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बेटी का खून बहाने में नहीं कांपे पिता के हाथ
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:15 AM IST
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पुलिस गिरफ्त में आया बेटी की हत्या करने वाला पिता।
- फोटो : अमर उजाला
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चरथावल अपने ही हाथों अपनों का खून। बेरहम बाप के अपनी मासूम औलाद का कत्ल करने में जरा भी हाथ नहीं कांपे। बदचलनी के शक में बेटी की सरेराह गर्दन काटने वाला हत्यारोपी पिता पुलिस के सामने अपना अपराध कबूल करने से भी नहीं हिचका।
बुधवार को कस्बे के मोहल्ले शेखजादगान गर्बी में हुई घटना दिल दहला देने वाली है। बेटी का खून बहाने का बाप जब्बार को जरा भी मलाल नहीं है। पूरा चरथावल क्षेत्र घटना से हैरत में है। इससे पूर्व निरधना गांव में जनवरी 2013 को शहफाना की हत्या के आरोप में भाई मुंतजिर को जेल जाना पड़ा था। अक्तूबर 2011 में थाने के सामने रहने वाले सत्तार की 19 वर्षीय लड़की गुलशाना का कत्ल थाने से मात्र 50 गज की दूरी पर कर दिया गया था, जिसमें पिता सत्तार पर हत्या का आरोप उनके भाई शाद्दी ने लगाया था।
वर्ष 2008 में आठ मई को सरेराह कुटेसरा गांव में भाई नौशाद द्वारा बहन गुलशाना का खून बहा दिया था। 26 नवंबर 2008 की सुबह नौ बजे कस्बा निवासी शमशुद्दीन पर दिनदहाड़े चाकू से गर्दन पर वार कर बहन शमशीदा को मारने का आरोप लगा था। पुलिस ने दोनों घटनाओं को गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को फायदा पहुंचाने का काम किया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों मामलों में आरोपी कोर्ट से बरी हो चुके हैं।
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पूर्व जिला बार संघ अध्यक्ष एवं क्रिमिनल मामलों के अधिवक्ता अनिल जिंदल एडवोकेट का मानना है कि इस तरह की ज्यादातर घटनाओं में वादी आरोपियों के परिवार के होने के कारण कोर्ट में मुकदमों में सजा नहीं हो पाती है। यदि पुलिस इस तरह के मामलों में खुद मुकदमा दर्ज करे तो कोर्ट में मुकदमों में मजबूत पैरवी होगी और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
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बुधवार को कस्बे के मोहल्ले शेखजादगान गर्बी में हुई घटना दिल दहला देने वाली है। बेटी का खून बहाने का बाप जब्बार को जरा भी मलाल नहीं है। पूरा चरथावल क्षेत्र घटना से हैरत में है। इससे पूर्व निरधना गांव में जनवरी 2013 को शहफाना की हत्या के आरोप में भाई मुंतजिर को जेल जाना पड़ा था। अक्तूबर 2011 में थाने के सामने रहने वाले सत्तार की 19 वर्षीय लड़की गुलशाना का कत्ल थाने से मात्र 50 गज की दूरी पर कर दिया गया था, जिसमें पिता सत्तार पर हत्या का आरोप उनके भाई शाद्दी ने लगाया था।
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वर्ष 2008 में आठ मई को सरेराह कुटेसरा गांव में भाई नौशाद द्वारा बहन गुलशाना का खून बहा दिया था। 26 नवंबर 2008 की सुबह नौ बजे कस्बा निवासी शमशुद्दीन पर दिनदहाड़े चाकू से गर्दन पर वार कर बहन शमशीदा को मारने का आरोप लगा था। पुलिस ने दोनों घटनाओं को गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को फायदा पहुंचाने का काम किया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों मामलों में आरोपी कोर्ट से बरी हो चुके हैं।
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पूर्व जिला बार संघ अध्यक्ष एवं क्रिमिनल मामलों के अधिवक्ता अनिल जिंदल एडवोकेट का मानना है कि इस तरह की ज्यादातर घटनाओं में वादी आरोपियों के परिवार के होने के कारण कोर्ट में मुकदमों में सजा नहीं हो पाती है। यदि पुलिस इस तरह के मामलों में खुद मुकदमा दर्ज करे तो कोर्ट में मुकदमों में मजबूत पैरवी होगी और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगेगी।