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Muzaffarnagar News: हमलावर हो रहे कुत्ते और बंदर, 150 पर पहुंची ओपीडी
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-शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिला चिकित्सालय में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना 150 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
शहर में जगह-जगह आवारा कुत्तों का भय है। रोजाना 150 के करीब मरीज पहुंचकर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाते हैं। जिला चिकित्सालय में तैनात फिजिशियन डॉ. बाबूराम का कहना है कि कुत्ते या फिर किसी अन्य जानवर के काटने को कतई भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। गली मोहल्ले के साथ-साथ पालतू कुत्ते का काटना भी उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है। कुछ लोग पालूत कुत्ते को रैबीज का इंजेक्शन नहीं लगवाते है, जो बेहद जरूरी है। जंगलों के जानवरों का काटना बेहद खतरनाक होता है, उसमें कतई भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अगर जंगल में रहने वाला कोई चूहा भी काटता है, तो तुरंत एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
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इनसेट
काटने के बाद घाव को साबुन से धोएं
फिजिशियन डॉ. बाबूराम का कहना है कि अगर कोई जानवर काट लेता है और घाव हो जाता है, तो उसे चलते हुए पानी से लगातार करीब 10-15 मिनट तक धोना चाहिए। टंकी चलाकर उसका पानी घाव पर चलाते रहें। इसके साथ साबुन से भी धोते रहें। इसके बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
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इनसेट
लाइलाज है रैबीज, पूरे लगवाएं इंजेक्शन
फिजिशियन डॉ. बाबूराम ने बताया कि रैबीज बीमारी लाइलाज है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर किसी को कुत्ता या कोई अन्य जानवर काटता है तो उसे पूरे इंजेक्शन लगवाने चाहिएं। कोई-कोई बीच में ही इंजेक्शन छोड़ देता है। ऐसे में रैबीज हो जाता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। पहले ही सतर्कता बरतें।
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इनसेट
घाव पर टांके और पट्टी ना बांधे
कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर कभी भी घाव पर टांके नहीं लगवाने चाहिएं, न ही पट्टी बांधनी चाहिए। अगर ज्यादा खून बह रहा है, तो चिकित्सक को दिखाएं, वह अपने हिसाब से उसका इलाज करेगा। डॉ. बाबूराम ने बताया कि रैबीज का वायरस नशों के माध्यम से फैलता है। सिर और उसके आसपास काटने पर यह खतरनाक होता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिला चिकित्सालय में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना 150 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
शहर में जगह-जगह आवारा कुत्तों का भय है। रोजाना 150 के करीब मरीज पहुंचकर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाते हैं। जिला चिकित्सालय में तैनात फिजिशियन डॉ. बाबूराम का कहना है कि कुत्ते या फिर किसी अन्य जानवर के काटने को कतई भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। गली मोहल्ले के साथ-साथ पालतू कुत्ते का काटना भी उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है। कुछ लोग पालूत कुत्ते को रैबीज का इंजेक्शन नहीं लगवाते है, जो बेहद जरूरी है। जंगलों के जानवरों का काटना बेहद खतरनाक होता है, उसमें कतई भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अगर जंगल में रहने वाला कोई चूहा भी काटता है, तो तुरंत एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
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काटने के बाद घाव को साबुन से धोएं
फिजिशियन डॉ. बाबूराम का कहना है कि अगर कोई जानवर काट लेता है और घाव हो जाता है, तो उसे चलते हुए पानी से लगातार करीब 10-15 मिनट तक धोना चाहिए। टंकी चलाकर उसका पानी घाव पर चलाते रहें। इसके साथ साबुन से भी धोते रहें। इसके बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
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लाइलाज है रैबीज, पूरे लगवाएं इंजेक्शन
फिजिशियन डॉ. बाबूराम ने बताया कि रैबीज बीमारी लाइलाज है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर किसी को कुत्ता या कोई अन्य जानवर काटता है तो उसे पूरे इंजेक्शन लगवाने चाहिएं। कोई-कोई बीच में ही इंजेक्शन छोड़ देता है। ऐसे में रैबीज हो जाता है, जिसका कोई इलाज नहीं है। पहले ही सतर्कता बरतें।
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घाव पर टांके और पट्टी ना बांधे
कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर कभी भी घाव पर टांके नहीं लगवाने चाहिएं, न ही पट्टी बांधनी चाहिए। अगर ज्यादा खून बह रहा है, तो चिकित्सक को दिखाएं, वह अपने हिसाब से उसका इलाज करेगा। डॉ. बाबूराम ने बताया कि रैबीज का वायरस नशों के माध्यम से फैलता है। सिर और उसके आसपास काटने पर यह खतरनाक होता है।