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कैराना विधायक की बढ़ सकती है मुश्किलें  

ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 23 May 2017 12:24 AM IST
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कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

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शामली के कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन का खाकी और झिंझाना चेयरमैन के खिलाफ अभद्र भाषा प्रयोग करते हुए वीडियो वायरल होने का मामला तूल पकड़ गया है। झिंझाना थाने में दर्ज रिपोर्ट से विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एफआईआर में लगी धारा 153 (ए) गैर जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती है। अदालत में पेश हुए बगैर उन्हें जमानत नहीं मिल पाएगी। वहीं, मामले की गंभीरता भांपने में जुटी पुलिस भी पशोपेश में है। फिलहाल पुलिस कह रही है कि मामले की जांच अभी जारी है। 
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व्हाट्सऐप पर एक धर्म विशेष के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी डालने वाले आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को झिंझाना में पंचायत बुलाई गई थी। उसमें कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन को भी बुलाया गया था। हालांकि झिंझाना में मुस्लिम समाज के एक धड़े के कुछ लोगों ने हस्तक्षेप करते हुए पंचायत में लोगों से नहीं पहुंचने का आह्वान कर दिया। इस वजह से पंचायत टल गई थी। इस बीच कैराना विधायक नाहिद हसन द्वारा खाकी और झिंझाना चेयरमैन सरफराज के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए वीडियो वायरल होने से पुलिस महकमे में खलबली मच गई थी। 

इसके बाद, रविवार को कैराना सपा विधायक नाहिद हसन के खिलाफ झिंझाना थाने में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी, जिसमें गाली गलौज की धारा 504 तथा धार्मिक भावना भड़काने की धारा 153ए लगाई गई है। उसमें आरोप लगाया गया है कि नाहिद हसन ने गणमान्य लोगों के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग किया। विधायक नाहिद हसन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुए 24 घंटे बीत गए हैं। एकतरफ इस केस में विधायक नाहिद हसन की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि पुलिस भी स्थिति को भांपने में लगी हुई है कि विधायक नाहिद हसन की गिरफ्तारी का प्रयास करने से कोई नया बखेड़ा खड़ा न हो जाए। इसी कारण अभी मामले पर सिर्फ जांच की बात कही जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाहिद हसन के खिलाफ दर्ज मामले की गंभीरता से जांच चल रही है। 
 
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रहमपाल सिंह चौहान के मुताबिक धारा 504 जमानती अपराध है, जबकि 153ए गैर जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इस धारा के तहत जमानत कराने के लिए आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश जरूर होना पड़ेगा। ऐसे मामलों में शांतिभंग होने का खतरा, अपराध की पुनरावृत्ति होने या अपराध को बढ़ावा मिलने की आशंका के चलते आरोपित जनप्रतिनिधि को पुलिस गिरफ्तार भी कर सकती है।

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