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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Deepak sentenced to death for the murder of Home Guard Ratiram during the COVID-19 period.

Muzaffarnagar News: कोरोना काल में होमगार्ड रतिराम की हत्या के दोषी दीपक को फांसी

Fri, 03 Jul 2026 01:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 01:17 AM IST
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Deepak sentenced to death for the murder of Home Guard Ratiram during the COVID-19 period.
रतिराम, होमगार्ड फाइल फोटो - फोटो : 1
- बुढ़ाना मोड पर छह साल पहले छुरी घोंपकर कर दी गई थी हत्या
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मुजफ्फरनगर। छह साल पहले कोरोना काल में शहर कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ाना मोड़ पर होमगार्ड रतिराम (51) के पेट में छुरी घोंपकर हत्या के मामले में अदालत ने दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। अदालत ने 55 पेज के फैसले में अमेरिका के टैक्साॅस में आठ साल पहले घरेलू विवाद निपटाने गए पुलिस अधिकारी डेविड सेरार्ड की इसी अंदाज में हत्या और दोषी को सजा-ए-मौत का जिक्र भी किया है।
बुढ़ाना मोड पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल इस्लाम और लकड़संधा निवासी होमगार्ड रतिराम कोरोना काल में चार जून 2020 को बाइक पर सवार होकर रात करीब सवा दस बजे गश्त कर रहे थे। डीलर वाली गली के मकान से महिला के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
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प्रकरण जानने के लिए दोनों मकान के अंदर पहुंचे, यहां दीपक और उसकी मां राजबाला के बीच झगड़ा चल रहा था। पुलिस देखते ही दीपक हमलावर हो गया और रतिराम के पेट में छुरी मारकर मौके से भाग गया। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे मेरठ रेफर कर दिया गया।
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आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने अगले दिन दीपक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, बाद में उसे जमानत मिल गई थी। मेरठ में चार अक्तूबर 2020 को उपचार के दौरान होमगार्ड की मौत हो गई। मृतक के बेटे अर्जुन की तहरीर पर पुलिस ने जानलेवा हमले को हत्या की धाराओं में तरमीम किया।
अलग-अलग दो आरोपपत्र दाखिल किए गए। दोनों पत्रावलियों की एक साथ सुनवाई हुई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में 25 जून को अभियुक्त पर दोष सिद्ध हुआ। बृहस्पतिवार को दोषी को मृत्युदंड और 1.20 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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फैसले का हर शब्द...विश्वास की पुनर्स्थापना : अदालत
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में लिखा वर्दी केवल वस्त्र नहीं है, बल्कि संविधान में सौंपे गए उत्तरदायित्व का प्रतीक है। वर्दी पर हमला शासन को चुनौती देने का दुस्साहस है। जब कानून का रक्षक अपने कर्तव्य पथ पर प्राण न्यौछावर करता है, तब न्यायालय के निर्णय का प्रत्येक शब्द केवल मुकदमे का निर्णय नहीं होता है, बल्कि समाज के कानून पर विश्वास की पुनर्स्थापना भी होता है। समाज निश्चित होकर इसलिए सोता है, क्योंकि कोई प्रहरी जाग रहा होता है। प्रहरी की हत्या केवल एक जीवन का अंत नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक सुरक्षा पर प्रहार है।

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फैसला : सतयुग से कलियुग तक, दो कविता...दो कहानी
होमगार्ड की हत्या में 55 पेज के फैसले पर न्यायालय ने दो कविताओं के जरिये दर्द उकेरा। सतयुग से कलियुग तक रिश्तों की गरिमा याद दिलाई। भगवान श्रीराम, माता कैकेयी, भगवान गणेश का उदाहरण दिया। वर्तमान समाज की दिशा, पुलिस की जिम्मेदारी और छवि का चित्र भी उदाहरण के साथ खींचा। यह भी लिखा कि न्याय के रथ को आगे बढ़ाने के लिए कार्यपालिका का हिस्सा पुलिस और न्यायपालिका को एक ही दिशा में चलना होता है।
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