दो भाइयों को आजीवन कारावास
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फिरोज अली के अनुसार सिखेड़ा थाने पर गांव बिलासपुर निवासी फैजुल हसन ने 12 अगस्त 2010 को अपने पिता की हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि उसके पिता बदरुद्दीन का आठ लाख रुपया यूसुफ पुत्र दौल्ला निवासी बड़ौत, जिला बागपत पर बकाया था। जिसको चुकाने के लिए यूसुफ ने फोन करके बदरूद्दीन को बताया था कि वह गांव बिहारी निवासी मूसा पुत्र हफीजुद्दीन से अपने पैसे के बदले जमीन लेने की बात कर ले। बदरुद्दीन दो अगस्त 2010 की सुबह अपनी पत्नी हाजरा से मूसा के घर जाने की बात कह कर गया था, मगर लौट नहीं आया। तलाश करने पर बदरूद्दीन की बाइक के कुछ हिस्से बिहारी के जंगल से बरामद हुए। 12 अगस्त को बिहारी के जंगल से लाश बरामद हुई। जिसकी पहचान परिजनों ने कपड़ों के आधार पर बदरुद्दीन के रुप में की थी।
मुकदमे में यूसुफ पुत्र दौल्ला निवासी बड़ौत, मूसा व आस मौहम्मद उर्फ आशू पुत्रगण हफीजुद्दीन निवासी बिहारी, आस मौहम्मद पुत्र सद्दीक और अबरार पुत्र शेरदीन निवासी फुलत को नामजद किया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे-6 अंबर रावत की अदालत हुई। एडीजीसी ने नौ गवाह कोर्ट में पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए शुक्रवार को मूसा व आस मौहम्मद उर्फ आशू पुत्रगण हफीजुद्दीन को हत्या करने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था । शनिवार को कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अदालत ने आश मौहम्मद पुत्र सद्दीक और अबरार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अभियुक्त यूसुफ की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।