{"_id":"579baa294f1c1bf56e21e521","slug":"murderers-sentenced-to-life-after-13-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"13 साल बाद चार हत्यारों को उम्रकैद ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
13 साल बाद चार हत्यारों को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:40 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यायालय ने सहारनपुर जिले के डॉ. राशिद खान हत्याकांड में चार लोगों को आजीवन कारावास और 60-60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस हत्याकांड में 13 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद सहारनपुर के थाना बेहट पर गांव नंगला झंडा निवासी अमली खान ने 20 अक्तूबर 2003 को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया था कि उसके पिता डॉ. राशिद खान गौ रक्षा समिति के उपाध्यक्ष थे, जिन्होंने वर्ष 1990 में गांव के कुछ लोगों को गौ हत्या करने में पुलिस से गिरफ्तार करवा दिया था। जिसके कारण वह लोग रंजिश रखते थे और लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व भी इन पर हमला किया था, जिसका वाद न्यायालय में लंबित है।
मुल्जिमान बयान बदलने के लिए दबाव बना रहे थे। वारदात के रोज शाम लगभग 7:45 बजे जब उसके पिता डॉ. राशिद कलसिया से स्कूटर से घर लौट रहे थे। तभी नौशाद पुत्र जहूरउल्लाह, महबूब पुत्र सफीउल्लाह, अफराज पुत्र रिजवान, कामयाब पुत्र अमानुउल्लाह निवासी नंगला झंडा ने गांव में घेरकर गोलियों से भूनकर उनकी हत्या कर दी थी।
विज्ञापन
इस मुकदमे की सुनवाई मुजफ्फरनगर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद गुप्ता की अदालत संख्या पांच गैंगेस्टर कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीताराम आर्य एवं कुंवरपाल सैनी ने 10 गवाह और सुबूूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए चारों अभियुक्तों को हत्या करने का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 2/3 गैंगेस्टर एक्ट के तहत 10-10 वर्ष का कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जनपद सहारनपुर से यह मुकदमा मुजफ्फरनगर गैंगेस्टर कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद सहारनपुर के थाना बेहट पर गांव नंगला झंडा निवासी अमली खान ने 20 अक्तूबर 2003 को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया था कि उसके पिता डॉ. राशिद खान गौ रक्षा समिति के उपाध्यक्ष थे, जिन्होंने वर्ष 1990 में गांव के कुछ लोगों को गौ हत्या करने में पुलिस से गिरफ्तार करवा दिया था। जिसके कारण वह लोग रंजिश रखते थे और लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व भी इन पर हमला किया था, जिसका वाद न्यायालय में लंबित है।
विज्ञापन
मुल्जिमान बयान बदलने के लिए दबाव बना रहे थे। वारदात के रोज शाम लगभग 7:45 बजे जब उसके पिता डॉ. राशिद कलसिया से स्कूटर से घर लौट रहे थे। तभी नौशाद पुत्र जहूरउल्लाह, महबूब पुत्र सफीउल्लाह, अफराज पुत्र रिजवान, कामयाब पुत्र अमानुउल्लाह निवासी नंगला झंडा ने गांव में घेरकर गोलियों से भूनकर उनकी हत्या कर दी थी।
विज्ञापन
इस मुकदमे की सुनवाई मुजफ्फरनगर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद गुप्ता की अदालत संख्या पांच गैंगेस्टर कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीताराम आर्य एवं कुंवरपाल सैनी ने 10 गवाह और सुबूूत पेश किए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए चारों अभियुक्तों को हत्या करने का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 2/3 गैंगेस्टर एक्ट के तहत 10-10 वर्ष का कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जनपद सहारनपुर से यह मुकदमा मुजफ्फरनगर गैंगेस्टर कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था।