हो गए हैं। खरड़ गांव के रालोद नेता रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी का कहना है कि गोवंश अथवा गोमाता की हत्या करना गलत है।
विज्ञापन
लावारिस गोवंश के लिए पूरे ब्लॉक में अस्थायी आश्रय स्थल की व्यवस्था की गई है। बुढ़ाना ब्लॉक में फतेहपुरखेड़ी व अटाली गांव में अस्थायी आश्रय स्थल का निर्माण करवाया गया है। यह दोनों स्थान बहुत कम क्षमता के हैं। कस्बे में बनी कान्हा गोशाला व बेसहारा पशुआश्रय शहरी क्षेत्र के लिए है। इस गोशाला की क्षमता करीब 150 पशुओं की है। वर्तमान में कस्बे की गोशाला में करीब 170 की संख्या में गौवंश है। इनके पूरे वर्ष के चारे के लिए विभिन्न संसाधनों से भूसे का स्टाक कर लिया गया है। - अधिशासी अधिकारी ओमगिरी