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सस्ते इलाज पर डॉक्टरों की मनमानी भारी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:12 AM IST
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महिला अस्पताल में नवजात बच्चे के साथ बैठे दंपति।
- फोटो : अमर उजाला
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शासन के सस्ते इलाज के दावों पर डॉक्टरों की मनमानी भारी पड़ रही है। जिला महिला चिकित्सालय में मरीजों और तीमारदारों का आर्थिक शोषण हो रहा है। चिकित्सक मरीजों के लिए बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एक रुपये में जांच और दवाईयां तक मुहैय्या कराने के आदेश हैं, मगर जिला महिला चिकित्सालय में ऐसा नहीं है। चिकित्सालय से मरीजों को कुछ ही दवाईयां दी जा रही हैं। कमीशन के खेल में चिकित्सक रजिस्टर्ड पर्चे से अतिरिक्त पर्ची पर दवाईयां लिखकर दे रहे हैं। जिसे खरीदने के लिए मरीजों और तीमारदारों पर बोझ पड़ रहा है। यह सब चिकित्सालय में आम हो गया है, लेकिन अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साध रखी है।
ऑपरेशन के नाम पर वसूली
मुजफ्फरनगर। महिला चिकित्सालय में डिलीवरी होने वाली महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभ मिलता है। इनमें आशा के जरिये ग्रामीण स्तर की महिला को 1400 रुपये का चेक मिलता है। शहरी क्षेत्र की महिला को एक हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन जिला महिला चिकित्सालय में तीमारदारों से वसूली की जा रही है। तीमारदारों का आरोप है कि चिकित्सालय का स्टॉफ अवैध उगाही करके की चेक देता है। स्टॉफ वाले कमीशन के रूप में 200 तक रुपये ले लेते हैं।
बेड की चादरें और गद्दे फटे-पुराने
महिला जिला चिकित्सालय में सबसे अधिक बेड महिला जच्चाओं के लिए हैं। इन दिनों अस्पताल में कोई बेड खाली नहीं है। ठंड का प्रकोप बढने के बाद भी अस्पताल प्रबंध तंत्र नहीं जागा है। अमर उजाला टीम ने पाया कि कई बेड़ पर चादरें भी पुरानी थीं और गद्दे भी फटे पड़े थे। ऐसे में महिला मरीज ठंड में इन्हीं बेड पर लेटने को मजबूर हैं।
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अल्ट्रासाउंड केंद्र का बुरा हाल
महिला जिला चिकित्सालय में बुधवार को अल्ट्रासाउंड केंद्र पर सबसे अधिक भीड़ रही। गर्भवती महिलाओं से लेकर सामान्य पीड़िता सुबह से ही लाइन में लग गईं, लेकिन दोपहर तक भी नंबर नहीं आ सका। इसके पीछे कारण अस्पताल में व्यवस्था कम होना है। सिंगल मशीन अल्ट्रासाउंड की है। इस पर ही जिले और आसपास के मरीज निर्भर हैं।
किदवाई नगर निवासी शाहिद ने बताया कि उसकी पत्नी की डिलीवरी अस्पताल में ही हुई है, लेकिन ऑपरेशन के नाम पर उससे एक हजार रुपये मांगे गए। नोटबंदी की दुहाई देकर 700 रुपये देकर बात बन सकी।
खतौली के इस्लामनगर निवासी दिव्यांग शेरद्दीन ने बताया कि उसकी पत्नी को ऑपरेशन से बच्चा हुआ, लेकिन अस्पताल में सही से उपचार न मिलने पर बच्चे के पेट में गंदा पानी चला गया। जिसे प्राइवेट चिकित्सक के यहां भर्ती कराया, मगर बच्चे की जान नहीं बच सकी।
पत्नी अभी अस्पताल में भर्ती है। महिला अस्पताल में ही डॉक्टरों को दिखाने आई खालापार की रुकैय्या ने ओपीडी पर्चा और एक अन्य पर्ची दिखाते हुए बताया कि डॉक्टर ने कुछ दवाई बाहर मेडिकल स्टोर से लेने की बात कह कर पर्ची उन्हें दी है, हां कुछ दवा जरुर अस्पताल में मिली है, बाकी को मेडिकल स्टोर से लाना उसकी मजबूरी है।
शोषण हो रहा तो शिकायतें करें
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने बताया कि अस्पताल में सब सही है, किसी प्रकार को कोई शोषण नहीं हो रहा है, यदि ऐसा कोई मामला है तो संबंधित लोगों को शिकायत करनी चाहिए, ताकि कार्रवाई की जा सके।
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ऑपरेशन के नाम पर वसूली
मुजफ्फरनगर। महिला चिकित्सालय में डिलीवरी होने वाली महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभ मिलता है। इनमें आशा के जरिये ग्रामीण स्तर की महिला को 1400 रुपये का चेक मिलता है। शहरी क्षेत्र की महिला को एक हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन जिला महिला चिकित्सालय में तीमारदारों से वसूली की जा रही है। तीमारदारों का आरोप है कि चिकित्सालय का स्टॉफ अवैध उगाही करके की चेक देता है। स्टॉफ वाले कमीशन के रूप में 200 तक रुपये ले लेते हैं।
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बेड की चादरें और गद्दे फटे-पुराने
महिला जिला चिकित्सालय में सबसे अधिक बेड महिला जच्चाओं के लिए हैं। इन दिनों अस्पताल में कोई बेड खाली नहीं है। ठंड का प्रकोप बढने के बाद भी अस्पताल प्रबंध तंत्र नहीं जागा है। अमर उजाला टीम ने पाया कि कई बेड़ पर चादरें भी पुरानी थीं और गद्दे भी फटे पड़े थे। ऐसे में महिला मरीज ठंड में इन्हीं बेड पर लेटने को मजबूर हैं।
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अल्ट्रासाउंड केंद्र का बुरा हाल
महिला जिला चिकित्सालय में बुधवार को अल्ट्रासाउंड केंद्र पर सबसे अधिक भीड़ रही। गर्भवती महिलाओं से लेकर सामान्य पीड़िता सुबह से ही लाइन में लग गईं, लेकिन दोपहर तक भी नंबर नहीं आ सका। इसके पीछे कारण अस्पताल में व्यवस्था कम होना है। सिंगल मशीन अल्ट्रासाउंड की है। इस पर ही जिले और आसपास के मरीज निर्भर हैं।
किदवाई नगर निवासी शाहिद ने बताया कि उसकी पत्नी की डिलीवरी अस्पताल में ही हुई है, लेकिन ऑपरेशन के नाम पर उससे एक हजार रुपये मांगे गए। नोटबंदी की दुहाई देकर 700 रुपये देकर बात बन सकी।
खतौली के इस्लामनगर निवासी दिव्यांग शेरद्दीन ने बताया कि उसकी पत्नी को ऑपरेशन से बच्चा हुआ, लेकिन अस्पताल में सही से उपचार न मिलने पर बच्चे के पेट में गंदा पानी चला गया। जिसे प्राइवेट चिकित्सक के यहां भर्ती कराया, मगर बच्चे की जान नहीं बच सकी।
पत्नी अभी अस्पताल में भर्ती है। महिला अस्पताल में ही डॉक्टरों को दिखाने आई खालापार की रुकैय्या ने ओपीडी पर्चा और एक अन्य पर्ची दिखाते हुए बताया कि डॉक्टर ने कुछ दवाई बाहर मेडिकल स्टोर से लेने की बात कह कर पर्ची उन्हें दी है, हां कुछ दवा जरुर अस्पताल में मिली है, बाकी को मेडिकल स्टोर से लाना उसकी मजबूरी है।
शोषण हो रहा तो शिकायतें करें
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने बताया कि अस्पताल में सब सही है, किसी प्रकार को कोई शोषण नहीं हो रहा है, यदि ऐसा कोई मामला है तो संबंधित लोगों को शिकायत करनी चाहिए, ताकि कार्रवाई की जा सके।