{"_id":"1a5da4f6d19e5d87dd3bfe0b5fd7d01c","slug":"the-family-remained-sympathetic-killer-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर का चिराग बुझा, परिवार का हमदर्द बना रहा हत्यारा ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
घर का चिराग बुझा, परिवार का हमदर्द बना रहा हत्यारा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 18 Sep 2015 12:09 AM IST
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। घर के इकलौते चिराग को बुझाकर ,पड़ौसी हत्यारा विपुल परिवार वालों का हमदर्द बना रहा। परिवार वालों के साथ लक्ष्य की तलाश में जुटा रहा। सांत्वना देता रहा, लेकिन उनके द्वारा छोड़े गए सुराग से ही पुलिस उस तक पहुंच गई और इस केस का खुलासा कर दिया।
इंदिरा कालोनी में रहने वाले शिक्षा विभाग के लिपिक अरविंद शर्मा का 11 साल का बेटा लक्ष्य छह सितंबर को अचानक घर के बाहर से लापता हो गया था। दस दिन बाद बुधवार को बागोवाली गांव के जंगल से मासूम लक्ष्य की गली -सड़ी लाश बरामद हुई थी।
पुलिस ने इस घटना की पड़ताल के बाद अरविंद के पड़ौसी विपुल सैनी, गाजावाली निवासी पंकज प्रजापति और अलमासपुर निवासी दलित युवक कपिल को गिरफ्तार कर इस केस का खुलासा कर दिया था। बकौल पुलिस, पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें आई।
विज्ञापन
बकौल पुलिस अरविंद के पड़ौसी विपुल वारदात को अंजाम देने के बाद भी परिवार के लोगों के साथ मिलकर विपुल को तलाशने का ढोंग करता रहा। वह अरविंद के घर आने वाले मेहमानों को पानी पिलाने के साथ उन्हें दिलासा भी देता था।
लक्ष्य के परिजनों को उसपर इस हद तक विश्वास था कि जब जांच पड़ताल में शक के आधार पर पुलिस ने विपुल को पकड़ा तो खुद लक्ष्य के परिजनों ने ही इस पर एतराज जताया था और पुलिस से कहा था कि विपुल ऐसा नहीं कर सकता।
पुलिस के अनुसार कातिलों ने वारदात को बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया, लेकिन एक सुराग ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस के अनुसार हत्या के तीसरे दिन तीनों ही कातिल रात के समय लाश पर नमक डालने गए थे।
इनका प्लान था कि यदि लाश को गड्ढे में दबाकर उसपर नमक डाल दिया जाएगा, तो लाश कुछ ही दिनों में गल जाएगी। इसके लिए वह एक नमक का बैग और फावड़ा लेकर भी गए थे। उसी दिन रात में खेत पर पानी चलाने गया एक किसान भी मौजूद था, जिसे देखकर तीनों आरोपी नमक का बैग और फावड़ा छोड़कर भाग गए। पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो पुलिस ने छानबीन की।
डर के कारण विपुल घर से गायब हो गया, जिस पर विपुल पर पुलिस का शक गया और वह उसके पीछे लग गई और उसे दबोच लिया। विपुल ने पूछताछ में हत्या का पूरा घटनाक्रम ,खोल दिया और तीनों आरोपी धरे गए।
विपुल ने कभी दुकान नहीं मांगी : दादा
मुजफ्फरनगर। इस हत्याकांड में विपुल के पकड़े जाने पर मृतक छात्र के दादा रिटायर्ड अध्यापक श्यामलाल शर्मा हैरत में हैं। आंसू पोंछते हुए कहते हैं कि विपुल का परिवार 30 साल से उनका पड़ोसी है। वह हर तरह से इस परिवार की मदद करते हैं। विपुल की शादी में भी वह उसकी बारात में गए थे।
दुकान के विवाद की बात को नकारते हुए कहा कि आरोपी ने कभी उनसे दुकान नही मांगी। थाने में विपुल ने बताया कि उसने कई बार दुकान किराए पर मांगी लेकिन उन्हें दुकान ना देकर मोहल्ले के ही मोंटी को देने की वजह से उसने परिवार से बदला लेने की ठान ली थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
वीडियो गेम खेलने के बहाने ले गया था
मुजफ्फरनगर। एसएफ डीएवी पब्लिक स्कूल के कक्षा पांच के छात्र लक्ष्य का वीडियो गेम का शौक मौत का कारण बन गया। आरोपी विपुल के अनुसार छह सितंबर की शाम लक्ष्य गली में साइकिल चला रहा था। उसने उसे वीडियो गेम खिलाने की बात कहकर अपने साथ चलने का कहा।
तुरंत की वह उसके साथ चल दिया। कच्ची सड़क पर पंकज की दुकान पर जाकर उसने कुछ ही देर बाद लक्ष्य की गला घोंटकर हत्या कर दी। मुख्य आरोपी का कहना है कि बाकी के सभी आरोपियों ने यारी दोस्ती में उसका साथ दिया है। बाद में रात के समय एक बोरी में शव को ठूंसकर उसे बागो वाली के पास एक खेत में डाल आए।
आरोपी के घर तोड़फोड़
मुजफ्फरनगर। बुधवार शाम जैसे ही मासूम लक्ष्य का शव उसके घर पहुंचा तो मोहल्ले के लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपियों के मकान में तोडफोड़ की। वहां मौजूद सिविल लाइन एसओ चंद्र किरण यादव ने बड़ी मुश्किल से भीड़ को संभाला। पुलिस ने आरोपी विपुल के परिवार को यहां ना फिलहाल रहने की नसीहत दी है।
शव यात्रा में उमडे़ हजारों लोग
मुजफ्फरनगर। मासूम लक्ष्य घर का इकलौता बेटा था, उसकी दो बड़ी बहनें हैं। लक्ष्य की शवयात्रा जैसे ही चली तो इंदिरा कालोनी और आसपास की कालोनियों से भारी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। इस दौरान मकानों की छतों पर भी भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। शवयात्रा के दौरान लगभग हर व्यक्ति की आंख से आंसू बह रहे थे।
विज्ञापन
इंदिरा कालोनी में रहने वाले शिक्षा विभाग के लिपिक अरविंद शर्मा का 11 साल का बेटा लक्ष्य छह सितंबर को अचानक घर के बाहर से लापता हो गया था। दस दिन बाद बुधवार को बागोवाली गांव के जंगल से मासूम लक्ष्य की गली -सड़ी लाश बरामद हुई थी।
विज्ञापन
पुलिस ने इस घटना की पड़ताल के बाद अरविंद के पड़ौसी विपुल सैनी, गाजावाली निवासी पंकज प्रजापति और अलमासपुर निवासी दलित युवक कपिल को गिरफ्तार कर इस केस का खुलासा कर दिया था। बकौल पुलिस, पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें आई।
विज्ञापन
बकौल पुलिस अरविंद के पड़ौसी विपुल वारदात को अंजाम देने के बाद भी परिवार के लोगों के साथ मिलकर विपुल को तलाशने का ढोंग करता रहा। वह अरविंद के घर आने वाले मेहमानों को पानी पिलाने के साथ उन्हें दिलासा भी देता था।
लक्ष्य के परिजनों को उसपर इस हद तक विश्वास था कि जब जांच पड़ताल में शक के आधार पर पुलिस ने विपुल को पकड़ा तो खुद लक्ष्य के परिजनों ने ही इस पर एतराज जताया था और पुलिस से कहा था कि विपुल ऐसा नहीं कर सकता।
पुलिस के अनुसार कातिलों ने वारदात को बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया, लेकिन एक सुराग ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस के अनुसार हत्या के तीसरे दिन तीनों ही कातिल रात के समय लाश पर नमक डालने गए थे।
इनका प्लान था कि यदि लाश को गड्ढे में दबाकर उसपर नमक डाल दिया जाएगा, तो लाश कुछ ही दिनों में गल जाएगी। इसके लिए वह एक नमक का बैग और फावड़ा लेकर भी गए थे। उसी दिन रात में खेत पर पानी चलाने गया एक किसान भी मौजूद था, जिसे देखकर तीनों आरोपी नमक का बैग और फावड़ा छोड़कर भाग गए। पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो पुलिस ने छानबीन की।
डर के कारण विपुल घर से गायब हो गया, जिस पर विपुल पर पुलिस का शक गया और वह उसके पीछे लग गई और उसे दबोच लिया। विपुल ने पूछताछ में हत्या का पूरा घटनाक्रम ,खोल दिया और तीनों आरोपी धरे गए।
विपुल ने कभी दुकान नहीं मांगी : दादा
मुजफ्फरनगर। इस हत्याकांड में विपुल के पकड़े जाने पर मृतक छात्र के दादा रिटायर्ड अध्यापक श्यामलाल शर्मा हैरत में हैं। आंसू पोंछते हुए कहते हैं कि विपुल का परिवार 30 साल से उनका पड़ोसी है। वह हर तरह से इस परिवार की मदद करते हैं। विपुल की शादी में भी वह उसकी बारात में गए थे।
दुकान के विवाद की बात को नकारते हुए कहा कि आरोपी ने कभी उनसे दुकान नही मांगी। थाने में विपुल ने बताया कि उसने कई बार दुकान किराए पर मांगी लेकिन उन्हें दुकान ना देकर मोहल्ले के ही मोंटी को देने की वजह से उसने परिवार से बदला लेने की ठान ली थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
वीडियो गेम खेलने के बहाने ले गया था
मुजफ्फरनगर। एसएफ डीएवी पब्लिक स्कूल के कक्षा पांच के छात्र लक्ष्य का वीडियो गेम का शौक मौत का कारण बन गया। आरोपी विपुल के अनुसार छह सितंबर की शाम लक्ष्य गली में साइकिल चला रहा था। उसने उसे वीडियो गेम खिलाने की बात कहकर अपने साथ चलने का कहा।
तुरंत की वह उसके साथ चल दिया। कच्ची सड़क पर पंकज की दुकान पर जाकर उसने कुछ ही देर बाद लक्ष्य की गला घोंटकर हत्या कर दी। मुख्य आरोपी का कहना है कि बाकी के सभी आरोपियों ने यारी दोस्ती में उसका साथ दिया है। बाद में रात के समय एक बोरी में शव को ठूंसकर उसे बागो वाली के पास एक खेत में डाल आए।
आरोपी के घर तोड़फोड़
मुजफ्फरनगर। बुधवार शाम जैसे ही मासूम लक्ष्य का शव उसके घर पहुंचा तो मोहल्ले के लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपियों के मकान में तोडफोड़ की। वहां मौजूद सिविल लाइन एसओ चंद्र किरण यादव ने बड़ी मुश्किल से भीड़ को संभाला। पुलिस ने आरोपी विपुल के परिवार को यहां ना फिलहाल रहने की नसीहत दी है।
शव यात्रा में उमडे़ हजारों लोग
मुजफ्फरनगर। मासूम लक्ष्य घर का इकलौता बेटा था, उसकी दो बड़ी बहनें हैं। लक्ष्य की शवयात्रा जैसे ही चली तो इंदिरा कालोनी और आसपास की कालोनियों से भारी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। इस दौरान मकानों की छतों पर भी भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। शवयात्रा के दौरान लगभग हर व्यक्ति की आंख से आंसू बह रहे थे।