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मां-बेटे के तीन हत्यारों को उम्रकैद, सजा पाने वालों में पति-पत्नी और बेटा शामिल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 18 Nov 2017 12:00 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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एफटीसी-2 ने मीरापुर के सिखरेड़ा गांव में पानी के विवाद में हुई मां-बेटे की हत्या के मामले में दंपति समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव सिखरेड़ा में 28 मई 2007 को यह डबल मर्डर हुआ था। जिले सिंह ने अपने छोटे भाई राजवीर सिंह, उसकी पत्नी माया और भतीजे दीपक के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
बताया था कि दोनों भाइयों के बीच जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। घटना के दिन शाम को वह परिजनों के साथ साझे की ट्यूबवेल से खेत पर पानी चला रहा था। तभी राजवीर अपने बेटे दीपक और पत्नी माया के साथ आया। उनका पानी बंद कर दिया, विरोध करने पर राजवीर पक्ष ने लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कर जिले सिंह की पत्नी विद्या और बेटे राना की गोली मार कर हत्या कर दी। फायरिंग में जिले सिंह के दो बेटे इलम सिंह और भीष्म सिंह भी घायल हुए।
पुलिस ने हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो बाद में जमानत पर छूट गए थे। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे पूनम राजपूत की अदालत एफटीसी-2 में हुई। एडीजीसी रीतू चौधरी ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए राजवीर, उसकी पत्नी माया और बेटे दीपक को दोषी कराते देते हुए धारा 302 में तीनों को आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 307 में दस-दस वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया।
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बताया था कि दोनों भाइयों के बीच जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। घटना के दिन शाम को वह परिजनों के साथ साझे की ट्यूबवेल से खेत पर पानी चला रहा था। तभी राजवीर अपने बेटे दीपक और पत्नी माया के साथ आया। उनका पानी बंद कर दिया, विरोध करने पर राजवीर पक्ष ने लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कर जिले सिंह की पत्नी विद्या और बेटे राना की गोली मार कर हत्या कर दी। फायरिंग में जिले सिंह के दो बेटे इलम सिंह और भीष्म सिंह भी घायल हुए।
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पुलिस ने हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो बाद में जमानत पर छूट गए थे। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे पूनम राजपूत की अदालत एफटीसी-2 में हुई। एडीजीसी रीतू चौधरी ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए राजवीर, उसकी पत्नी माया और बेटे दीपक को दोषी कराते देते हुए धारा 302 में तीनों को आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 307 में दस-दस वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया।
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